बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 117

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Editorial Team

31 Oct, 2016

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बैंकिंग जागरूकता,


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1) विजय केलकर (Vijay Kelkar), रतन टाटा (Ratan Tata) और नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) जैसी तीन दिग्गज हस्तियों ने परोपकारों कार्यों के लिए चिह्नित अपनी पूँजी के द्वारा मिलकर एक नई लघु-वित्त संस्था (microfinance institution – MFI) स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस नई लघु-वित्त संस्था का नाम क्या होगा? – अवंति कैपिटल (Avanti Capital)

विस्तार: पूर्व वित्त सचिव तथा National Institute of Public Finance and Policy (NIPFP) के अध्यक्ष विजय केलकर (Vijay Kelkar), टाटा समूह के मानद अध्यक्ष रतन टाटा (Ratan Tata) और इन्फोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक व आधार (Aadhaar) प्रणाली के मुख्य प्रेरणा-स्रोत नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) ने कुछ समय पूर्व एक नई लघु-वित्त संस्था (microfinance institution) अवंति कैपिटल (Avanti Capital) की स्थापना के लिए अपने हाथ मिलाए हैं। इन तीनों दिग्गज हस्तियों ने परोपकारों कार्यों के लिए चिह्नित अपनी पूँजी (philanthropic capital) के हिस्से का निवेश अवंति कैपिटल में किया है। इन तीन हस्तियों के अलावा सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के प्रबन्धन ट्रस्टी आर. वेंकटरमणन (R. Venkataramanan) इसमें चौथे निवेशक के रूप में शामिल होंगे।

इस प्रस्तावित लघु-वित्त संस्था के द्वारा प्रौद्यौगिकी क्षेत्र में वित्त समावेशन (financial inclusion) सम्बन्धी गतिविधियों को बल देने का प्रयास किया जायेगा। इसके द्वारा वित्त-पोषण से दूर पिछड़े क्षेत्रों को वित्त-पोषण प्रदान करने का प्रयास किया जायेगा।

मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार अवंति कैपिटल लघु-वित्त संस्था का दर्जा प्रदान करने के लिए जल्द ही भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) में आवेदन करेगी तथा इसका संचालन संभवत: इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक शुरू हो जायेगा।

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2) तमाम अटकलों को विराम लगाते हुए केन्द्र सरकार ने 20 अगस्त 2016 को उर्जित पटेल (Urjit Patel) को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का अगला गवर्नर (Governor) नियुक्त कर दिया। वे जब 4 सितम्बर 2016 को RBI के नए गवर्नर का पद संभालेंगे तो वे भारत के इस केन्द्रीय बैंक के कौन से क्रम के गवर्नर होंगे? – 24वें

विस्तार: 20 अगस्त 2016 को केन्द्र सरकार ने उर्जित पटेल (Urjit Patel) को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 24वें गवर्नर (24th Governor) के रूप में नियुक्त करने की घोषणा कर दी। वे रघुराम राजन (Raghuram Rajan) से यह पद 4 सितम्बर 2016 को संभालेंगे जब राजन का तीन-वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो जायेगा।

पटेल अभी तक RBI के उप-गवर्नर (Deputy Governor) की भूमिका निभा रहे हैं तथा केन्द्रीय बैंक के ऐसे आठवें गवर्नर बनेंगे जो पहले उप-गवर्नर रहे थे। माना जा रहा है कि वे रघुराम राजन द्वारा अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने पर अधिक जोर देने वाली नीतियों का ही अनुसरण करेंगे क्योंकि वे अभी तक केन्द्रीय बैंक में मौद्रिक नीति (Monetary Policy) का ही काम-काज देख रहे थे।

उल्लेखनीय है कि उर्जित पटेल ने RBI के नियंत्रित मुद्रास्फीति के ढांचे को तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। इसके अलावा उन्होंने RBI में तमाम और आमूलचूल परिवर्तन क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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3) बड़े व्यावसायिक समूह को अधिक ऋण प्रदान कर बैंकों द्वारा जोखिम लेने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के उद्देश्य से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 25 अगस्त 2016 को घोषणा की कि अब बैंक किसी व्यावसायिक समूह की कुल इक्विटी पूँजी की अधिकतम 25% राशि तक ही ऋण प्रदान कर सकेंगे। अभी तक यह सीमा कितनी थी? – 55%

विस्तार: बड़े व्यावसायिक समूह को प्रदान किए जा सकने वाले ऋण को अधिकतम 25% तक सीमित कर RBI ने ऐसे समूहों को बहुत अधिक ऋण प्रदान कर बैंकों द्वारा ज़्यादा जोखिम मोल लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने का प्रयास किया है। अभी तक बैंक मूलभूत संरचना से सम्बन्धित ऋणों (infrastructure loans) के मामले में किसी एक व्यावसायिक समूह को अधिकतम उनकी इक्विटी पूँजी के 55% तक ऋण प्रदान कर सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर RBI ने व्यावसायिक समूहों को बैंक ऋणों के बजाय बाण्डों (Bonds) से धन एकत्र करने की ओर मोड़ने के उद्देश्य से उनके द्वारा बाण्ड जारी करने में तमाम सहूलियतें दिए जाने तथा उनको बाण्डों के बदले ऋण प्रदान करने की सीमा को भी बढ़ाने की घोषणा कर दी।

उल्लेखनीय है कि बड़े व्यायसायिक घरानों को अधिक मात्रा ऋण प्रदान करने की प्रवृत्ति के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU banks) की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ (Gross NPAs) वर्तमान में 11.3% तक पहुँच गई हैं। वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा अपने आप को प्राय: रिटेल (reatil) तथा छोटे व मध्यम व्यवसायों  (SMEs) तक सीमित रखने की प्रवृत्ति के कारण उनकी Gross NPA दर मात्र 2.8% है।

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4) कौन सा बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का पहला बैंक (First PSU bank) बना है जिसने अगस्त 2016 के दौरान लॉकर (Locker) रखने वाले ग्राहकों को अपने लॉकर की विज़िट पर वसूले जाने वाले शुल्क को समाप्त कर विज़िट्स को नि:शुल्क कर दिया है? – पंजाब नैशनल बैंक (PNB)

विस्तार: अपने ग्राहकों को खुश करने की एक योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नैशनल बैंक (Punjab National Bank – PNB) ने लॉकर विज़िट (locker visit) करने पर ग्राहकों पर लगाए जाने वाले शुल्क को समाप्त कर दिया है तथा इस सुविधा को नि:शुल्क कर दिया है। अभी तक PNB सिर्फ वर्ष में 12 विज़िट्स को नि:शुल्क रखे हुए था। इसके बाद की जाने वाली अतिरिक्त विज़िट्स पर 50 रुपए प्रति विज़िट की दर से शुल्क वसूला जाता था।

लेकिन अब PNB के ग्राहक अपने लॉकर असीमित बार नि:शुल्क विज़िट कर सकेंगे। बैंक ने बताया कि उसने इस सुविधा को 1 अगस्त 2016 से ही उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है तथा ऐसा करने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का देश का पहला बैंक बन गया है।

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5) केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा काले-धन के मुद्दे पर नियुक्त विशेष जाँच दल (SIT) की उस सिफारिश को स्वीकार करने का निर्णय लिया है जिसमें बड़े नकद भुगतानों पर प्रतिबन्ध लगाने को कहा गया था। कितने रुपए से अधिक के नकद भुगतानों को अब केन्द्र सरकार प्रतिबन्धित करने जा रही है? – 3 लाख रुपए से अधिक

विस्तार: देश में काले धन (black money) की समस्या पर नकेल कसने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने 3 लाख रुपए से अधिक मूल्य के नकद भुगतानों पर प्रतिबन्ध लगाने का फैसला अगस्त 2016 के दौरान लिया। काले धन के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जाँच दल द्वारा तैयार रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद केन्द्र सरकार ने SIT की इस सिफारिश को स्वीकार करने का निर्णय ले लिया है।

इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पूर्व शुरू की गई जन-धन योजना (Jan Dhan Yojana) के बाद देश में बैंक खातों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसलिए अब व्यवसायी तथा अन्य लोग यह बहाना नहीं बना सकते हैं कि उनके पास बैंक खाते की सुविधा न होने के कारण उन्हें नकद भुगतानों के लिए बाध्य होना पड़ता है। सरकार चाहती है कि ऐसे भुगतानों को चैक, नेट बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड अथवा मनी ट्रांसफर जैसे माध्यमों से किए जाएं ताकि सरकार काले धन के प्रयोग पर अंकुश लगा सके।

वहीं वित्त मंत्रालय प्लास्टिक मनी (कार्ड आधारित) भुगतानों को अधिक तरजीह देना चाह रहा है। इसके लिए मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की है तमाम सरकारी सेवाओं के लिए डेबिट-क्रेडिट कार्ड भुगतान पर लगाए जाने वाले शुल्क (transaction charge) को समाप्त किया जायेगा।

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6) सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के किस उपक्रम को अगस्त 2016 के दौरान पेमेण्ट्स बैंक (Payments Bank) हेतु निगमीकरण प्रमाणपत्र (Certificate of Incorporation) हासिल हुआ? – इण्डिया पोस्ट (भारतीय डाक विभाग)

विस्तार: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इण्डिया पोस्ट (India Post) द्वारा पेमेण्ट्स बैंक (Payments Bank) के क्षेत्र में उतरने की दिशा में एक बड़ा मुकाम हासिल हुआ जब 17 अगस्त 2016 को द इण्डिया पोस्ट पेमेण्ट्स बैंक लिमिटेड (The India Post Payments Bank Ltd – IPPB) को रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज़ (Certificate of Incorporation) का निगमीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो गया।

माना जा रहा है कि इण्डिया पोस्ट अपने पेमेण्ट्स बैंक को देशभर में फैली शाखाओं के माध्यम से सितम्बर 2017 तक खोल देगा।

इस पेमेण्ट्स बैंक को इण्डिया पोस्ट पेमेण्ट्स बैंक (India Post Payments Bank) के नाम से जाना जायेगा तथा इसका प्रबन्धन “A” श्रेणी के कर्मचारियों द्वारा प्रबन्धित किया जायेगा जिसके लिए वित्तीय बाजार से विशेषज्ञों को हासिल किया जायेगा।

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7) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 25 अगस्त 2016 को बैंकों को भारतीय रुपए में बाण्ड जारी कर विदेशी बाजारों से पूँजी एकत्र करने की अनुमति दे दी। इस उद्देश्य के लिए प्रयुक्त विशेष बाण्ड (जिन्हें मसाला बाण्ड (Masala Bonds) भी कहा जाता है) अभी तक कौन सी संस्थाओं को ही जारी करने की अनुमति मिली हुई थी? – कॉर्पोरेट कम्पनियाँ तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियाँ

विस्तार: भारतीय पूँजी तथा मुद्रा बाजार में सुधारों की कड़ी में एक बड़ा कदम उठाते हुए RBI ने 25 अगस्त 2016 को मसाला बाण्ड (Masala Bonds) के नाम से लोकप्रिय बाण्ड बैंकों को जारी करने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके अलावा बैंकों को लिक्विडिटी एडजस्टमेण्ट फैसिलिटी (LAF) के तहत कॉर्पोरेट बाण्ड प्राप्त करने की अनुमति भी बैंकों को प्रदान की गई है।

इसका अर्थ हुआ कि भारतीय बैंक अब अपनी पूँजी आवश्यकताओं के लिए तथा मूलभूत संरचना (infrastruture) व सस्ती आवासीय परियोजनाओं (affordable housing projects) के वित्त पोषण के लिए रुपए में जारी (rupee denominated) किए जाने वाले इन बाण्डों को विदेशी में जारी कर सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में मसाला बाण्डों को जारी करने की अनुमति सिर्फ कॉर्पोरेट कम्पनियों और बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (NBFCs) को ही मिली हुई थी। मसाला बाण्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके द्वारा भारतीय प्रतिष्ठान विदेशी बाजारों से आसानी से पूँजी हासिल कर सकते हैं क्योंकि इन्हें भारतीय रुपए में जारी किया जाता है। वहीं इन बाण्डों में विदेशी मुद्रा से सम्बन्धित जोखिम (risk) को निवेशक वहन करते हैं।

उल्लेखनीय है कि अभी तक दो उपक्रम – एचडीएफसी (HDFC) और एनटीपीसी (NTPC) मसाला बाण्ड सुविधा का लाभ उठाते हुए लगभग 5,000 करोड़ रुपया विदेशी बाजारों से हासिल कर चुके हैं।

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8) देश में नकद लेन-देन कम करके ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम तब उठाया गया जब 25 अगस्त 2016 को नेशनल पेमेण्ट कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया (NPCI) ने अपना यूनीफाइड पेमेण्ट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface – UPI) लाँच कर दिया। इस सुविधा के द्वारा आम लोग अपने स्मार्टफोन में कुछ बार टैप कर विभिन्न प्रकार के भुगतान कर सकेंगे। 24 अगस्त को शुरु इस सुविधा को अपने एप्लीकेशन्स (apps) के द्वारा उपलब्ध कराने वाले देश के 4 प्रथम बैंक कौन से हैं? – एक्सिस बैंक, यूनियन बैंक, फेडरल बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र

विस्तार: भारत ने एक नकदहीन अर्थव्यवस्था (cashless economy) की दिशा में एक बड़ा कदम तब बढ़ाया जब देश के चार बैंकों ने 25 अगस्त 2016 को अपने यूपीआई-आधारित एप्लीकेशन्स को लाँच करते हुए इस महात्वाकांक्षी भुगतान प्रणाली को देश में शुरू कर दिया। इन चार बैंकों – एक्सिस बैंक (Axis Bank), यूनियन बैंक (Union Bank), फेडरल बैंक (Federal Bank) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) ने इस दिन गूगल प्लेस्टोर (Google Play Store) पर अपने यूपीआई-आधारित एप्लीकेशन्स को उपलब्ध करा दिया।

उल्लेखनीय है कि यूनीफाइड पेमेण्ट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली के द्वारा बेहद सुरक्षित तरीके तथा बहुत आसानी से भुगतान किए जा सकेंगे अथवा धन का स्थानांतरण (fund transfer) किसी खाते से दूसरे खाते में मात्र एक SMS के द्वारा किया जा सकेगा।

इस प्रणाली की सबसे खास बात होगी कि यह देश की सभी मौजूदा भुगतान प्रणालियों को एकीकृत करने में सक्षम है। दूसरी बड़ी खासियत यह है कि इसमें मोबाइल के द्वारा बैंक खाता संख्या अथवा क्रेडिट कार्ड विवरण जैसी संवेदनशील जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी।

फिलहाल इस प्रणाली को सिर्फ इन चार बैंकों ने उपलब्ध कराया है लेकिन यूनीफाइड पेमेण्ट्स इंटरफेस प्रणाली में भागीदार बैंकों की कुल वर्तमान संख्या 21 है। इसलिए जल्द ही अन्य बैंक भी इस भुगतान प्रणाली से सम्बन्धित एप्लीकेशन्स (apps) अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा देंगे।

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9) 22 अगस्त 2016 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केन्द्र सरकार अगले वर्ष से केन्द्रीय बजट (Union Budget) को फरवरी के अंत के बजाय जनवरी के अंत में प्रस्तुत करने पर विचार कर रही है। बजट को एक माह पूर्व प्रस्तुत करने के पीछे सरकार की मुख्य मंशा क्या है? – ताकि समस्त बजटीय प्रक्रियाओं को नए वित्तीय वर्ष के शुरू होने तक पूरा किया जा सके

विस्तार: केन्द्रीय बजट को पिछले कई दशकों से फरवरी (February) के अंतिम दिन प्रस्तुत करने की परंपरा रही है। लेकिन केन्द्र सरकार इस परंपरा को बदल कर बजट घोषणा को एक माह पहले खिसकाने पर विचार कर रही है। इसके पीछे सरकार की मंशा यह है कि बजट से सम्बन्धित समस्त संवैधानिक प्रक्रियाओं को नए वित्तीय वर्ष से पहले पूरा किया जा सके।

उल्लेखनीय है कि संविधान में हालांकि बजट पेश करने के लिए किसी तिथि का उल्लेख नहीं है लेकिन तमाम दशकों से इसे फरवरी माह के अंतिम कार्य-दिवस (last working day of February) पर पेश करने की परंपरा रही है। लेकिन बजट प्रस्तुत करने के बाद इसे संसद के दोनों सदनों से पारित करने तक मई माह का मध्य आ जाता है।

चूंकि नया वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो जाता है इसलिए बजट संसद द्वारा पारित न होने के कारण केन्द्र सरकार मार्च माह में अगले दो-तीन माह के खर्च को पूरा करने के लिए लेखानुदान (Vote-on-Account) प्रस्तुत करती है।

वित्त मंत्रालय का मानना है कि यदि बजट को एक माह पूर्व प्रस्तुत किया जाता है तो समस्त बजटीय प्रक्रिया को नए वित्त वर्ष तक पूरा किया जा सकता है। ऐसे में लेखानुदान प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।

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10) देश की प्रमुख टेलीकॉम कम्पनियों ने मोबाइल कनेक्शनों (mobile connections) से सम्बन्धित कौन सी नई सेवा अपने ग्राहकों को प्रदान करने की शुरूआत 24 अगस्त 2016 से की? – आधार (Aadhaar) पर आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) सेवा

विस्तार: देश की कुछ प्रमुख मोबाइल कम्पनियों जैसे एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया ने 24 अगस्त 2016 को आधार प्रणाली पर आधारित e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) सेवा शुरु कर दी। इसके तहत सिम (SIM) कार्डों का एक्टिवेशन e-KYC से वैरीफिकेशन करने के बाद किया जायेगा।

इस सेवा के तहत ग्राहकों को सिर्फ अपनी आधार संख्या (Aadhaar No.) मोबाइल स्टोर पर बतानी होगी जिसके साथ उनके फिंगरप्रिंट को लेकर उसे आधार वाले बायोमीट्रिक आंकड़े से मिलाकर वैरीफिकेशन किया जायेगा। वैरीफिकेशन के बाद SIM कार्ड को तुरंत एक्टीवेट किया जायेगा। इसके तहत दोनों प्रकार के SIM कार्ड – प्रीपेड और पोस्टपेड तुरंत एक्टीवेट किए जा सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2016 में ही दूरसंचार विभाग (DoT) ने e-KYC के बारे में अपने दिशानिर्देश जारी करते हुए मोबाइल कम्पनियों से इसे ग्राहकों के लिए शुरू करने को कहा था ताकि नए फोन कनेक्शनओं को तुरंत एक्टीवेट किया जा सके।

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