बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 81

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08 Feb, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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Monetary-Policy-2015

1) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 3 फरवरी 2015 को अपनी छठवीं द्वि-मासिक आर्थिक समीक्षा (6th Bi-monthly Monetary Review) जारी की। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रेपो दर (Repo Rate) को 7.75% पर यथावत रखा गया है। वह कौन सी प्रमुख दर है जिसमें परिवर्तन किया गया है? – वैधानिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio – SLR)

विस्तार: RBI ने अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) को वर्तमान 22% से 50 बेसिस अंक घटाकर 21.5% कर दिया। यह नई दर 7 फरवरी 2015 से प्रभाव में आई है। इस दर को कम करने से अर्थव्यवस्था में मौद्रिक आपूर्ति में वृद्धि होने की संभावना है जिससे अर्थव्यवस्था को संबल मिलेगा।

RBI की छठवीं द्वि-मासिक आर्थिक समीक्षा के प्रमुख बिन्दु

रेपो दर 7.75% पर यथावत

रेपो दर के यथावत रहने से रिवर्स रेपो दर (reverse repo rate) भी 6.75% पर यथावत

मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSL) 8.75% पर यथावत

नकद रिज़र्व अनुपात (Cash Reserve Ratio – CRR) 4% पर यथावत

वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) 50 बेसिस अंक घट कर 21.5% हुआ

जनवरी 2016 तक मुद्रास्फीति को 6% के स्तर पर कायम करने का लक्ष्य

मौजूदा वर्ष 2014-15 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 5.5% रहने का अनुमान (पुराने आधार वर्ष के अनुसार)

वर्ष 2015-16 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान (पुराने आधार वर्ष के अनुसार)

विदेशों में भारतीयों द्वारा विदेशी मुद्रा के भुगतान की सीमा को बढ़ाकर 2,50,000 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष किया गया


2) 3 फरवरी 2015 को घोषित छठवीं द्वि-मासिक आर्थिक समीक्षा में RBI ने विदेशों में भारतीयों द्वारा विदेशी मुद्रा के भुगतान की सीमा को बढ़ाकर 2,50,000 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष करने की घोषणा कर दी। वर्तमान में यह सीमा कितनी थी? – 1,25,000 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष

विस्तार: उल्लेखनीय है कि RBI ने उदार भुगतान योजना (Liberalised Remittance Scheme – LRS) के तहत भारतीय नागरिकों द्वारा विदेशों में विदेशी मुद्रा व्यय की अधिकतम सीमा वर्ष 2013 में घटा कर 75,000 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष कर दी थी। उस समय ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि भारतीय रुपए पर भारी दबाव बना हुआ था। बाद में विदेशी मुद्रा बाजार में रुपए की स्थिति बेहतर होने के चलते इसे जून 2014 में बढ़ा कर 1,25,000 डॉलर कर दिया गया है। इन भुगतानों में लॉटरियों, मार्जिन ट्रेडिंग तथा ऐसे अन्य भुगतानों को शामिल नहीं किया जा सकता है।


3) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा प्रस्तावित भुगतान बैंकों (पेमेण्ट्स बैंक – Payments Banks) के लिए आवेदन करने की समयसीमा 2 फरवरी 2015 को समाप्त हो गई। इस वर्ग के बैंकों के लिए आवेदन करने वाली प्रमुख कम्पनियाँ/समूह कौन से हैं? – रिलायंस इण्डस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL), आदित्य बिड़ला नूवो लिमिटेड, फ्यूचर ग्रुप, UAE एक्सचेंज इण्डिया, भारती एयरटेल, वोडाफोन, IIFL, PayTM और ऑक्सीज़न (Oxigen)

विस्तार: उल्लेखनीय है कि भारत में इन पेमेण्ट्स बैंक की अवधारणा को ऐसे करोड़ों लोगों को मूलभूत बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है जो बैंकों की पहुँच से बाहर हैं। इस बैंकों को औपचारिक बैंकों की अपेक्षाकृत कम पहुँच के कारण इन बैंकों को स्थापित करने की घोषणा वर्ष 2014-15 के आम बजट में की गई थी। यह बैंक न सिर्फ नकद जमा कर सकेंगे बल्कि इसे विभिन्न तरीकों से भुगतान करने का काम भी करेंगे। इसका लाभ मुख्य रूप से कम आय वर्ग के लोगों को मिलेगा। हालांकि पेमेण्ट्स बैंक ऋण प्रदान नहीं कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि पेमेण्ट्स बैंक से पहले प्री-पेड पेमेण्ट पद्धतियों (Pre-paid Payment Instrument – PPI) को भी भारत में शुरू किया जा चुका है लेकिन इनके द्वारा सिर्फ भुगतान करने का काम किया जा सकता है। भारत में आज भी 10 में से नौ सौदे परंपरागत तरीके से नकदी के द्वारा किए जाते हैं और पेमेण्ट्स बैंक यहाँ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल सबसे अहम भूमिका निभा सकता है।


4) पेमेण्ट्स बैंक (payments bank) के लाइसेंस के लिए रिलायंस इण्डस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) ने आवेदन किया है। उसने इसके लिए किस प्रमुख बैंक को अपना पार्टनर बनाया है? – भारतीय स्टेट बैंक (SBI)

विस्तार: रिलायंस इण्डस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) ने भारतीय स्टेट बैंक के साथ हाथ मिला कर पेमेण्ट्स बैंक के लिए आवेदन किया है। इसमें रिलायंस जहाँ प्रमोटर की भूमिका निभायेगा वहीं SBI 30% का हिस्सेदार होगा। यह साझेदारी पेमेण्ट्स बैंक के लिए जारी SBI के दिशानिर्देशों के अनुसार हैं। रिलायंस SBI के देश भर में फैले विस्तृत नेटवर्क का इस्तेमाल अपने प्रस्तावित पेमेण्ट्स बैंक व्यवसाय के लिए करना चाहती है।


5) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शहरी कोऑपरेटिव बैकों (Urban Cooperative Banks – UCBs) के व्यवसाय, आकार, व्यावसायिक मॉडल तथा सम्बन्धित लाइसेंसिंग शर्तों की समीक्षा के लिए सात-सदस्यीय समिति का गठन 30 जनवरी 2015 को किया। इस समिति का अध्यक्ष किसे बनाया गया है? – आर. गाँधी, भारतीय रिज़र्व बैंक के उप-गवर्नर

विस्तार: यह समिति शहरी कोऑपरेटिव बैकों से सम्बन्धित तमाम विषयों पर विस्तृत समीक्षा करेगी जैसे – क्या मालेगाम समिति (Y.H. Malegam Committee) की सिफारिश के आधार पर नए शहरी कोऑपरेटिव बैकों की स्थापना की अनुमति देने का यह सही समय है, ऐसे बैंकों का प्रबन्धन तथा प्रशासनिक ढांचा व वोटिंग अधिकार किस प्रकार के हों, इत्यादि।


6) केन्द्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान कोल इण्डिया लिमिटेड (CIL) में अपनी 10% हिस्सेदारी को 30 जनवरी 2015 को विनिवेशित (disinvest) कर दिया। हिस्सेदारी की इस बिक्री से सरकार को लगभग 22,600 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। यह भारत में किसी भी सरकारी अथवा निजी कम्पनी द्वारा की गई सबसे बड़ी शेयर बिक्री थी। इससे पहले की सबसे बड़ी शेयर बिक्री भी कोल इण्डिया लिमिटेड के नाम थी जब उसने लगभग 15,000 करोड़ रुपए की शेयर हिस्सेदारी बेची थी। वह बिक्री किस वर्ष की गई थी? – वर्ष 2010 में

विस्तार: केन्द्र सरकार ने 30 जनवरी को कोल इण्डिया में अपनी हिस्सेदारी के 31.58 करोड़ शेयर, यानि 5% हिस्सेदारी को बेचा तथा और अतिरिक्त 5% और शेयर बेचने का विकल्प रखा था। इस कुल 10% हिस्सेदारी को 358 रुपए प्रति शेयर के भाव पर बेचने पर सरकार के खजाने में लगभग 22,600 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई। इससे केन्द्र सरकार के विनिवेश लक्ष्य के लगभग आधे भाग की पूर्ति भी हो गई। इससे पहले सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात उत्पादन कम्पनी सेल (SAIL) में अपनी हिस्सेदारी बेच कर 1,715 करोड़ रुपए हासिल किए थे। इस प्रकार सरकार ने एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक विनिवेश का कीर्तिमान भी कायम कर दिया। इससे पहले एक वित्तीय वर्ष में सर्वाधिक विनिवेश वर्ष 2012-13 में किया गया था तथा सरकार को इससे कुल 23,956 करोड़ रुपए की प्राप्ति हुई थी।


7) भारत ने 30 जनवरी 2015 को वित्तीय वर्ष 2013-14 के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर को इसके पुराने आंकड़े 4.7% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया। वहीं वर्ष 2012-13 की इसी दर में भी वृद्धि की गई है और इसे 4.5% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। विकास दर में इसी वृद्धि किए जाने का कारण क्या है? – सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था की गतिविधियों के मापन के लिए नई पद्धति का अनुप्रयोग तथा नये आधार वर्ष का प्रयोग

विस्तार: उल्लेखनीय है कि अर्थव्यवस्था की गतिविधियों के मापन के लिए नई पद्धति के अनुप्रयोग से तमाम नए अव्ययवों की गणना आर्थिक गतिविधियों में किया जायेगा तथा कई अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों को इसमें शामिल किया जायेगा। इसके अलावा स्मार्ट फोन तथा LED टीवी जैसी वस्तुओं को गणना का हिस्सा बनाया गया है। नई पद्धति के प्रयोग से सरकार को राजकोषीय घाटे को कम करने की अपनी मुहिम में मदद मिलेगी। इसके तहत आधार वर्ष में भी परिवर्तन किया गया है तथा 2004-05 के बजाय अब वर्ष 2011-12 को आधार वर्ष के रूप में लिया गया है। वैश्विक बदलावों को प्रभाव में लाने के लिए प्राय: आधार वर्ष में हर पाँचवें वर्ष में परिवर्तन कर दिया जाता है।


8) प्रसिद्ध रेटिंग एजेंसी इण्डिया रेटिंग्स (India Ratings) द्वारा 28 जनवरी 2015 को की गई घोषणा के अनुसार देश के राष्ट्रीय लेखांकन के लिए आधार वर्ष (Base Year) में किए गए बदलाव से मौजूदा वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 117 खरब रुपए तक हो जाने की संभावना है। सरकार ने अर्थव्यवस्था की सही स्थिति बयाँ करने के उद्देश्य से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की एक नई श्रॄंखला को भी नए आधार वर्ष पर तैयार करने की घोषणा की है। यह नया आधार वर्ष क्या है? – 2011-12

विस्तार: उल्लेखनीय है कि अभी तक आर्थिक गतिविधियों के मूल्यांकन के लिए वर्ष 2004-05 को आधार वर्ष के तौर पर प्रयुक्त किया जा रहा था। लेकिन अर्थव्यवस्था के ढांचे में होने वाले परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015 से राष्ट्रीय आय तथा तत्सम्बन्धित तथ्यों के लिए अब वर्ष 2011-12 को आधार वर्ष के तौर पर चयनित किया गया है। इसलिए जनवरी 2015 से नए आधार वर्ष के आधार पर गणना करने का काम शुरू कर दिया गया है तथा इसके आधार पर नई श्रॄंखला को फरवरी 2015 से जारी किया जायेगा। इसी के सम्बन्ध में इण्डिया रेटिंग्स ने अनुमान लगाया है कि आधार वर्ष में हुए इस परिवर्तन के चलते वर्ष 2014-15 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 6% बढ़कर 111.7 अरब रुपए (लगभग 1.8 खरब डॉलर) हो जायेगा।


9) MMP Mobi Wallet Payment Systems Limited (MMPL), जोकि टाटा सर्विसेज़ की एक सहयोगी कम्पनी है ने 28 जनवरी 2015 को एक नया वीज़ा-आधारित प्रीपेड पे स्मार्ट कार्ड (PAY Smart Card) बाजार में उतारा। इसकी मदद से उपयोगकर्ताओं को तमाम प्रकार के भुगतान करने के लिए नकद के इस्तेमाल के परंपरागत तरीके के बजाय कार्ड से भुगतान करने का आसान, सुरक्षित और पारदर्शी तरीका उपलब्ध हो सकेगा। ने इस कार्ड को किस निजी बैंक के साथ साझेदारी में निकाला है? – RBL बैंक (रत्नाकर बैंक लिमिटेड)

विस्तार: पेस्मार्ट कार्ड के माध्यम से एमरूपि (mRUPEE) सेवा के उपभोक्ता वीज़ा (Visa) डेबिट/क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने वाले सभी मर्चेन्ट्स को भुगतान कर सकेंगे और वीज़ा वाले ATM से पैसे निकाल सकेंगे। इस पेस्मार्ट में न्यूनतम 200 रुपए तथा अधिकतम 1 लाख रुपए तक टॉपिंग की जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि mRUPEE की मोबाइल मनी ऑर्डर व वॉलेट गेटवे सेवा (Wallet Gateway Service) है। वहीं RBL बैंक (जिसका पुराना नाम रत्नाकर बैंक लिमिटेड है देश का सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला निजी क्षेत्र का बैंक है। इसकी देश के 13 राज्यों में 130 शाखाएं और 350 एटीएम मौजूद हैं।


10) निजी क्षेत्र के इण्डस-इण्ड बैंक (IndusInd Bank) ने 29 जनवरी 2015 को किस इंग्लिश प्रीमियर लीग (EPL) क्लब से गठजोड़ कर एक विशेष को-ब्राण्डेड कार्ड जारी किया है जो फुटबॉल के शौकीन लोगों को तमाम सहूलियतें प्रदान करने की भूमिका निभायेगा? – चेल्सी फुटबॉल क्लब (Chelsea Football Club)

विस्तार: इंग्लैण्ड के इस मशहूर चेल्सी फुटबॉल क्लब के साथ जारी किए गए इस को-ब्राण्डेड कार्ड का प्रयोग होटल में भोजन करने, मनोरंजन, व्यक्तिगत ग्रूमिंग, यात्रा तथा तमाम अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके तहत चेल्सी फुटबॉल क्लब के उत्पादों को खरीदनें के लिए क्लब की ऑनलाइन मेगास्टोर से खरीददारी में तमाम सहूलियतें प्रदान की गई हैं।


 


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