बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 77

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06 Jan, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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PSU-Bank-CMDs

1) केन्द्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार लाने के उद्देश्य से 31 दिसम्बर 2014 को कौन सी अहम घोषणा की? – सार्वजनिक बैंकों के अध्यक्ष सह प्रबन्ध निदेशक (CMD) के पद को दो भागों में बाँट दिया गया है

विस्तार: सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों के पद सम्बन्धी परंपरा में एक अहम बदलाव करते हुए केन्द्र सरकार ने घोषणा की कि अब से अध्यक्ष और प्रबन्ध निदेशक का पद एक न होकर दो अलग-अलग पद होंगे। उक्त की गई घोषणा के तहत सार्वजनिक बैंकों में एक पद अध्यक्ष (Chairman) का होगा जबकि एक अन्य पद प्रबन्ध निदेशक (MD) व मुख्य कार्यकारी (CEO) का होगा। उल्लेखनीय है कि अभी तक SBI को छोड़कर अन्य सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रमुख का पद अध्यक्ष सह प्रबन्ध निदेशक का था। वहीं SBI में प्रमुख का पद अध्यक्ष (या अध्यक्षा) का होता है जबकि 4 अन्य प्रबन्ध निदेशक अलग से होते हैं। वहीं देश के निजी बैंकों में अध्यक्ष व प्रबन्ध निदेशक के दो अलग-अलग पद होते हैं।


2) भारत सरकार ने एक रुपए के नोट का पुन: मुद्रण शुरू करने के लिए “एक रुपया करेंसी नोट मुद्रण कानून, 2015” (“Printing of One Rupee Currency Notes Rules, 2015” की अधिसूचना जारी कर दी जो 1 जनवरी 2015 से प्रभावी हो जायेगी। इसका अर्थ हुआ कि अधिक मुद्रण लागत के चलते बंद कर दी गई एक रुपए की छपाई एक बार फिर शुरू हो जायेगी। एक रुपए के नोट का मुद्रण कब बंद किया गया था? – नवम्बर 1994 में

विस्तार: उल्लेखनीय है कि एक रूपए के नोट का मुद्रण नवम्बर 1994 में बंद किया गया था जबकि 2 रुपए का नोट फरवरी 1995 में और 5 रुपए का का मुद्रण नवम्बर 1995 में बंद किया गया था। तब से इन मूल्य के सिक्के ही ढाले जा रहे हैं। हालांकि ये पुराने नोट प्रचलन में हैं और वैध मुद्रा हैं। 1 रुपए के नए नोट के कलेवर में भी बदलाव किया जायेगा और इसमें गुलाबी और हरे रंग की अधिकता रहेगी। इसमें सबसे ऊपर भारत सरकार लिखा हुआ होगा क्योंकि 1 रुपए के नोट को भारत सरकार जारी करती है जबकि अन्य सभी नोटों को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया जाता है इसलिए 1 रुपए के नोट पर जहाँ वित्त सचिव (Finance Secretary) भारत सरकार के हस्ताक्षर होते हैं वहीं अन्य सभी नोटों पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।


3) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 23 दिसम्बर 2014 को वर्ष 2005 के पूर्व के नोटों को बदलने की समयसीमा को बढ़ाने की घोषणा कर दी। 500 व 1000 रुपए के नोट समेत वर्ष 2005 से पूर्व मुद्रित नोटों को अब किस तारीख तक बदला जा सकेगा? – 30 जून 2015

विस्तार: उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व RBI ने वर्ष 2005 से पूर्व के नोटों को बदलने की समयसीमा मार्च 2014 में 1 जनवरी 2015 तय की थी। इसके चलते ऐसे नोटों को बदलने की होड़ लगी हुई थी। अब RBI ने इस समयसीमा को 6 और माह के लिए बढ़ा दिया है। अपने निर्देश में RBI ने यह भी कहा कि ऐसे नोट वैध हैं और प्रचलन में भी रहेंगे। इसके साथ ही उसने लोगों से अपील की ऐसे नोटों को RBI अथवा वाणिज्यिक बैंकों में वापस करे। 2005 से पूर्व के नोटों को वापस लेने का यह अभियान इसलिए चलाया जा रहा है क्योंकि इन नोटों में सुरक्षा प्रावधानों की संख्या कम थी जिससे ऐसे नोटों की नकल करना अपेक्षाकृत आसान है। वर्ष 2005 के बाद के आए नोटों में नोटों के मुद्रण का वर्ष छपा होता है तथा इनमें सुरक्षा के भरपूर प्रावधान होते हैं।


4) दिसम्बर 2014 के दौरान केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भारत में स्वास्थ्य बीमा (health insurance) के बारे में IRDA द्वारा तैयार एक नवीनतम रिपोर्ट संसद के समक्ष रखी। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या को स्वास्थ्य बीमा का कवर हासिल है? – 17%

विस्तार: IRDA की इस रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि भारत में मार्च 2014 के अंत तक 21.62 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा कवर हासिल है जो कुल जनसंख्या का लगभग 17% है। खास बात यह है कि इस रिपोर्ट से सामने आया यह आँकड़ा विश्व बैंक (World Bank) द्वारा इसी विषय पर उस रिपोर्ट के आंकड़े से काफी अलग है जिसे वर्ष 2012 में जारी किया गया था। “Government-Sponsored Health Insurance in India: Are You Covered?” शीर्षक वाली उस रिपोर्ट में यह कहा गया था कि भारत में वर्ष 2010 तक लगभग 30 करोड़ लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध है जोकि कुल जनसंख्या का लगभग 25% था। उस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि स्वास्थ्य बीमा प्राप्त करने वाले इन 30 करोड़ लोगों में से करीब 18 करोड़ गरीबी रेखा से नीचे थे। विश्व बैंक की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वर्ष 2007 से 2012 तक सरकार द्वारा इस क्षेत्र में किए गए कार्यों के चलते स्वास्थ्य बीमा हासिल करने वाले लोगों की संख्या में खासी वृद्धि दर्ज होने का अनुमान है।


5) वर्ष 2014-15 की मध्यावधि आर्थिक समीक्षा (Mid-Year Economic Review) 19 दिसम्बर 2014 को लोकसभा के पटल पर रखी गई। इसके अनुसार इस वर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर क्या रहने की संभावना है? – 5.5%

विस्तार: इस मध्यावधि आर्थिक समीक्षा को वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) के पद पर कार्यरत अरविन्द सुब्रह्मण्यम (Arvind Subramanian) के नेतृत्व वाले दल ने किया है। इस समीक्षा में उल्लेख किया गया चालू वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.1% के स्तर पर रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगी। वित्तीय वर्ष के पहले भाग में अपेक्षाकृत सुस्ती के बाद अब वित्त मंत्रालय दूसरे भाग में अर्थव्यवस्था के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद कर रहा है।


6) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के उप-गवर्नर एच.आर. खान द्वारा 19 दिसम्बर 2014 को गई घोषणा के अनुसार बैंक कम मूल्य की खरीददारी के लिए किए जाने वाले ऑनलाइन भुगतान हेतु टू-स्टेप ऑथेण्टिकेशन (two-step authentication) में ढील देने की तैयारी कर रही है। इस संदर्भ में कम मूल्य की खरीददारी की ऊपरी सीमा क्या है? – रु. 3,000

विस्तार: RBI कम मूल्य की खरीददारी के लिए किए जाने वाले ऑनलाइन भुगतान हेतु टू-स्टेप ऑथेण्टिकेशन में ढील इसलिए देना चाहती है क्योंकि ई-रिटेल के रफ्तार पकड़ने के चलते आजकल भारी मात्रा में ऑनलाइन भुगतान किए जाते हैं और इसमें छोटे भुगतानों के लिए भी टू-स्टेप ऑथेण्टिकेशन से दिक्कत आती है। टू-स्टेप ऑथेण्टिकेशन को भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है लेकिन माना जा रहा है कि कम मूल्य के भुगतान के लिए इतनी सुरक्षा रखने से भुगतान में देरी होती है।


7) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 18 दिसम्बर 2014 को देश के दो बैंकों – निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) पर आर्थिक दण्ड लगाने की घोषणा की। यह दण्ड किस कारण लगाया गया? – इन बैंकों द्वारा KYC नियमों में ढिलाई और काले धन को सफेद करने में लिप्त होने के कारण

विस्तार: RBI ने ICICI बैंक पर जहाँ 50 लाख का जुर्माना लगाया वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा पर 25 लाख का जुर्माना लगाया क्योंकि इन दोनों बैंकों पर आरोप था कि उन्होंने KYC (Know your Customer) नियमों को अनुपालन ठीक से नहीं किया और काले धन को सफेद बनाने में इनकी संलिप्तता है। इन बैंकों के अलावा कुछ इसी प्रकार के आरोप तीन और बैंकों पर भी सही गए तथा RBI ने उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया। ये तीन बैंक हैं – स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया (SBI) , एक्सिस बैंक (Axis Bank) और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (SBP)। उल्लेखनीय है कि RBI को इस सम्बन्ध में शिकायत मिली थी कि इन बैंकों में तमाम फर्जी खाते खोले गए हैं जिनके माध्यम से सिर्फ चेकों/डिमाण्ड ड्राफ्ट/पोस्टल ऑर्डर को भुनाने का काम किया गया तथा ऐसे खातों द्वारा गलत व्यक्तियों के पास पैसे का भुगतान किया जाता रहा जबकि बैंक इस धोखाधड़ी का पता नहीं लगा पाए।


8) अनिल अम्बानी के नेतृत्व वाली कम्पनी रिलायंस कैपिटल (Reliance Capital) ने बैंकिंग क्षेत्र में प्रवेश करने के उद्देश्य से किस जापानी बैंकिंग समूह के साथ रणनीतिक गठजोड़ किया है? – सुमितोमो मित्सुई ट्रस्ट बैंक (Sumitomo Mitsui Trust Bank)

विस्तार: इस समझौते के तहत रिलायंस कैपिटल प्रिफरेंशियल शेयरों के माध्यम से सुमितोमो मित्सुई ट्रस्ट बैंक को 2.77% हिस्सेदारी प्रदान करेगी। सुमितोमो मित्सुई ट्रस्ट बैंक जापान का चौथा सबसे बड़ा बैंकिंग समूह है तथा नियंत्रित की जा रही परिसम्पत्तियों की मात्रा हिसाब से यह (सितम्बर 2014 की समाप्ति में) देश का सबसे बड़ा बैंक है।


9) एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम में केन्द्र और राज्यों के बीच प्रस्तावित गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (GST) के मुद्दे पर जारी टकराव 15 दिसम्बर 2014 को लगभग समाप्त हो गया जिससे अब इस महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित विषय से सम्बन्धित विधेयक को इसी सत्र में संसद में रखना संभव हो गया है। केन्द्र ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए राज्यों की किस अहम मांग को मान लिया? – पेट्रोलियम पदार्थों को GST की परिधि से बाहर रखा जायेगा

विस्तार: एक तरफ जहाँ केन्द्र सरकार ने राज्यों की इस मांग को मान लिया कि पेट्रोलियम पदार्थों को GST की परिधि से बाहर रखा जायेगा वहीं राज्यों ने प्रवेश कर (Entry Tax) को GST में शामिल किए जाने को अपनी स्वीकृति प्रदान कर इस गतिरोध को समाप्त करने की कोशिश की। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2016 से प्रस्तावित GST के मुद्दे पर 15 दिसम्बर 2014 को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और सात राज्यों के वित्त मंत्रियों के बीच अहम बैठक हुई थी। यह सात राज्य हैं – पंजाब, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और जम्मू कश्मीर। देश के अन्य राज्यों को इस मुद्दे पर पहले ही मनाया जा चुका है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि फिलहाल कुछ आरंभिक वर्षों तक पेट्रोलियम उत्पादों को GST की परिधि से बाहर रखा जायेगा तथा इसे GST में शामिल किए जाने के बारे में बाद में निर्णय लिया जायेगा। पेट्रोलियम पदार्थों को GST की परिधि से बाहर करने का समर्थन मुख्यत: वे राज्य कर रहे थे जिनका 50% से अधिक राजस्व पेट्रोल तथा अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से एकत्र होता है।


10) 14वें वित्त आयोग (14th Finance Commission) ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को 15 दिसम्बर 2014 को सौंप दी। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर वाई.वी.रेड्डी (Y.V.Reddy) के नेतृत्व वाले इस आयोग का कार्यकाल क्या है जिस समयावधि के लिए यह रिपोर्ट तैयार की गई है? – 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020

विस्तार: 14वें वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा 2 जनवरी 2013 को किया गया था तथा इसे इसी साल 31 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी। लेकिन इसका कार्यकाल 31 दिसम्बर 2014 तक बढ़ा दिया गया था। आयोग ने अपने कार्यकाल को दो माह के लिए बढ़ाए जाने को इसलिए कहा था ताकि वह आन्ध्र प्रदेश और उसको काटकर गठित किए गए नए राज्य तेलंगाना की सरकारों से वित्तीय मामलों पर मंत्रणा कर सके। आयोग ने मुख्य रूप से 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 की समयावधि के दौरान केन्द्र द्वारा एकत्र करों के राज्यों के बीच किए जाने वाले प्रस्तावित बँटवारे के बारे में अपनी सलाह दी है। आयोग को इस बार गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (GST) के बारे में अपने विचार रखने को कहा गया था। इसके अलावा जल और विद्युत शुल्कों के निर्धारण तथा गैर-वरीयता वाली श्रेणी में आने वाली सार्वजनिक इकाइयों (PSU) के विनिवेश के बारे में भी सलाह रखने को कहा गया था।


 


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