बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 114

Site Administrator

Editorial Team

01 Sep, 2016

3642 Times Read.

बैंकिंग जागरूकता,


RSS Feeds RSS Feed for this Article



Read this in English

NPA-2-2015

1) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुरे ऋणों (bad loans) के मुद्दे पर तमाम दुश्वारियाँ झेल रहे बैंकों को कुछ राहत देने के उद्देश्य से एक नई योजना 13 जून 2016 को घोषित की जिसके तहत कॉर्पोरेट कर्जदारों के बुरे ऋणों को आधे हिस्से को इक्विटी (equity) अथवा इक्विटी के जैसी प्रतिभूतियों में परिवर्तित किया जा सकेगा। इस नई योजना को क्या नाम दिया गया है? – स्कीम फॉर सस्टेनेबल स्ट्रकचरिंग ऑफ स्ट्रेस्ड एसेट्स (Scheme for Sustainable Structuring of Stressed Assets – S4A)

विस्तार: RBI द्वारा स्कीम फॉर सस्टेनेबल स्ट्रकचरिंग ऑफ स्ट्रेस्ड एसेट्स (S4A) नामक इस योजना को बैंकों के लिए वैकल्पिक (optional) बनाया जायेगा तथा इसका मुख्य उद्देश्य घाटे वाले ऋणों (बुरे ऋणों), जिनका आकार काफी बड़ा है, का निपटारा कर बैंकों के लिए कुछ धन निकालना है।

इस योजना के तहत बैंकों को यह अधिकार होगा कि वे ऐसे खराब ऋणों के आधे हिस्से को इक्विटी (शेयर पूँजी) में अथवा उसकी जैसी किसी अन्य प्रतिभूति में परिवर्तित कर सके।

इस योजना को इस तथ्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है कि देश के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे लौह व इस्पात, मूलभूत संरचना, आदि को हासिल होने वाले ऋण प्रवाह (flow of credit) को बुरे ऋणों के चलते रोके जाने जैसी समस्याओं को समाप्त किया जा सके। वहीं इससे कॉर्पोरेट कम्पनियों तथा बैंकों पर पड़ रहे दबाव को कम करने की भी RBI की मंशा है।

…………………………………………………………

SBI-Associates-2016

2) एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में केन्द्रीय कैबिनेट ने भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India – SBI) के 5 सहयोगी बैंकों (5 associate banks) तथा भारतीय महिला बैंक (BMB) के SBI में विलय के प्रस्ताव को 15 जून 2016 को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। इसके चलते SBI एक बहुत बड़े बैंकिंग समूह के रूप में सामने आयेगा जिसके पास लगभग 37 लाख करोड़ रुपए का व्यवसाय तथा लगभग 50 करोड़ ग्राहकों का साथ हो जायेगा। SBI के वे दो सहयोगी बैंक कौन से थे जिनका विलय कुछ वर्षों पूर्व उसमें कर दिया गया था? – स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र और स्टेट बैंक ऑफ इंदौर

विस्तार: स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र (State Bank of Saurashtra) का विलय भारतीय स्टेट बैंक में जहाँ वर्ष 2008 में किया गया था वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंदौर (State Bank of Indore) का विलय इसके दो वर्ष बाद 2010 में किया गया था।

15 जून 2016 को केन्द्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक के शेष 5 सहयोगी बैंकों का विलय भी उसमें कर दिया जायेगा। यह पाँच सहयोगी बैंक हैं – स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर (State Bank of Bikaner and Jaipur), स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर (State Bank of Travancore), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (State Bank of Patiala), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (State Bank of Mysore) और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (State Bank of Hyderabad)।

इसके अलावा महिलाओं की सेवा में समर्पित देश के पहले पूर्ण महिला बैंक – भारतीय महिला बैंक (Bharatiya Mahila Bank (BMB) का भी विलय SBI में कर दिया जायेगा।

SBI के पाँच सहयोगी बैंकों में से तीन – स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ मैसूर सूचीबद्ध (listed) बैंक हैं।

…………………………………………………………

PPF-2016

3) केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने लोक भविष्यनिधि (Public Provident Fund – PPF) खातों के खाताधारकों के लिए कौन सी महत्वपूर्ण घोषणा 20 जून 2016 को की? – PPF खाताधारक अब पाँच वर्ष पूरे होने के बाद अपने खातों को बंद कर सकते हैं

विस्तार: 20 जून 2016 को केन्द्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा की गई एक घोषणा के अनुसार PPF खाताधारक अब बीमारी के खर्च के लिए तथा उच्च शिक्षा का खर्च वहन करने के लिए अपने खातों को मैच्योरिटी पूरी होने के पहले बंद कर सकेंगे। हालांकि ऐसा करना तभी संभव होगा जब खातों को खोले हुए कम से कम पाँच (5) वर्ष पूरे हो चुके हों।

उल्लेखनीय है कि PPF खातों की मियाद 15 वर्ष की है तथा अभी तक खातों को मियाद के पूर्व बंद किए जाने का प्रावधान नहीं था जिसके चलते खाताधारकों को समय पर अपना पैसा न मिल पाने के कारण खासी असुविधा होती थी। लेकिन खातों को मियाद से पहले तभी बंद किया जा सकेगा जब इसकी आवश्यकता के बारे में खाताधारक पूर्ण दस्तावेजों के तरह यथोचित अधिकारियों को पूरी तरह से संतुष्ट कर पाता है।

…………………………………………………………

Raghuram-Rajan-2015

4) आरबीआई (RBI) गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) द्वारा 18 जून 2016 को की गई घोषणा के अनुसार वे दूसरा कार्यकाल नहीं लेंगे तथा 4 सितम्बर 2016 को अपने पहले कार्यकाल के समाप्त होने के साथ ही अपना पद छोड़ देंगे। उनके इस निर्णय से पूँजी बाजार तथा निवेशकों को आश्चर्य होगा क्योंकि उनके तुरंत निर्णय लेने तथा कामकाज के तरीके की काफी तारीफ होती रही है। राजन RBI के कौन से क्रम के गवर्नर हैं? – 23वें

विस्तार: रघुराम राजन ने भारतीय रिज़र्व बैंक के 23वें गवर्नर के रूप में 4 सितम्बर 2013 को पद संभाला था। उन्होंने डी. सुब्बाराव (D. Subbarao) से यह पद ग्रहण किया था।

इससे पहले वर्ष 2003 से 2007 तक वे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुख्य अर्थशास्त्री थे तथा इस पद को संभालने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे।

उल्लेखनीय है कि रघुराम राजन ने अपने तीन-वर्षीय कार्यकाल के दौरान भारत के केन्द्रीय बैंक को देश की मुद्रास्फीति (inflation) पर नियंत्रण रखने में बेहद प्रभावशाली संस्था बनाने के अलावा देश के बैंकिंग क्षेत्र में तमाम सुधारों को शुरू करने में महती भूमिका निभाई है।

…………………………………………………………

RBI-N.S. Vishwanathan-2016

5) केन्द्र सरकार की नियुक्ति समिति द्वारा नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान किए जाने के बाद केन्द्र सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के उप-गवर्नर (Deputy Governor) के पद पर 28 जून 2016 को किसे नियुक्त किया? – एन.एस. विश्वनाथन (N.S. Vishwanathan)

विस्तार: एन.एस. विश्वनाथन (N.S. Vishwanathan), जो वर्ष 2014 से RBI के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) पद पर तैनात हैं, 3 जुलाई 2016 को सेवानिवृत्त हो रहे उप-गवर्नर एच.आर. खान (H.R. Khan) का स्थान लेंगे। वे कार्यकारी निदेशक की अपनी नियुक्ति के दौरान बैंकिंग तथा गैर-बैंकिंग क्षेत्र में नियामक विभागों (regulation departments) का काम देख रहे हैं।

वहीं एच.आर. खान को वर्ष 2011 के दौरान RBI का उप-गवर्नर नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान RBI के तमाम पोर्टफोलियो का काम देखा जैसे भुगतान व निपटारा प्रणाली (payment and settlement systems), विदेशी विनिमय (foreign exchange) तथा आंतरिक ऋण प्रबन्धन (internal debt management)।

उल्लेखनीय है कि RBI में कुल चार उप-गवर्नर होते हैं जिनमें से दो की नियुक्ति RBIई के बाहर से होती है तथा दो RBI के भीतर से ही शामिल किए जाते हैं। RBI के अन्य तीन उप-गवर्नर हैं – उर्जित पटेल (Urjit Patel), एस.एस. मुन्द्रा (S.S. Mundra) तथा आर. गाँधी (R. Gandhi)।

…………………………………………………………

6) किस वित्तीय प्रतिष्ठान ने 12 जुलाई 2016 को मसाला बाण्ड (Masala Bonds) के नाम से प्रसिद्ध बाण्डों को भारत में पहली बार जारी किया जिनके तहत भारतीय रुपए में मूल्यांकित बाण्डों को विदेशी पूँजी बाजार में बेचा जाता है? – एचडीएफसी (HDFC)

विस्तार: मसाला बाण्ड (Masala Bonds)  की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इसको विदेश में पूँजी उठाने के उद्देश्य से उतारा जाता है लेकिन इसके बावजूद इसको भारतीय मुद्रा रुपए में मूल्यांकित (rupee-denominated) किया जाता है। इसके चलते ऐसे बाण्ड का निर्गम करने वाले जारीकर्ता को विदेशी मुद्रा से सम्बन्धित तमाम जोखिमों के बगैर विदेशी बाजारों से धन एकत्र करने की सुविधा हासिल हो जाती है।

HDFC इस प्रकार के बाण्ड को जारी करने वाला देश का पहला वित्तीय प्रतिष्ठान बन गया है। इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा तैयार दिशानिर्देशों के अनुसार जारी किया गया है।

उल्लेखनीय है कि “मसाला बाण्ड” के बारे में विचार RBI ने पहली बार अप्रैल 2015 में प्रस्तुत किया था जबकि इससे सम्बन्धित दिशानिर्देशों को सितम्बर 2015 में जारी किया गया था।

…………………………………………………………

7) भारत में बीमा उद्योग (insurance industry) की नियामक संस्था आईआरडीए (IRDA) ने 8 जून 2016 को बीमा पॉलिसी बेचने तथा उनसे सम्बन्धित सेवाएं देने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के प्रयोग से सम्बन्धित प्रस्ताव जारी किए। IRDA का मानना है कि ऑनलाइन बीमा पॉलिसियों से देश में बीमा की पहुँच को विस्तृत किया जा सकेगा तथा इसके शुल्कों को कम किया जा सकेगा। ऑनलाइन बीमा पॉलिसियों के लिए IRDA ने बीमा कम्पनियों को जिस प्लेटफॉर्म तैयार करने की हिदायत दी है उसे क्या नाम दिया गया है? – इंश्योरेंस सेल्फ-नेटवर्क प्लेटफॉर्म (Insurance Self-Network Platform – ISNP)

विस्तार: भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDA) द्वारा रखे गए प्रस्तावों के अनुसार इंश्योरेंस सेल्फ-नेटवर्क प्लेटफॉर्म एक ऐसा मंच होगा जिसके द्वारा देश में ऑनलाइन बीमा पॉलिसियों के विपणन तथा सम्बन्धित सेवाएं प्रदान करने का काम किया जायेगा।

इस प्रस्ताव में IRDA ने यह उल्लेख भी किया है कि कौन सी संस्थाएं/उपक्रम इंश्योरेंस सेल्फ-नेटवर्क प्लेटफॉर्म की स्थापना कर सकते हैं। इसे स्थापना करने के लिए अर्ह संस्थाएं/उपक्रम हैं – IRDA द्वारा पंजीकरण प्राप्त बीमा कम्पनियाँ, बीमा सेवाओं में संलग्न द्वितीयक संस्थाएं (intermediaries), बीमा एजेण्ट तथा IRDA द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य संस्थाएं शामिल होंगी।

इस प्रस्ताव में इंश्योरेंस सेल्फ-नेटवर्क प्लेटफॉर्म स्थापित करने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है, जबकि बीमा उत्पादों का मूल्य तय करने का अधिकार बीमा कम्पनियों को दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि वे सभी बीमा उत्पाद जिन्हें IRDA ने विपणन हेतु अपनी स्वीकृति प्रदान की हुई है, को इंश्योरेंस सेल्फ-नेटवर्क प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचा जा सकेगा।

…………………………………………………………

8) भारत में निजी जीवन बीमा कम्पनियों के क्षेत्र में अब तक के हुए सबसे बड़े दृढ़ीकरण (consolidation) में किन दो कम्पनियों का एचडीएफसी स्टैण्डर्ड लाइफ इंश्योरेंस (HDFC Standard Life Insurance) में विलय किया जायेगा, जिसके बारे में 17 जून 2016 को आधिकारिक घोषणा की गई? – मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज

विस्तार: एचडीएफसी स्टैण्डर्ड लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी (HDFC Standard Life Insurance Co.), मैक्स लाइफ इंश्योरेंस (Max Life Insurance Company Ltd.) और मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज (Max Financial Services Ltd.) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड और मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड का विलय एचडीएफसी स्टैण्डर्ड लाइफ इंश्योरेंस में करने के प्रस्तावों को अपनी-अपनी तरफ से मंजूरी प्रदान कर दी है।

इस प्रकार यह भारत में निजी जीवन बीमा कम्पनियों के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा दृढ़ीकरण (consolidation) सौदा हो गया है।

…………………………………………………………

9) केन्द्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment – FDI) के क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव वाली क्या घोषणा 20 जून 2016 को की? – उसने प्रतिरक्षा (Defence) समेत तमाम क्षेत्रों में सरकारी स्वीकृति रूट के तहत 100% FDI की अनुमति प्रदान कर दी

विस्तार: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के क्षेत्र में भारी-भरकम सुधारों की घोषणा करते हुए केन्द्र सरकार ने 20 जून को तमाम क्षेत्रों को 100% FDI के लिए खोल दिया। इसके तहत या तो ऑटोमैटिक रास्ते (automatic route) अथवा सरकारी स्वीकृति (govt. approval) के रास्ते से तमाम क्षेत्रों में 100% तक FDI करना संभव हो गया है।

सरकार द्वारा की गई घोषणा के प्रमुख बिन्दु:

प्रतिरक्षा (Defence):

देश के प्रतिरक्षा क्षेत्र को अब सरकारी स्वीकृति मार्ग से पूरी तरह से FDI के लिए खोल दिया गया है। इसके चलते देश के प्रतिरक्षा क्षेत्र की अत्याधुनिक प्रौद्यौगिकी तक पहुँच संभव हो जायेगी।

प्रसारण क्षेत्र (Broadcasting):

डायरेक्ट-टू-होम (DTH), टेलीपोर्ट, केबल नेटवर्क, मोबाइल टीवी, हेडएण्ड-इन-द-स्काई ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (HITS) में भी 100% FDI की अनुमति प्रदान कर दी गई है।

फार्मा (Pharma):

फार्मा क्षेत्र में 74% FDI की ऑटोमैटिक रूट (automatic route) के तहत अनुमति प्रदान कर दी गई है जबकि ब्राउनफील्ड फार्मा क्षेत्र में शेष 26% FDI के लिए सरकारी स्वीकृति की आवश्यकता होगी। उल्लेखनीय है कि अभी तक ब्राउनफील्ड फार्मा क्षेत्र में समस्त FDI के लिए सरकारी स्वीकृति (govt. approval) आवश्यक थी।

विमानन (Aviation):

अब विमानन क्षेत्र में हवाईअड्डों से सम्बन्धित ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में 100% FDI ऑटोमैटिक रूट के तहत संभव होगी। अभी तक ऑटोमैटिक रूट के तहत इस क्षेत्र में 74% तक FDI की ही अनुमति थी।

ट्रेडिंग (Trading):

केन्द्र सरकार ने ट्रेडिंग में 100% FDI की अनुमति प्रदान कर दी है तथा इसमें भारत में उत्पादित तथा निर्मित खाद्य उत्पादों का ई-कॉमर्स व्यवसाय भी शामिल है।

सिंगल ब्राण्ड रिटेल ट्रेडिंग:

केन्द्र सरकार ने सिंगल ब्राण्ड रिटेल ट्रेडिंग (Single brand retail trading) के क्षेत्र में तीन साल तक स्थानीय स्रोतों से सोर्सिंग के नियम में ढील प्रदान कर दी है। इसके अलावा अत्यंत उच्च प्रौद्यौगिकी वाले उत्पादों के क्षेत्र में सिंगल ब्राण्ड रिटेल ट्रेडिंग में सोर्सिंग के नियम पर ढील को 5 और वर्षों के लिए बढ़ा दिया है।

…………………………………………………………

10) किस राज्य ने देश में अपने प्रकार के पहले “फैट-टैक्स” (Fat Tax) को लागू करने का प्रस्ताव जुलाई 2016 के दौरान रखा जिसमें पिज़्ज़ा, बर्गर, डोनट, आदि जैसे उत्पादों पर 14.5% कर लागू करने का प्रावधान किया गया है? – केरल (Kerala)

विस्तार: केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइज़ेक (Thomas Isaac) ने 7 जुलाई 2016 को राज्य का वर्ष 2016-17 का बजट रखते हुए विवादास्पद “फैट-टैक्स” (Fat Tax) की घोषणा की जिसमें मोटापा बढ़ाने में सहायक माने जाने वाले तथा महंगे इटिंग-ज्वाइंट्स व रेस्टॉरेण्ट में परोसे जाने वाले जंक-फूड पदार्थ जैसे पिज़्ज़ा, बर्गर, हैमबर्गर, डोनट, आदि को अतिरिक्त कर की परिधि में लाया गया है। इन उत्पादों पर 14.5% का अतिरिक्त कर थोंपने का प्रावधान किया गया है।

केरल में पी. विजयन (P.Vijayan) के नेतृत्व में बनी नई LDF सरकार का यह पहला बजट था तथा इस प्रकार इसमें देश में अपनी तरह के अनूठे तथा पहले “फैट-टैक्स” को लगाने की घोषणा की गई।

यहाँ उल्लेखनीय है कि ऐसा कर यूरोप के कुछ देशों जैसे डेनमार्क और हंगरी में लगाया जा चुका है लेकिन विश्लेषकों के अनुसार भारत में ऐसा कर लगाया जाना फिलहाल नीतिसंगत नहीं लग रहा है क्योंकि यहाँ बाहर खाने के बाजार (eating out market) में पिछली छह तिमाहियों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।

…………………………………………………………

| Current Affairs | Banking Awareness | SBI | RRB | SBI | IBPS | Banking | GK | Banking| Hindi Banking Awareness | Banking Awareness 2016 | Banking 2016 | Hindi Banking |


Responses on This Article

© NIRDESHAK. ALL RIGHTS RESERVED.