बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 93

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22 Jun, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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1) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2 जून 2015 को घोषित अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (Bi-Monthly Monetary Policy Review) में रेपो दर (Repo Rate) में 25 आधार अंकों की कमी की अहम घोषणा की। यह इस साल रेपो दर में की गई अब तक की तीसरी कटौती है। इसके बाद अब नई रेपो दर क्या हो गई है? – 7.25%

विस्तार: RBI के गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने मुद्रास्फीति में मंदी दर्ज होने तथा उद्योग जगत की माँग को ध्यान में रखते हुए रेपो दर को वर्तमान 7.50% से 25 आधार अंक घटाकर 7.25% करने की घोषणा कर दी। उल्लेखनीय है कि RBI ने इस साल जनवरी और मार्च महीनों के दौरान भी रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की थी। रेपो दर को देश में ब्याज दरों का मुख्य आधार माना जाता है तथा इसी दर पर RBI देश के वाणिज्यिक बैंकों को लघु-कालिक ऋण (Short Term Loan) प्रदान करता है। इस कटौती से स्पष्ट हो गया कि देश की आर्थिक नीतियों के निर्धारक अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना चाहते हैं, बावजूद इसके कि 29 मई 2015 को जारी आंकड़े में यह बात सामने आई थी कि मार्च 2015 में समाप्त हुई तिमाही में भारत की विकास दर (7.5%) चीन से अधिक रही है। भारत में हाल में आए कॉरपोरेट नतीजे बहुत संतोषजनक नहीं रहे हैं जबकि बैंकों द्वारा प्रदत्त ऋण की दर (bank lending rate) पिछले दो दशक के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गई है। इस सबके चलते केन्द्र सरकार और RBI दोनों पर ब्याज दरों को कम करने का दबाव था।


2) भारत में म्यूचुअल फण्ड (Mutual Fund) उद्योग पर निगरानी रखने वाले संगठन एम्फी (AMFI) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के किस म्यूचुअल फण्ड ने 2014-15 के दौरान एक बार फिर भारत में सर्वाधिक लाभ अर्जित करने वाले म्यूचुअल फण्ड के रूप में अपना रुतबा बरकरार रखने में सफलता हासिल की है? – HDFC म्यूचुअल फण्ड

विस्तार: एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फण्ड्स इन इण्डिया (AMFI) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार HDFC म्यूचुअल फण्ड ने वर्ष 2014-15 के दौरान सभी करों के पश्चात 416 करोड़ रुपए का लाभ (Profit after Tax – PAT) अर्जित किया तथा एक फिर भारत के सबसे लाभ अर्जित करने वाले म्यूचुअल फण्ड के रूप में अपना स्थान बनाने में सफल हुआ। इस मामले में 357 करोड़ रुपए के लाभ के साथ रिलायंस म्यूचुअल फण्ड (Reliance Mutual Fund) का दूसरा स्थान रहा जबकि ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फण्ड (ICICI Prudential MF), जो परिसम्पत्तियों के आधार पर देश का दूसरा सबसे बड़ा म्यूचुअल फण्ड है, इस वर्ष के दौरान 247 करोड़ का लाभ अर्जित करने के साथ तीसरे स्थान पर रहा। बिरला सनलाइफ (Birla Sunlife) 123 करोड़ के कुल लाभ के साथ चौथे स्थान पर रहा।


3) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 2 जून 2015 को RBI द्वारा रेपो दर (Repo Rate) में कटौती किए जाने के कुछ ही घण्टों के भीतर अपनी मुख्य ब्याज दर (base lending rate) को 15 आधार अंक घटाने की घोषणा कर दी। इस कटौती के बाद SBI की मुख्य ब्याज दर क्या हो गई है? – 9.7%

विस्तार: भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जोकि भारत का सबसे ऋणदाता बैंक है, ने 2 जून को अपनी मुख्य ब्याज दर को 15 आधार अंक घटा कर 9.7% करने की घोषणा कर दी। इस दर को 8 जून 2015 से प्रभावी माना जायेगा। माना जा रहा है कि इस कटौती से बैंक के होम लोन तथा ऑटो लोन के ग्राहकों को अपनी मासिक किश्त (EMI) में राहत मिलेगी। वहीं देश के कई अन्य बैंकों ने भी अपनी ब्याज दर को कम करने का सिलसिला 2 जून से शुरू कर दिया।


4) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकों के फंसे हुए कर्जों की लगातार बढ़ती समस्या को सुलझाने की दिशा में 8 जून 2015 को क्या अहम घोषणा की? – उसने बैंकों को अपने प्रदत्त ऋणों की वसूली के लिए कर्ज वापस न करने वाली कम्पनियों में बैंकों को 51% तथा उससे अधिक हिस्सेदारी हासिल करने की अनुमति प्रदान कर दी

विस्तार: उल्लेखनीय है कि हाल-फिलहाल में कम्पनियों को प्रदत्त कर्जों की वसूली न कर पाने के कारण बैंकों के घाटे में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे ऋणों के लिए यह बैंक कम्पनियों में हिस्सेदारी हासिल कर कर्जों की भरपाई की कोशिश करते हैं। अब RBI ने इस प्रकार हासिल हिस्सेदारी की सीमा को 51% से भी बढ़ा दिया है ताकि बैंक अधिक सक्रियता से ऋण वसूली कर सकें। लेकिन RBI ने यह निर्देश देते हुए यह उल्लेख भी किया कि इस उद्देश्य के लिए हासिल की गई हिस्सेदारी को जल्द-से-जल्द किसी नए प्रमोटर को बेच देना चाहिए।  इसके अलावा RBI ने एक नई स्ट्रैटिजिक डेब्ट रिस्ट्रक्चरिंग (‘strategic debt restructuring’ – SDR) योजना की घोषणा भी की जिसके तहत बैंक डेब्ट (debt – ऋण) को कम्पनी के खातों की समीक्षा के 30 दिन के भीतर इक्विटी (equity) में तब्दील करने की सुविधा प्रदान की जायेगी। RBI ने इन नियमों को 8 जून 2015 से पूर्व के खातों पर लागू करने की घोषणा की।


5) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 11 जून 2015 को किस समुदाय को भारत के घरेलू संगठित चिट फण्ड (Chit Funds) में निवेश करने की अनुमति प्रदान की? – अप्रवासी भारतीय (Non-Resident Indians – NRIs)

विस्तार:  अप्रवासी भारतीयों को भारत के घरेलू चिट फण्ड बाजार में निवेश करने की RBI की यह अनुमति हालांकि कई शर्तों के साथ प्रदान की गई है। जैसे NRIs इन चिट फण्ड में निवेश करने के लिए बैंकिंग चैनल्स का इस्तेमाल कर सकेंगे जिसमें भारत में संचालित किए जा रहे उनके खाते भी शामिल हैं। राज्यों के चिट फण्ड रजिस्ट्रार इन अप्रवासी भारतीयों को चिट फण्ड में भाग लेने की अनुमति प्रदान करेंगे तथा इस धन को वापस नहीं भेजा जा सकेगा। इसके अलावा इस निवेश को भारत के चिट फण्ड अधिनियम कि परिधि में रहकर उक्त अधिनियम के कानूनों का पालन करना होगा।


6) जून 2015 के दौरान बांग्लादेश ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को बांग्लादेश में एक साझा-उपक्रम (joint-venture) स्थापित कर बीमा व्यवसाय करने की अनुमति प्रदान कर दी। LIC के इस साझा उपक्रम को किस नाम से जाना जायेगा? – एल.आई.सी. बांग्लादेश (LIC Bangladesh)

विस्तार: उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश की बीमा नियामक संस्था (Bangladesh IRDA) ने जून 2015 के दौरान ही LIC को बांग्लादेश में एक साझा-उपक्रम स्थापित कर जीवन बीमा व्यवसाय में उतरने की अनुमति प्रदान कर दी। इस साझा-उपक्रम को एल.आई.सी. बांग्लादेश के नाम से जाना जायेगा तथा इसकी कुल चुकता पूँजी (paid-up capital) एक अरब टका होगी। इसमें से LIC की हिस्सेदारी आधी होगी जबकि शेष 50% पूँजी में उसके बांग्लादेशी साझेदारों का हिस्सा होगा। इस प्रकार बांग्लादेश के बीमा क्षेत्र में उतरने वाली दूसरी विदेशी कम्पनी बन जायेगी। इस क्षेत्र में उतरी पहली विदेशी कम्पनी अमेरिका की मेट लाइफ-एलिको (MetLife-ALICO) है जिसकी यहाँ मात्र एक शाखा है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश के बीमा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की दो बीमा कम्पनियों के अलावा निजी क्षेत्र की 60 बीमा कम्पनियाँ कार्यरत हैं जिनमें से 43 साधारण बीमा (General Insurance) तथा 17 जीवन बीमा (Life Insurance) के क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।


7) आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने 9 जून 2015 को किसे बैंक के नए गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (non-executive Chairman) के रूप में नामित किया है, जो के.वी. कामथ का स्थान लेंगे? – एम.के. शर्मा

विस्तार: एम.के. शर्मा ICICI बैंक के नए गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में के.वी. कामथ (K.V. Kamath) का स्थान लेंगे जो अभी कुछ समय पूर्व ब्रिक्स (BRICS) देशों के प्रस्तावित नए विकास बैंक – न्यू डेवलपमेण्ट बैंक (New Development Bank) के पहले अध्यक्ष (President) नियुक्त किए गए हैं। एम.के. शर्मा इससे पहले हिन्दुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड (HUL) के उपाध्यक्ष रह चुके हैं तथा 2003 से 2011 तक ICICI बैंक के निदेशक मण्डल में स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्यरत थे। वे इसके अलावा भी कई कम्पनियों के निदेशक मण्डल में रहे हैं। अब ICICI बैंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल 5 साल का होगा।


8) वह प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग समूह कौन सा है जिसने 9 जून 2015 को घोषणा की कि वह अपने प्रदर्शन को सुधारने के उद्देश्य से समूह में काम कर रहे लगभग 50 हजार कर्मचारियों की छटनी करेगा, अपने निवेश बैंकिंग व्यवसाय को समाप्त करेगा तथा अपनी अधिक घाटे वाली परिसम्पत्तियों में 290 अरब डॉलर तक की कमी लायेगा? – HSBC

विस्तार: HSBC ब्रिटेन का सबसे बड़ा बैंकिंग समूह है तथा पिछले काफी समय से खराब प्रदर्शन के चलते निवेशकों तथा हिस्सेदारों की नाराजगी झेल रहा है। HSBC बैंक ने निवेशकों तथा विश्लेषकों के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) स्टुअर्ट गुलिवर (Stuart Gulliver) की होने वाली एक अहम बैठक के पूर्व यह अहम घोषणाएं की हैं। माना जा रहा है कि 50 हजार कर्मचारियों की छटनी से HSBC में कर्मचारियों का लगभग पाँचवां भाग प्रभावित होगा तथा। यह छटनी मुख्यत: बैंक के ब्राज़ील तथा तुर्की स्थित परिचालन में होगी। हालांकि बैंक ने यह घोषणा भी की है कि 2017 तक होने वाली इस छटनी के बाद आवश्यकतानुसार कुछ नए कर्मचारियों को बैंक के उच्च प्रदर्शन वाले व्यवसायों तथा कम्प्लायंस (Compliance) विभाग में रखा भी जायेगा। दूसरी तरफ HSBC ने अपनी अधिक घाटे वाली परिसम्पत्तियों में भी 40% तक की कमी करने की घोषणा की है।


9) केन्द्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) ने 10 जून 2015 को एक अध्यादेश (Ordinance) लाकर पराक्रम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के उस प्रावधान में संशोधन करने की घोषणा की जिसके तहत चेक बाउंस (Cheque Bounce) होने के मामलों में मुकदमा उसी स्थान में दायर करने की व्यवस्था है जहाँ यह चेक जारी किया गया है। इस अधिनियम के द्वारा सरकार क्या हासिल करने की इच्छा रखती है? – सरकार इस अधिनियम के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले को पलटना चाहती है जिसके तहत उसने चेक बाउंस होने के मामलों में चेक के जारी किए जाने वाले स्थान में ही मुकदमा दायर किए जाने की व्यवस्था की थी

विस्तार: उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि बाउंस होने के मामलों में मुकदमा उसी स्थान में दायर किया जाय जहाँ से इस चेक को जारी किया गया है। सरकार के मानना है कि इस प्रावधान के चलते देश के तमाम लोग परेशान हैं तथा देश भर के न्यायालयों में ऐसे 18 लाख से अधिक मुकदमे चल रहे हैं। सरकार की मंशा इस विसंगति को समाप्त करने के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की थी लेकिन इस सम्बन्ध में उसके द्वारा लाया गया एक विधेयक (पराक्रम्य लिखत (संशोधन) अधिनियम, 2015 – (Negotiable Instruments (Amendment) Act, 2015) लोकसभा में पारित होने के बावजूद राज्यसभा में पारित नहीं हो सका। सरकार अब अध्यादेश लाकर देश की जनता की मदद करना चाहती है जो इस सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था के कारण परेशान हैं।


10) केन्द्र सरकार ने 3 जून 2015 को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के सम्बन्ध में अप्रवासी भारतीयों (NRIs) की व्याख्या को विस्तृत किए जाने की विज्ञप्ति जारी की। इसमें अप्रवासी भारतीयों की व्याख्या में मुख्यत: क्या विस्तार किया गया है? – अब FDI के परिप्रेक्ष्य में विदेशों में रहने वाले भारतीयों (Overseas Citizens of India – OCIs) तथा भारतीय मूल के व्यक्तियों (Persons of Indian origin – PIOs) को अप्रवासी भारतीयों के तहत रखा जायेगा

विस्तार: उल्लेखनीय है कि अभी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के सम्बन्ध में अप्रवासी भारतीयों (Non-Resident Indians – NRIs), विदेशों में रहने वाले भारतीयों (OCIs) तथा भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) के लिए अलग-अलग नियम लागू होते थे। मई 2015 के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुई केन्द्रीय कैबिनेट की एक बैठक में FDI सम्बन्धी नीतियों में कुछ ढील देने का निर्णय लिया तथा इसी के तहत OCIs और PIOs को NRIs के तहत लाने की बात कही थी। अब औद्यौगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (Department of Industrial Policy and Promotion – DIPP) ने 3 जून 2015 को जारी नए दिशानिर्देशों में कहा है कि अबसे NRIs, OCIs तथा PIOs द्वारा किए गए निवेश को घरेलू निवेश माना जायेगा तथा उन पर FDI सम्बन्धी बंदिशें लागू नहीं की जायेंगी। सरकार के इस निर्णय से विदेशों में रह रहे इन वर्गों से अधिक मात्रा में देश में निवेश होने की संभावना है जिससे आर्थिक रफ्तार में तेजी आ सकती है। इसके अलावा अब विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (Foreign Investments Promotion Board – FIPB) की निस्तारण क्षमता को वर्तमान 2,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 3,000 करोड़ रुपए तक कर दिया गया है। इससे अधिक निवेश वाले FDI प्रस्तावों के निस्तारण की क्षमता आर्थिक मामलों पर गठित केन्द्रीय समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs  – CCEA) के निहित होगी।


 

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