बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 83

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Editorial Team

23 Feb, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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FDI-Insurance-2015

1) केन्द्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 49% तक बढ़ाने के लिए सम्बन्धित विधेयक की अधिसूचना  20 फरवरी 2015 को जारी कर दी। इस विधेयक, जिसे संसद के आगामी बजट सत्र में संसद में पेश किया जायेगा, का नाम क्या है? – भारतीय बीमा कम्पनी (विदेशी निवेश) नियम 2015

विस्तार: उल्लेखनीय है कि भारतीय बीमा कम्पनी (विदेशी निवेश) नियम 2015 (Indian Insurance Companies (Foreign Investment) Rules 2015) के तहत प्रस्तावित है कि ऑटोमैटिक रूट से जहाँ विदेशी कम्पनियाँ भारत के बीमा क्षेत्र में 26% तक का अधिकतम निवेश कर सकेंगी वहीं विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (FIPB) की अनुमति से इस सीमा को 49% तक बढ़ाया जा सकेगा। यह नियम विदेशी बीमा कम्पनियों के अलावा बीमा दलालों, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर्स, सर्वेयर्स और क्षति का आकलन करने वाले एसेसर्स (assessors) तथा IRDA Act 1999 के तहत नियुक्त किसी भी बीमा मध्यस्थ (intermediaries) पर भी लागू होगा।  यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि इस विधेयक के द्वारा सरकार बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को बढ़ाने वाले बीमा कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2014 (Insurance Laws (Amendment) Ordinance, 2014) को निरस्त करना चाहती है जिसे राष्ट्रपति ने दिसम्बर 2014 के दौरान जारी किया था।


2) अपने ग्राहकों को तकनीक और प्रौद्यौगिकी की मदद से सशक्त बनाने के उद्देश्य से देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने कुछ समय पहले एक अनूठा प्रयास शुरू किया था जिसके तहत बैंक के कुछ विशेष केन्द्रों में ग्राहकों को बैंकिंग क्षेत्र से सम्बन्धित नई तकनीकों की जानकारी प्रदान की जायेगी। इन विशेष केन्द्रों को क्या नाम दिया गया है? – टेक लर्निंग सेंटर्स (Tech Learning Centres – TLCs)

विस्तार: भारतीय स्टेट बैंक ने प्रशिक्षण सम्बन्धी अपनी इस मुहिम को दिसम्बर 2014 से शुरू किया था। इसके तहत देश भर में फैले बैंक के 385 टेक लर्निंग सेंटर्स में बैंक प्रति माह लगभग 10 हजार लोगों को बैंकिंग क्षेत्र में प्रयुक्त नई प्रौद्यौगिकी की जानकारी प्रदान कर रहा है। उल्लेखनीय है कि इन नई तकनीकों को इस्तेमाल करने को लेकर तमाम ग्राहकों में आशंकाएं व्याप्त रहती हैं। SBI का मुख्य उद्देश्य ऐसी ही तमाम आशंकाओं को समाप्त कर अपने ग्राहकों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना है। SBI द्वारा फरवरी 2015 के दौरान जारी आंकड़ों के अनुसार बैंक अब तक अपने TLCs के माध्यम से तीस हजार से अधिक ग्राहकों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान कर चुका है। इसके तहत मुख्यत: ग्राहकों में बैंकिंग जागरुकता को बढ़ाने की कोशिश की जाती है तथा तमाम नई प्रौद्यौगिकियों जैसे कैश डिपॉज़िट मशीन, मोबाइल बैंकिंग एप्स, नेट बैंकिंग व ग्रीन रेमिट कार्ड का प्रयोग करने के बारे में व्यावहारिक तरीके से जानकारी प्रदान की जा रही है।


3) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 18 फरवरी 2015 को बैंकों को स्वर्ण के बदले ऋण प्रदान करने की अनुमति एक बार फिर प्रदान कर दी। इस व्यवस्था पर कब प्रतिबंध लगा दिया गया था? – जून 2013 में

विस्तार: उल्लेखनीय है कि इस प्रतिबन्ध को हटाने के अलावा RBI ने बैंकों को “कन्साइन्मेण्ट आधार” पर स्वर्ण आयात करने की अनुमति भी प्रदान कर दी जिसमें बैंक एक मध्यस्थ (intermediary) के तौर पर आयातित स्वर्ण के लिए तभी भुगतान करेगा जब इसके लिए वह खरीददार खोज लेगा, जिसमें बहुत अधिक समय नहीं लगता है। वहीं स्वर्ण व्यापार करने वाले ट्रेडिंग हाउसेज़ को बिना किसी शर्त के स्वर्ण आयात की अनुमति प्रदान कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ माह से देश में स्वर्ण आयात की मात्रा में कमी आई है, बावजूद इसके कि नवम्बर 2014 में 80-20 योजना के नाम से प्रसिद्ध उस योजना को RBI ने समाप्त कर दिया था जिसमें आयातित स्वर्ण में से पाँचवे हिस्से का निर्यात करना अनिवार्य बना दिया गया था। स्वर्ण आयात में कमी आने का एक मुख्य कारण यह है कि इस सम्बन्ध में RBI की नीति बहुत स्पष्ट नहीं होने के कारण आयातकों में आशंकाएं व्याप्त थीं।


4) 19 फरवरी 2015 को सम्पन्न हुई “हलवा रस्म” केन्द्र सरकार की किस बहुप्रतीक्षित घोषणा से सम्बन्धित है? – केन्द्रीय बजट

विस्तार: “हलवा रस्म” के आयोजन के साथ बजट प्रपत्रों की छपाई के काम की शुरूआत होती है। यह वित्त मंत्रालय की एक पुरानी रस्म है जिसके अंतर्गत एक बड़ी कढ़ाई में हलवा बनाकर मंत्रालय के कर्मचारियों में वितरित किया जाता है। इस हलवे के वितरण का महत्व यह है कि वित्त मंत्रालय के वे अधिकारी व कर्मचारी जिनकी बजट बनाने व इसकी छपाई में प्रत्यक्ष भूमिका होती है इस हलवा वितरण की रस्म के बाद अपने परिवारों से तब तक दूर रहते हैं जब तक वित्त मंत्री संसद में बजट प्रस्तुत नहीं कर देते। बजट के प्रस्तावित प्रावधानों को गुप्त रखने के लिए ऐसा किया जाता है तथा इस परंपरा के अंतर्गत मंत्रालय के कर्मचारियों को अपने परिवारीजनों से बात करने तथा मैसेज करने तक की मनाही रहती है। वित्त मंत्रालय के अत्यंत वरिष्ठ अधिकारियों को इस प्रतिबन्ध से छूट मिल पाती है। वर्ष 2015-16 के केन्द्रीय बजट के संदर्भ में हुई इस “हलवा रस्म” का आयोजन नॉर्थ ब्लॉक में हुआ जिसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली भी शामिल हुए।


5) भारत में खुदरा भुगतानों की प्रणाली के संचालन के लिए गठित नेशनल पेमेण्ट्स कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया (NPCI) ने 18 फरवरी 2015 को भुगतान करने के लिए एक एकीकृत एकल भुगतान इंटरफेस को लाँच किया जिसके द्वारा सभी भुगतान माध्यमों के लिए इस एकीकृत इंटरफेस को लागू किया जा सकेगा। इसको क्या नाम दिया गया है? – यूनीफाइड पेमेण्ट इंटरफेस (UPI)

विस्तार: NPCI का मानना है कि यूनीफाइड पेमेण्ट इंटरफेस (UPI) से भुगतान करना और पैसा प्राप्त करना इतना आसान हो जायेगा जैसे फोन कॉल करना। इस सुविधा के तहत किसी भी खाताधारक को अपने मोबाइल फोन के माध्यम से पैसे भेजने और प्राप्त करने के लिए सिर्फ एक आइडेण्टिफायर (identifier) की आवश्यकता पड़ेगी। यह आइडेण्टिफायर कुछ भी हो सकता है – आधार संख्या, मोबाइल नम्बर अथवा कोई वर्च्युअल एड्रेस। इसके तहत बैंक खाते से सम्बन्धित अन्य किसी जानकारी का उल्लेख करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। UPI से दूसरी वेबसाइट्स अथवा एप्लीकेशन्स पर अपने खाते सम्बन्धी सूचना को प्रकट किए बिना धन भेजने और प्राप्त करने की सुविधा मिल सकेगी।


6) देश के किस निजी क्षेत्र के बैंक ने 16 फरवरी 2015 को घोषणा की कि नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के क्षेत्र के वित्त पोषण के लिए वह 500 करोड़ मूल्य के ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर बाण्ड जल्द जारी करेगा तथा ऐसा करने वाला देश का पहला बैंक बनेगा? – यस बैंक (Yes Bank)

विस्तार: यस बैंक ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर बाण्ड (Green Infrastructure Bond) को जारी कर प्राप्त धन का प्रयोग सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास तथा छोटी जलविद्युत परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए करेगा। 500 करोड़ मूल्य के इन बाण्डों की समयावधि 10 वर्ष की होगी। यस बैंक ने यह घोषणा करते यह सूचना भी दी कि वर्ष 2014 के दौरान पूरे विश्व भर में ऐसे ग्रीन बाण्ड्स को जारी कर लगभग 35 अरब डॉलर धन एकत्र किया गया जबकि भारत में ग्रीन बाण्ड के मामले में बहुत छोटी सी शुरूआत मात्र हो पाई है। उल्लेखनीय है कि यस बैंक वर्तमान में देश का चौथा सबसे बड़ा निजी बैंक है।


7) भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के क्षेत्र में कितना धन उपलब्ध कराने की बात 15 फरवरी 2015 को री-इन्वेस्ट इण्डिया 2015 सम्मेलन में कही? – 75,000 करोड़ रुपए

विस्तार: भारतीय स्टेट बैंक द्वारा की गई घोषणा के अनुसार वह अगले 5 वर्षों के लिए देश के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए 75,000 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने को तैयार है। इस धन से 15,000 मेगावॉट नवीकरणीय उर्जा उत्पादित होने का उसका अनुमान है। उल्लेखनीय है कि SBI ने देश के ऊर्जा क्षेत्र को 1.78 लाख करोड़ के ऋण प्रदान कर रखे हैं और इसमें परंपरागत ऊर्जा उत्पादकों तथा विद्युत वितरण कम्पनियों को दिया गया धन शामिल है। इसमें से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को दिया गया ऋण लगभग 7,500 करोड़ रुपए है।


8) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 13 फरवरी 2015 को घोषणा की कि एक रुपए के करेंसी नोटों का प्रचलन जल्द ही शुरू किया जायेगा। एक रुपए के नोटों का मुद्रण सरकार ने बढ़ती कीमतों के मद्देनजर कब बंद कर दिया था? – नवम्बर 1994

विस्तार: RBI द्वारा की गई घोषणा के अनुसार सिक्का कानून 2011 (Coinage Act, 2011) के अंतर्गत एक रुपए के नए नोटों का मुद्रण किया जायेगा। लेकिन प्रचलन में चल रहे एक रुपए के पुराने नोट भी वैधानिक मुद्रा बने रहेंगे। उल्लेखनीय है कि RBI कम मूल्य के करेंसी नोटों को धीरे-धीरे प्रचलन से बाहर कर रहा है क्योंकि इनकी मुद्रण लागत अधिक पड़ रही है। इसलिए एक रुपए के करेंसी नोट को पुन: जारी करने का निर्णय मुख्यत: एक सांकेतिक निर्णय माना जा रहा है क्योंकि इसके बावजूद एक रुपए के सिक्के ही अधिक प्रचलन में रहेंगे। एक रुपए को जहाँ भारत सरकार के लिए RBI द्वारा जारी किया जाता है वहीं अन्य सभी अन्य नोटों को RBI द्वारा स्वयं जारी किया जाता है।


9) फरवरी 2015 के दौरान कम्पनी मामलों के मंत्रालय ने बैंकिंग, बीमा एवं गृह-वित्त व्यवसाय में लिप्त कम्पनियों पर लगे उस प्रतिबन्ध को हटा लिया जिसके तहत वे शेयर तथा अन्य प्रतिभूतियों को नहीं खरीद सकती थीं। इन कम्पनियों पर पहले यह बंदिश लागू नहीं थी। किस कानून को लागू किए जाने से यह बंदिश लागू की गई थी? – नया कम्पनी कानून (कम्पनी अधिनियम 2013)

विस्तार: उल्लेखनीय है कि कम्पनी अधिनियम 2013 को लागू किए जाने के चलते बैंकिंग, बीमा एवं गृह-वित्त व्यवसाय में लिप्त कम्पनियों द्वारा शेयर तथा अन्य प्रतिभूतियों को हासिल करने पर बंदिश लगा दी गई थी। इससे पहले पुराने कम्पनी कानून (कम्पनी अधिनियम 1956) में इन कम्पनियों को यह अधिकार मिला हुआ था जिसके तहत उन्हें ऐसा करने के लिए अपने शेयरधारकों की अनुमति प्राप्त करनी होती थी तथा कुछ अन्य नियमों का पालन करना पड़ता था। अब कम्पनी मामलों के मंत्रालय ने इन कम्पनियों को एक बार फिर यह अनुमति प्रदान कर दी है। इसे भारत में व्यवसाय करने की स्थितियों को अधिक अनुकूल बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। हालांकि यह राहत सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकांश बैंकों को हासिल नहीं हो पायेगी क्योंकि इनका संचालन एक अन्य कानून के तहत किया जाता है तथा कम्पनी कानून के प्रावधान इन पर लागू नहीं होते हैं। वर्तमान में IDBI बैंक और भारतीय महिला बैंक (BMB) ही वे दो बैंक हैं जिनका परिचालन नए कम्पनी कानून के प्रावधानों के तहत किया जा रहा है।


10) यूरो जोन (Euro zone) के वित्त मंत्रियों ने यूनान (Greece) की सरकार को दिए गए ऋण की मियाद को कितने समय के लिए बढ़ाने की घोषणा 20 फरवरी 2015 को की जिससे आगामी मार्च से उस पर मंडरा रहा नकदी संकट का खतरा फिलहाल टल गया है? – 4 माह

विस्तार: यूरो जोन के वित्त मंत्रियों और यूनान की नई सरकार के बीच यह समझौता 20 फरवरी 2015 को ब्रुसेल्स (Brussels) में हुई बैठक में हुआ। इस समझौते से यूनान की सरकार को दीर्घावधि ऋण के लिए ऋणदाताओं से बातचीत करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि यूनान में जनवरी 2015 के दौरान वामपंथी नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के बाद यूरो जोन और यूनान के बीच तनातनी बढ़ गई थी क्योंकि देश की नई सरकार 2010 में यूरो जोन द्वारा प्रदान किए गए सहायता पैकेज (Bail-out package) के एवज में थोपीं गईं शर्तों को पलटने की बात कह रही थी।


 


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