बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 94

Site Administrator

Editorial Team

06 Jul, 2015

14692 Times Read.

बैंकिंग जागरूकता,


RSS Feeds RSS Feed for this Article



Read this in English

Mudra-Card-Corporation-Bank-2015

1) प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri MUDRA Yojana – PMMY) के तहत मुद्रा कार्ड (Mudra Card) जारी करने वाला देश का पहला बैंक कौन सा बना है जिससे यह मुद्रा कार्ड 4 जुलाई 2015 को जारी किया? – कॉरपोरेशन बैंक (Corporation Bank)

विस्तार: छोटे तथा मंझले व्यापारियों को आसान तरीके से ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेण्ट एण्ड रिफाइनेंस एजेंसी (यानि MUDRA) की स्थापना कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी। इसी योजना के तहत देश में अपनी तरह का पहला मुद्रा कार्ड 4 जुलाई को कॉरपोरेशन बैंक ने जारी किया। इस कार्ड के द्वारा छोटे व्यवसायियों को अपनी पूँजी के तौर पर धन आहरित करने की सुविधा प्रदान की जायेगी। मुद्रा योजना में व्यवसायियों को उनकी ऋण वापस करने की क्षमता के आधार पर तीन प्रकार के ऋण उपलब्ध कराने की योजना है।


NPAs-April-2015

2) जून 2015 के दौरान केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की देश की प्रमुख सरकारी-निजी बैंकिंग एवं वित्तीय कम्पनियों के प्रमुखों से हुई समीक्षा बैठक में मार्च 2015 के अंत में सार्वजनिक बैंकों (PSU Banks) की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ (प्रतिशत में) कितनी होने की बात सामने आई? – 5.17%

विस्तार: इस समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ (Gross Non-Performing Assets – GNPAs) मार्च 2015 में बढ़कर 5.17% हो गई हैं। वहीं इन बैंकों की GNPAs में यदि रिस्ट्रक्चर्ड ऋणों (restructured loans) को भी शामिल कर लिया जाय तो यह 13.2% हो जाता है। में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण कई हैं – जैसे वैश्विक आर्थिक मंदी, मूलभूत संरचना सम्बन्धित कुछ परियोजनाओं में समस्याएं तथा आर्थिक अनिश्चितता के कारण क्रेडिट में कम वृद्धि होना।

उक्त आर्थिक समीक्षा में सामने आए कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु

देश के 26 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ (GNPAs) पिछले साल के लाख 2.27 करोड़ रुपए के स्तर से बढ़कर मार्च 2015 में 2.78 लाख करोड़ हो गई हैं (यानि 22.5% वृद्धि)

एक तरफ जहाँ देश के 19 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की GNPAs पिछले साल के 1,37,487 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,92,270 करोड़ रुपए हो गई हैं वहीं भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की GNPAs 79,818 करोड़ से घटकर 73,508 करोड़ रह गई हैं (यानि 8% की कमी)

देश के नए निजी बैंकों (New private banks) की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ पिछले साल के 18,133 करोड़ रुपए से 35% बढ़कर 24,534 करोड़ रुपए हो गई हैं (नए निजी बैंकों में शामिल निजी बैंक हैं – एक्सिस बैंक, डेवलपमेण्ट क्रेडिट बैंक (DCB), ICICI बैंक, HDFC बैंक, कोटक महिन्द्रा बैंक और यस बैंक)

नए निजी बैंकों में GNPAs में सर्वाधिक वृद्धि ICICI बैंक में दर्ज की गई है। ये एक साल में 10,506 करोड़ से बढ़कर 15,095 करोड़ रुपए हो गई हैं, यानि 73.7% वृद्धि। वहीं इसके बाद DCB Bank का स्थान है (33.8% वृद्धि)

देश के आठ पुराने निजी बैंकों ने समान समयावधि के दौरान GNPAs में 50% की भारी-भरकम वृद्धि दर्ज की है। इनकी GNPAs पिछले साल के 5,170 करोड़ रुपए से बढ़कर 7,755 करोड़ रुपए हो गई हैं।

पुराने निजी बैंकों की श्रेणी में GNPAs में सर्वाधिक वृद्धि जम्मू-कश्मीर बैंक में दर्ज हुई है, 253%। इस साल उसकी 783 करोड़ से बढ़कर 2,764 करोड़ रुपए हो गई हैं। इसके बाद करुर वैश्य बैंक (143% वृद्धि) और साउथ इण्डियन बैंक (48.5% वृद्धि) का स्थान आता है। वहीं तमिलनाड मर्केन्टाइल बैंक, लक्ष्मी विलास बैंक और फेडरल बैंक ने GNPAs में कमी करने में सफलता पाई है।


AIIB-2015

3) एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेण्ट बैंक (Asian Infrastructure Investment Bank – AIIB) की स्थापना की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए 29 जून 2015 को भारत समेत इस बैंक के 50 संस्थापक सदस्यों (founding members) ने बैंक की शर्तों तथा नियमों पर अपनी सहमति जताते हुए हस्ताक्षर कर दिए। भारत की इस बैंक में कितने प्रतिशत हिस्सेदारी तय की गई है? – 8.52%

विस्तार: एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेण्ट बैंक (AIIB) का यह हस्ताक्षर समारोह चीन की राजधानी बीजिंग (Beijing) के ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल (Great Hall of People) में आयोजित किया गया। इसमें भारत तथा चीन समेत कुल 50 संस्थापक सदस्यों ने अपने हस्ताक्षर किए। इस बैंक का मुख्य उद्देश्य बिना किसी भेदभाव तथा राजनीतिक मतभेद के सदस्य देशों को उनकी आवश्यकतानुसार ऋण उपलब्ध कराना होगा। इसका मुख्यालय बीजिंग में ही होगा। भारत की एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेण्ट बैंक में 8.52% की हिस्सेदारी होगी जबकि उसका मताधिकार (voting rights) 7.5% तय किया गया है। खास बात यह है कि मताधिकार को तय करने में देश की बैंक में लगी पूँजी (capital) के बजाय देश के आकार को आधार बनाया गया है, जिससे परस्पर भेदभाव न हो। चीन की इस बैंक में 30.34% की सर्वाधिक हिस्सेदारी तय की गई है तथा 26.06% मताधिकार के साथ उसे वीटो शक्ति भी प्रदान की गई है। चीन के बाद भारत ही AIIB में सबसे बड़ा हिस्सेदार देश है। इस बैंक में शामिल अन्य प्रमुख देश हैं – ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्राज़ील, कम्बोडिया, फिनलैण्ड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जॉर्डन, नेपाल, नीदरलैण्ड्स, न्यूज़ीलैण्ड, नॉर्वे, पाकिस्तान, पुर्तगाल, कोरिया, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर, स्पेन, श्रीलंका, स्वीडन, स्विट्ज़रलैण्ड और ब्रिटेन।


4) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा 19 जून 2015 को शुरू किए गए उस ऑनलाइन फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा विनिमय) प्लेटफॉर्म का क्या नाम है जिसके माध्यम से बैंक ने अपने ग्राहकों को ऑनलाइन विदेशी मुद्रा सम्बन्धित लेन-देन की सहूलियत प्रदान की है? – एसबीआई ई-फॉरेक्स (SBI eforex)

विस्तार: एसबीआई ई-फॉरेक्स (SBI eforex) उस इंटरनेट-आधारित सेवा को दिया गया नाम है जो SBI ने शुरू की है। इसके तहत लोग अपने घर बैठ कर तमाम विदेशी मुद्राओं के विनिमय मूल्यों (Foreign Exchange prices) पर निगरानी कर सकेंगे तथा अपने विदेशी मुद्रा सम्बन्धित लेन-देन को ऑनलाइन कर सकेंगे। इसको प्रयोगकर्ताओं की आवश्यकतानुसार अधिक आसान तथा सुरक्षित बनाया गया है। इसके अलावा इसे ग्राहक अपनी आवश्यकतानुसार कस्टमाइज़ कर सकेंगे, जिसमें वे एक डील की उच्चतम सीमा, प्रति-दिन की लेन-देन सीमा, आदि को तय कर सकेंगे।


5) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अभी तक की स्थापित परंपरा में परिवर्तन करते हुए 1 जुलाई 2015 को अपनी सार्वजनिक सेवाएं जनता को उपलब्ध कराईं। सामान्यत: प्रत्येक वर्ष की 1 जुलाई को RBI अपनी सार्वजनिक सेवाओं को बंद रखता है। क्यों? – क्योंकि यह RBI के खातों की बंदी का समय होता है

विस्तार: उल्लेखनीय है कि भारत में व्यवसायों के लिए जहाँ वित्तीय वर्ष अप्रैल से मार्च के बीच होता है वहीं RBI का वित्तीय वर्ष जुलाई से प्रारंभ होकर अगले वर्ष की जून तक होता है। खातों की बंदी के चलते RBI 1 जुलाई को अपनी सार्वजनिक सेवाओं को बंद रखता आया है। लेकिन इस साल की 1 जुलाई को RBI ने अपनी तमाम सेवाओं को बंद नहीं किया तथा RTGS/NEFT, फण्ड हस्तांतरण, प्रतिभूतियों का सेटलमेंट, आदि जैसी सेवाओं को आम जनता के लिए जारी रखा।


Greek-Crisis-2015

6) यूनानी बैकों में 29 जून 2015 से बैंकिंग अवकाश (Bank Holiday) की शुरूआत हो गई क्योंकि यूनान द्वारा यूरोपीय संघ (EU) से हटने के मुद्दे पर सरकार और यूरोपीय संघ पर गतिरोध समाप्त नहीं हुआ। यूनान में इस संकट के चलते बैंक अवकाश लागू करना क्यों जरूरी हो गया था? – क्योंकि स्थितियों को देखते हुए यूरोपीय केन्द्रीय बैंक (ECB) ने घोषणा की है कि वो यूनान को दी जाने वाली आपातकालीन ऋण सहायता बंद कर देगा

विस्तार: उल्लेखनीय है कि यूनानी आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि में यूरोपीय केन्द्रीय बैंक (European Central Bank – ECB) यूनान को आपातकालीन तरलता सहायता (Emergency Liquidity Assistance – ELA) उपलब्ध कराता आया है जिसके चलते देश में तरलता सम्बन्धित संकट न खड़ा हो। लेकिन अब यूनानी गतिरोध का कोई हल न निकलने के चलते स्पष्ट हो गया कि यूनान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को 1.6 अरब डॉलर ऋण की अदायगी नहीं कर पायेगा जिसको चुकाने की अंतिम तिथि 30 जून 2015 है।  हालांकि ECB ने यह भी कहा है कि वह इस सहायता को बंद एक स्तर पर कायम रख सकता है लेकिन यूनान की स्थितियों को देखते हुए द्वारा तरलता सहायता में वृद्धि ने किए जाने पर देश में बैंकिंग उद्योग तबाह हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उहापोह की स्थितियों में यूनानी नागरिक भारी संख्या में अपना पैसा निकाल रहे हैं। ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि यूनानी बैंकों का समस्त धन 5 जुलाई 2015 तक समाप्त हो सकता है, जोकि यूनानी प्रधानमंत्री द्वारा घोषित जनमत संग्रह की तिथि है। इस जनमत संग्रह (Referendum) के माध्यम से यूनान के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के मुद्दे पर लोगों की राय मांगी जायेगी। ऐसी स्थितियों में यूनानी सरकार ने देश में बैंक अवकाश की घोषणा कर दी जिसके कम से कम 5 जुलाई तक प्रभावी रहने की संभावना है। बैंक अवकाश के तहत बैंकों को बंद कर उसकी तरलता समाप्त होने से बचाने का प्रयास किया जाता है। इस बैंकिंग अवकाश की अवधि के दौरान यूनान के सभी बैंक तथा स्टॉक एक्सचेंज 29 जून से एक सप्ताह के लिए बंद कर दिए गए तथा ATM मशीनों से अधिकतम 60 यूरो निकालने की पाबंदी लगा दी गई।


7) भारत के सबसे बड़े बैंक – भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 30 जून 2015 को किस प्रमुख ट्रेवल कम्पनी के साथ गठजोड़ करने की घोषणा की जिसके माध्यम से बैंक ई-कॉमर्स (e-commerce) और एम-कॉमर्स (m-commerce) के प्रति लगातार बढ़ते रुझान का लाभ उठाने की कोशिश करेगा? – मेकमाईट्रिप डॉट कॉम

विस्तार: SBI और मेकमाईट्रिप (MakeMyTrip.com) के बीच हुए इस गठजोड़ से पर्यटन करने के इच्छुक SBI के ग्राहकों को व्यक्तिगत बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने की कोशिश की जायेगी। इसमें देशी तथा विदेशी स्थलों पर पर्यटन के इच्छुक लोगों को EMI सुविधाएं, फॉरेक्स (Forex) कार्ड जैसी सुविधाएं तथा अन्य ट्रेवल सम्बन्धी वित्तीय उत्पाद उपलब्ध कराए जायेंगे। वहीं मेकमाईट्रिप के ग्राहकों को SBI के डेबिट/क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करने पर कई विशेष ऑफर्स प्रदान किए जायेंगे। SBI की अध्यक्षा अरुंधति भट्टाचार्य (Arundhati Bhattacharya) ने बैंक के ई-कॉमर्स प्रयासों के प्रति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका प्रयास बैंक को ई-कॉमर्स सम्बन्धी सभी सेवाएं का “वन-स्टॉप” सॉल्यूशन प्रोवाइडर बनाने का रहेगा।


Zimbabwe-Inflation-2015

8) कौन सा अफ्रीकी देश जून 2015 से अपने देश की मुद्रा को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की क्योंकि वर्षों जबर्दस्त मुद्रास्फीति (Hyper-Inflation) झेलने के चलते यहाँ की मुद्रा लगभग व्यर्थ हो गई है? – जिम्बाब्वे (Zimbabwe)

विस्तार: जिम्बाब्वे में राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे (Robert Mugabe) की सरकार ने देश की मुद्रा (जिम्बाब्वियन डॉलर – Zimbabwean Dollar) को सितम्बर 2015 तक समाप्त करने का निर्णय लिया है। मुद्रा को वापस लेने की यह प्रक्रिया 15 जून 2015 से शुरू हो जायेगी तथा लोग बैंकों में जाकर इस मुद्रा के एवज में अमेरिकी डॉलर ले सकेंगे। उल्लेखनीय है कि जिम्बाब्वे के डॉलर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दस लाख अरब जिम्बाब्वियन डॉलर के एवज में मात्र 5 अमेरिकी डॉलर लोगों को मिलेंगे। वर्ष 2008 में जब यहाँ मुद्रास्फीति अपने चरम पर थी जब यहाँ के लोग दूध तथा ब्रेड जैसे रोजमर्रा के उत्पादों को खरीदने के लिए थैले भर के करेंसी नोट लेकर दिन में दो बार निकलते थे। तब चीजों के दाम एक ही दिन में दो बार बढ़ जाते थे। देश के ऐसे नागरिक जिन्होंने अपने घरों में धन बचा कर रखा था उन्हें 250 खरब जिम्बाब्वियन डॉलर के एवज में अब मात्र 1 अमेरिकी डॉलर मिलेगा।


9) बॉस्टन कन्सल्टेन्सी ग्रुप (Boston Consulting Group – BCG) की एक नवीनतम रिपोर्ट में दावा किया गया कि वर्ष 2014 के दौरान एशिया ने यूरोप को पछाड़कर विश्व का दूसरा सबसे धनी क्षेत्र (world’s second-richest region) बनने का रुतबा हासिल कर लिया। इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि एशिया प्रशांत क्षेत्र (जापान को छोड़कर) की कुल निजी सम्पत्ति (private wealth) वर्ष 2014 के अंत में 47 खरब डॉलर ($47 billion) हो गई तथा उसने यूरोप को पछाड़ दिया। विश्व का कौन सा क्षेत्र अभी भी निजी सम्पत्ति के मामले में पहले स्थान पर बना हुआ है? – उत्तर अमेरिका (North America)

विस्तार: इस रिपोर्ट के अनुसार 51 खरब डॉलर ($51 billion) की कुल निजी सम्पत्ति के साथ उत्तर अमेरिका अभी भी विश्व का सबसे धनी क्षेत्र बना हुआ है। लेकिन इसमें यह दावा भी किया गया कि एशिया वर्ष 2016 में उत्तर अमेरिका को पछाड़कर विश्व का सबसे धनी क्षेत्र बन जायेगा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 तक एशिया में विश्व की कुल निजी सम्पत्ति की 34% हिस्सेदारी होगी। वर्ष 2014 के दौरान विश्व की कुल निजी सम्पत्ति में 12% वृद्धि दर्ज हुई तथा इसका कुल मूल्य 164 खरब डॉलर हो गया। वर्ष 2012 व 2013 की तरह एशिया प्रशांत क्षेत्र 2014 में भी सबसे तीव्र गति से वृद्धि दर्ज करने वाला क्षेत्र रहा।


 

Responses on This Article

© NIRDESHAK. ALL RIGHTS RESERVED.