बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 69

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29 Sep, 2014

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बैंकिंग जागरूकता,


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1) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 15 सितम्बर 2014 को जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में किस बैंक के पास मोबाइल बैंकिंग सेवा अपनाने वाले ग्राहकों की सर्वाधिक संख्या है? – भारतीय स्टेट बैंक (SBI)

विस्तार: जारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में SBI के पास मोबाइल बैंकिंग सेवा का लाभ उठाने वाले ग्राहकों की संख्या लगभग 1.15 करोड़ है जो भारत में सर्वाधिक है। SBI के बाद मोबाइल बैंकिंग के मामले में ICICI बैंक 19.5 लाख प्रयोगकर्ताओं के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद क्रमश: एक्सिस बैंक (13.6 लाख), यस बैंक (4.3 लाख) और HDFC बैंक (3.5 लाख) हैं। उल्लेखनीय है कि SBI के पास मोबाइल बैंकिंग के तहत जितने प्रयोगकर्ता हैं उतनी संख्या प्राय: पश्चिम के बड़े बैंकों के कुल ग्राहकों की होती है। सिर्फ चीन के दो बैंकों के पास इस संख्या से बड़ी संख्या है। खास बात यह है कि मोबाइल बैंकिंग जैसे वैकल्पिक बैंकिंग प्लेटफॉर्म का प्रयोग सबसे पहले शुरू करने वालों में मुख्य रूप से निजी क्षेत्र के बैंक थे। इसलिए SBI के पास मोबाइल बैंकिंग के इतने प्रयोगकर्ताओं की संख्या हैरानी का विषय है।

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2) भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार आने के तमाम चिन्ह सामने आने के बावजूद बैंकिंग ऋण वृद्धि दर banking credit growth rate) पिछले 5 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त 2014 को देश की बैंकिंग ऋण वृद्धि दर कितनी थी, जोकि पिछले 5 साल की न्यूनतम दर थी? – 10.9%

विस्तार: उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 का नवंबर-दिसंबर वह अंतिम बार थी जब देश की बैंकिंग ऋण वृद्धि दर लगभग इस स्तर पर थी। वह समय वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी की समाप्ति का था। उल्लेखनीय है कि वर्तमान परिदृश्य में पिछले दो सालों में बैंकिंग क्षेत्र की ऋण वृद्धि दर में तेज गिरावट आई है। वर्ष 2004-05 के दौरान यह दर 22% के शानदार स्तर पर रहने के बाद 2012-13 और 2013-14 के दौरान 13-14% तक गिर गई थी। यह दर देश की आर्थिक प्रगति की रफ्तार और दिशा बताने वाला एक महत्वपूर्ण सूचक मानी जाती है तथा इसका सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से गहरा सम्बन्ध है। पिछले दस वर्षों के दौरान ऋण वृद्धि दर देश के सकल घरेलू उत्पाद की 2.5 से 3 गुनी तक रही है। इसलिए जब वर्ष 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर मात्र 4.7% रह गई तो बैंकिंग ऋण वृद्धि दर भी 14% से कम के स्तर पर आ गई।

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3) भारत में पेंशन क्षेत्र की नियामक संस्था PFRDA (पेंशन फण्ड नियामक एवं विकास प्राधिकरण) ने सितम्बर माह के दौरान निजी क्षेत्र में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (National Pension System – NPS) द्वारा अपनी निधियाँ निवेशित किए जाने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। इस समिति का अध्यक्ष किसे बनाया गया है? – जी.एन. बाजपेयी (SEBI तथा LIC के पूर्व अध्यक्ष)

विस्तार: इस समिति का मुख्य उद्देश्य ऐसे दिशानिर्देश तैयार करना है जिनके तहत पेंशन निधियों का निवेश बैंकों द्वारा लाए जाने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड्स और बेसल तीन (Basel-III) मानकों का पालन करने वाले सम्बन्धित बाण्डों में सुरक्षित तौर पर किया जा सके। समिति इन फण्डों का बाजार-आधारित फण्डों में निवेश किए जाने तथा इच्छानुसार फण्ड मैनेजरों का चुनाव करने की सुविधा के बारे में भी अपने सुझाव देगी। इस समिति में शामिल अन्य सदस्य हैं – दीपक सातवालेकर (पूर्व प्रमुख HDFC स्टैण्डर्ड लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी), एस.बी. माथुर (पूर्व अध्यक्ष LIC), सी. आर. मुरलीधरन (पूर्व सदस्य IRDA) और माधवी दास (कार्यकारी निदेशक PFRDA)

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4) भारत में निजी क्षेत्र के किस बैंक ने 10 सितम्बर 2014 को एक अनोखी “कार्ड-रहित निकासी” (‘Cardless Cash Withdrawal’) सेवा प्रदान करने की घोषणा की जिसमें बैंक के ग्राहक देश के किसी भी खाते में धन का हस्तांतरण कर सकेंगे? – ICICI बैंक

विस्तार: बैंक की “कार्ड-रहित निकासी” सेवा के तहत धन प्राप्त करने वाला बिना किसी डेबिट कार्ड के चौबीसों घण्टे ICICI बैंक के देश भर में फैले दस हजार से अधिक एटीएम से पैसा निकाल सकेगा। बिना किसी बैंक खाते के भी इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। हालांकि धन हस्तांतरित करने वाले व्यक्ति का ICICI बैंक में बैंक खाता होना चाहिए। यह धन हस्तांतरण सेवा ICICI बैंक का कोई भी बचत बैंक खाताधारक बैंक की इंटरनेट बैंकिंग साइट पर लॉग-ऑन कर प्राप्त कर सकता है।

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5) सार्वजनिक क्षेत्र के किस बैंक ने सितम्बर 2014 के दौरान ऐसे कॉन्टेक्ट-लेस डेबिट कार्ड (contact-less debit cards) जारी करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की अनुमति मांगी है जिनके तहत ग्राहक कुछ सौदे करते समय कार्ड का पिन अंकित करने से बच सकते हैं? – भारतीय स्टेट बैंक (SBI)

विस्तार: उल्लेखनीय है कि वर्तमान में किसी भी कार्ड का इस्तेमाल करते समय कार्डधारक को कार्ड का पिन नम्बर अंकित करना होता है। लेकिन SBI समेत तमाम बैंकों का मानना है कि छोटी राशि के कई लेन-देन को करते समय ग्राहकों को पिन नम्बर अंकित करने से छूट प्रदान करनी चाहिए। जैसे मेट्रो या बस का टिकट खरीदते समय ग्राहकों को पिन अंकित करने से बचाया जा सकता है। इसी को ध्यान रखते हुए SBI ने RBI से ऐसे कार्ड जारी करने की अनुमति मांगी है। हालांकि यह स्पष्ट है कि पिन अंकित करने से राहत देते समय कोई अधिकतम राशि तय की जायेगी और SBI ने इस सीमा को अधिकतम 2,000 रुपए रखने की मांग की है।

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6) भारतीय स्टेट बैंक ने 8 सितम्बर 2014 को अपना पहला मल्टी-करेंसी अंतर्राष्ट्रीय डेबिट कार्ड (first multi-currency international debit card) जारी किया जिसके तहत ग्राहक एक ही कार्ड से कई मुद्राएं निकाल सकेंगे। मास्टरकार्ड (MasterCard) के साथ गठजोड़ में जारी इस कार्ड में वर्तमान में ग्राहक रुपए के अलावा कितनी अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं का प्रयोग कर सकेंगे? – चार

विस्तार: ये चार मुद्राएं हैं – अमेरिकी डॉलर, यूरोप का यूरो, ब्रिटेन का पाउण्ड और सिंगापुर का डॉलर। हालांकि इस कार्ड में अन्य मुद्राओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि इस में एक बार में 12 अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं को जोड़ा जा सकता है।

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7) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने हाल ही में अपने कर्मचारियों के प्रोत्साहन के लिए क्या पहल करने की योजना बनाई है जोकि भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए अपने तरह की पहली ऐसी पहल होगी? – कर्मचारियों को एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन योजना (Employee Stock Option Scheme – ESOS) का लाभ देना

विस्तार: एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन योजना के तहत कर्मचारियों को भविष्य में किसी पूर्व निर्धारित कीमत पर बैंक के स्टॉक (शेयर) खरीदने का मौका दिया जायेगा। अभी तक भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से किसी ने ऐसी पहल नहीं की है हालांकि निजी प्रतिष्ठानों में ESOS और  ESOP प्रदान करने की रिवायत काफी पुरानी है। SBI इस योजना को अमली जामा पहनाना चाहती है क्योंकि इसके द्वारा कर्मचारियों का प्रोत्साहन बढ़ाए जाने के साथ ही उन्हें अपने समूह से जोड़े रखने में सहायता मिल सकती है। RBI द्वारा इस साल दो बैंकों (IDFC और बंधन फाइनेंशियल सर्विसेज) को बैंक लाइसेंस जारी किए जाने के बाद से बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों को अपने साथ जोड़े रखने में बैंकों को समस्याएं आ रही हैं।

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8) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 9 सितम्बर 2014 को निजी बैंकों के प्रबन्ध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पदों पर बैठे अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की अधिकतम आयु 70 वर्ष तय करने की घोषणा की। आयु तय करने का यह प्रावधान मुख्यत: किसलिए किया जा रहा है? – कम्पनी कानून 2013 (Companies Act, 2013) के अनुपालन के लिए

विस्तार: कम्पनी कानून 2013 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि निजी बैंक में प्रबन्ध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक तथा मैनेजर नियुक्त किए जाने वाले किसी भी व्यक्ति की न्यूनतम आयु 21 तथा अधिकतम आयु 70 वर्ष होनी चाहिए। अब RBI ने इस नियम के अनुपालन के लिए यह घोषणा की है।

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9) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सितम्बर 2014 के दौरान छह शहरी कोऑपरेटिव बैंकों (UCBs) को किस कारण बंद करने का आदेश जारी कर दिया? – इन बैंकों के कथित तौर पर काले धन को सफेद करने की गतिविधियों में लिप्त होने के आरोपों के चलते

विस्तार: कुछ समय आई एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसे कुछ बैंकों को काले धन को सफेद करने की गतिविधियों में एक मोहरा बनाया जा रहा है। केन्द्रीय वित्त मंत्री की अगुवाई में हुई आर्थिक खुफिया परिषद (Economic Intelligence Council – EIC) की एक हाल की बैठक में इस सम्बन्ध में निर्णय लिया गया था। शहरी कोऑपरेटिव बैंकों पर केन्द्र और राज्य सरकारों का दोहरा नियंत्रण होता है तथा अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर उनकी जाँच वार्षिक अथवा द्विवार्षिक आधार पर की जाती है। अब भारतीय रिज़र्व बैंक ने ऐसी गतिविधियों में लिप्त बैंकों पर नकेल कसने पर जोर देना शुरू कर दिया है।

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10) वर्ष 2014 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारत के पूँजी बाजार में पैसा निवेश करने की मात्रा ने अभी तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 15 सितम्बर तक इस माध्यम से भारत में कितना निवेश हो चुका है, जिसके बारे में SEBI ने 16 सितम्बर 2014 को आंकड़े प्रस्तुत किए? – 1,97,715.9 करोड़ रुपए

विस्तार: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) से प्राप्त इस कुल राशि में से 85,247 करोड़ रुपए इक्विटी (equity) के रास्ते निवेशित किए गए वहीं 1,12,469 करोड़ रुपए डेब्ट (debt) के रास्ते से निवेशित किए गए। यह भारत के इतिहास में विदेशी संस्थागत निवेशकों के द्वारा किया गया रिकॉर्ड निवेश है। इससे पूर्व विदेशी संस्थागत निवेशकों के माध्यम से किसी वर्ष में किया गया सर्वाधिक निवेश वर्ष 2010 में दर्ज किया गया था जब 1,79,674.6 करोड़ रुपए का निवेश पूरे वर्ष में हुआ था।


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