बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 90

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Editorial Team

09 May, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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RBI-2015

1) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों में ऋण सम्बन्धी धांधलियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से 7 मई 2015 से एक नई व्यवस्था लागू की जिससे ऋण सम्बन्धी फर्जीवाड़े (loan frauds) की स्थिति में बैंकों के पहले ही चेतावनी प्राप्त होने लगेगी। इस व्यवस्था के तहत नई परिकल्पना लागू की गई है जो जल्द चेतावनी देने में भूमिका निभायेगी। यह प्रणाली क्या है? – रेड फ्लैग्ड एकाउंट

विस्तार: रेड फ्लैग्ड एकाउंट (Red Flagged Account – RFA) एक ऐसी परिकल्पना है जिसके तहत बैंकों में ऋण सम्बन्धी फर्जीवाड़े को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका निभाई जा सकेगी। RFA परिकल्पना में ऐसी व्यवस्था की गई है जिसके तहत जैसे ही कोई संशयात्मक लेन-देन अथवा फर्जीवाड़ा होगा, बैंक को एक त्वरित चेतावनी संदेश (early warning signals – EWS) मिल जायेग। इससे बैंक सम्बन्धित ऋण खाते की जाँच और लेन-देन पर ससमय निगरानी बैठा सकेगी। इसके तहत ऐसी भी व्यवस्था होगी कि ऋण को रिस्ट्रक्चर करने तथा और धन मुहैया कराने पर स्वत: रोक लग जायेगी।


2) सार्वजनिक क्षेत्र के किस बैंक ने 20 अप्रैल 2015 को राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India – NPCI) के साथ गठजोड़ कर “रूपे प्लैटिनम डेबिट कार्ड” (“Rupay Platinum Debit Card”) लांच किया? – आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank)

विस्तार: “रूपे प्लैटिनम डेबिट कार्ड” भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की उस संकल्पना को पूरी करने में अहम भूमिका दिखा सकता है जिसमें भारत के सभी बैंकिंग व वित्तीय संस्थाओं को एक ऐसी एकल बहुपक्षीय भुगतान प्रणाली से जोड़ा जा सके जो घरेलू हो। इस कार्ड की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें कार्ड भुगतान सम्बन्धी सभी कार्यों की प्रॉसेसिंग भारत में की जायेगी।


3) ICICI बैंक ने 20 अप्रैल 2015 को “टैप-एन-पे” (“Tap-n-Pay”) नामक एक नई भुगतान सेवा शुरू की जिसके माध्यम से बिना नकद या कार्ड से पैमेण्ट किए तमाम काउण्टरों पर भुगतान किया जा सकेगा। अपने तरह की इस पहली सेवा को बैंक ने किस आईटी कम्पनी के सहयोग से शुरू किया है? – टेक महिन्द्रा (Tech Mahindra)

विस्तार: ICICI बैंक की “टैप-एन-पे” भुगतान सेवा नियर-फील्ड कम्यूनिकेशन्स (NFC) तकनीक पर आधारित है। इसमें एनएफसी-आधारित फोन अथवा टैग पर हाथ से मात्र “टैप” करने से भुगतान किया जा सकेगा। इस भुगतान सेवा की एक खासियत यह है कि यह क्लोज़-एण्ड सेवा होगी, जिसमें सिर्फ जान-पहचान वाले ग्रुप के भीतर ही ऐसे भुगतान किए जा सकेंगे और इसका इस्तेमाल क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह से नहीं किया जा सकेगा। इस सेवा के इस्तेमाल के लिए ICICI बैंक में खाता होना भी जरूरी नहीं होगा।


4) विश्व बैंक (World Bank) की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 के दौरान भारत में कितने प्रतिशत बैंक खाते सुप्त (inactive) थे? – 43%

विस्तार: विश्व बैंक ग्लोबल फाइण्डेक्स 2014 (World Bank Global Findex) में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में भारत में कुल व्यस्क बैंक खातों में से 43% ऐसे थे जिनमें साल भर के दौरान न तो पैसा जमा किया गया न ही निकाला गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में लगभग 23 करोड़ लोग ऐसे थे जिन्होंने बैंक खाता होने के बावजूद तमाम बिल जैसे बिजली का बिल व स्कूल की फीस, आदि भरने के लिए नकदी जमा की। इसका अर्थ हुआ कि देश में इतने बैंक खाते होने के बावजूद इनका इस्तेमाल नकद-रहित लेनदेन (Cashless transactions) के लिए उपयुक्त माहौल नहीं है। उल्लेखनीय है कि भारत में वित्तीय समावेशन की नीति के तहत अधिकाधिक लोगों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) शुरू कर अधिकाधिक लोगों के बैंक खाते खोलने का महात्वाकांक्षी काम शुरू किया गया है।


5) वित्त मंत्रालय द्वारा 21 अप्रैल 2015 को जारी अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2015-16 के दौरान भविष्यनिधि (Provident Fund) खातों के लिए तय ब्याज दर क्या है? – 8.7%

विस्तार: सभी केन्द्रीय कर्मचारियो, रेल कर्मचारियों तथा सशस्त्र बलों के कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2015 से लागू ब्याज दर को 8.7% की यथावत दर पर रखा गया है। वर्ष 2014-15 के दौरान भी भविष्यनिधि खातों के लिए ब्याज दर 8.7% थी। यही ब्याज दर लोक भविष्यनिधि खातों के लिए भी लागू है। किसान विकास पत्र (KVP) के लिए भी यही ब्याज दर तय की गई है। लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए लागू बचत योजना में वर्ष 2015-16 के दौरान ब्याज दर को 9.2% से बढ़ाकर 9.3% कर दिया गया है। इसके अलावा पिछले साल चालू की गई सुकन्या समृद्धि योजना, जिसमें 10 वर्ष तक की लड़कियों के लिए विशेष खाते खोलने का प्रावधान है, में भी ब्याज दर को 9.1% से बढ़ाकर 9.2% कर दिया गया है।


6) भारत में आयकर विभाग की सर्वोच्च संस्था – केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes – CBDT) ने 17 अप्रैल 2015 को आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए नए आयकर रिटर्न फॉर्म जारी कर दिए। लेकिन इनमें मांगी गई काफी अधिक जानकारी के चलते आम जनमानस के कड़े प्रतिरोध के चलते सरकार ने 18 अप्रैल 2015 को इन फॉर्मों को फिलहाल लागू न करने का फैसला लिया। इन फॉर्मों में पहले की अपेक्षा क्या प्रमुख बदलाव किए गए थे? – इसमें सभी बैंक खातों का संपूर्ण विवरण, विदेश यात्रा के दौरान किए गए व्यय, विदेशी परिसम्पत्तियों तथा इसके लाभार्थियों की जानकारी और पूँजीगत लाभ का संपूर्ण विवरण भी मांगा गया था

विस्तार: आयकर रिटर्न फार्म में पिछले लगभग पाँच साल में पाँचवी बार परिवर्तन किया गया है। इन नए आयकर फॉर्मों (ITR-1 और ITR-2) में आयकर रिटर्न भरने के लिए तमाम ऐसी जानकारी मांगी गई थी जो पहले नहीं मांगी जाती थी। इस नए फार्म का उपयोग जुलाई 2015 से रिटर्न फाइल करने के लिए किया जायेगा और इससे वर्ष 2015-16 के लिए रिटर्न फाइल किया जायेगा। । इसमें नई जानकारी में मुख्य रूप से विदेश में स्थित परिसम्पत्तियों की जानकारी मांगी गई थी तथा इनके द्वारा अर्जित आर्थिक लाभ का विवरण देने को कहा गया था। इसके अलावा इन विदेशी परिसम्पत्तियों के समस्त लाभार्थियों की जानकारी भी मांगी गई थी। एक और नई मांगी गई जानकारी बैंक खातों के बारे में मांगी गई थी जिसमें रिटर्न दाखिल करने वाले को अपने सभी खातों का विवरण तथा 31 मार्च को उसमें जमा राशि की जानकारी देनी थी। इसके अलावा घरेलू परिसम्पत्तियों के सम्बन्ध में भी अधिक जानकारी मांगी गई थी। इस सम्बन्ध में आयकर विभाग का मानना है कि स्थानीय परिसम्पत्तियों के बारे में अधिक विस्तॄत जानकारी मांगे जाने से बेनामी परिसम्पत्तियों की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। इस नए आयकर फार्म में विदेश में की गईं यात्राओं तथा उसमें किए गए व्यय की विस्तृत जानकारी भी पहली बार मांगी गई थी। यह विदेश यात्रा व्यक्तिगत तौर पर की गईं अथवा किसी कम्पनी द्वारा प्रायोजित की गईं, इसकी जानकारी भी विवरण में देनी थी। हालांकि अधिक नई जानकारी मांगे जाने के चलते तमाम आयकर विशेषज्ञों का मानना है कि आयकर विभाग संभवत: जरूरत से अधिक जानकारी मांग रहा है। जनता के गुस्से को देखते हुए केन्द्र सरकार ने फिलहाल इन नए आयकर फॉर्मों को लागू न करने का निर्णय लिया।


7) केन्द्र सरकार द्वारा 17 अप्रैल 2015 को जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 के दौरान भारत का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) कितना रहा? – 137 अरब डॉलर

विस्तार: वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान भारत का कुल वार्षिक व्यापार घाटा (Annual Trade Deficit) वर्ष 2013-14 के मुकाबले 1.2 अरब डॉलर बढ़कर 137 अरब डॉलर हो गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013-14 के दौरान यह आंकड़ा 135.8 अरब डॉलर था। वर्ष 2014-15 के दौरान भारत के कुल वस्तु निर्यात पिछले साल के मुकाबले 1.2% घट कर 310.5 अरब डॉलर रह गया तथा कुल आयात 0.6% घटकर 447.6 अरब डॉलर रह गया। वहीं मार्च 2015 के दौरान देश का व्यापार घाटा पिछले 4 माह का सर्वाधिक 11.79 अरब डॉलर था। आयात में कमी का मुख्य कारण कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय मूल्य में आई भारी कमी है जो जून 2014 के स्तर से लगभग आधे हो गए हैं। लेकिन निर्यात में कमी देश के लिए चिंता का विषय है तथा यह नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार के लिए विशेष रूप से परेशानी का सबब बन रहा है।


8) एक महत्वपूर्ण पहल के तहत केन्द्र सरकार ने देश में व्यवसाय करने में सहूलियत प्रदान करने के उद्देश्य से 1 मई 2015 से व्यवसाय स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान कर दिया। इसके तहत कम्पनी स्थापित करने के लिए आठ फॉर्म भरने की व्यवस्था के बजाय एक फॉर्म भरने की नई व्यवस्था लागू की गई। यह नया फॉर्म कौन सा है? – आईएनसी-29 (INC-29)

विस्तार: उल्लेखनीय है कि नरेन्द्र मोदी के नेतॄत्व वाली केन्द्र सरकार देश में व्यवसाय करने की स्थितियों को बेहतर बनाने तथा इससे सम्बन्धित तमाम प्रक्रियाओं को आसान करने के बारे में अपनी प्रतिबद्धता कई बार जता चुकी है। 1 मई 2015 से फॉर्म INC-29 को शुरू कर सरकार का मंतव्य सिर्फ एक दिन में कम्पनी के गठन किए जाने की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस दिन से कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने यह नया फॉर्म जारी कर दिया। इसके तहत सिर्फ इस एक फॉर्म में कम्पनी को खोले जाने से सम्बन्धित सभी प्रक्रियाओं को एकीकृत कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि अभी तक ऐसा करने के लिए आठ तरह के अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे जिससे उद्यमियों को खासी परेशानी पेश आती थी।


9) सेबी (SEBI) द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2015 के दौरान भारतीय म्यूचुअल फण्ड (Mutual Fund) बाजार के इक्विटी (equity) वर्ग में 7,618 करोड़ रुपए का निवेश फण्ड मैनेजरों द्वारा किया गया। यह पिछले सात साल से अधिक समयावधि में किसी एक माह में इस वर्ग में किया गया सर्वाधिक निवेश है। इससे बेहतर मासिक निवेश किस माह के दौरान हुआ था? – जनवरी 2008

विस्तार: अप्रैल 2015 के दौरान भारतीय म्यूचुअल फण्ड बाजार के इक्विटी वर्ग में 7,618 करोड़ रुपए का निवेश जनवरी 2008 के बाद का इस वर्ग का सर्वोच्च मासिक निवेश है। जनवरी 2008 में इस वर्ग में 7703 करोड़ का निवेश किया गया था। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2014 के दौरान इस वर्ग में मात्र 2,698 करोड़ रुपए का निवेश किया गया था। इक्विटी वर्ग के अलावा डेब्ट वर्ग (debt segment) में फण्ड मैनेजरों द्वारा कुल 28,650 करोड़ रुपए का निवेश अप्रैल 2015 के दौरान किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार शेयर बाजार में निवेश वृद्धि होने का मुख्य कारण निवेशकों के मन में अर्थव्यवस्था के मजबूत होने की धारणा, सरकार के आर्थिक सुधारवादी दृष्टिकोण तथा घरेलू अर्थव्यवस्था में मूलभूत तत्वों में स्थिरता आना है। यहाँ यह बताना भी जरूरी है कि वर्ष 2014-15 के दौरान 40,000 करोड़ रुपए का निवेश इक्विटी बाजार में किया गया है।


10) भारत के एक प्रसिद्ध निवेशक (investor) तथा म्यूचुअल फण्ड व्यवसायी की मई 2015 के दौरान अमेरिका में कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई। ये दुर्घटना तब हुई जब वे विश्व प्रसिद्ध निवेशक वॉरेन बफेट (Warren Buffett) की कम्पनी बर्कशायर कैथवे (Berkshire Hathaway) की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए जा रहे थे। इस भारतीय निवेशक का क्या नाम है? – पराग पारिख

विस्तार: पराग पारिख (Parag Parikh) एक दिग्गज निवेशक के अलावा पराग पारिख फाइनेंशियल एडवाइज़री सर्विसेज (PPFAS) नामक एक म्यूचुअल फण्ड कम्पनी के संस्थापक हैं। उनकी मृत्यु उस समय हुई जब उनकी कार की नेब्रास्का प्रांत के ओमाहा (Omaha) में एक ट्रक से भिडंत हो गई।


 

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