बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 113

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Editorial Team

12 Aug, 2016

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बैंकिंग जागरूकता,


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Minimum-Balance-20161) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों में बचत खातों (saving accounts) में न्यूनतम बैलेंस (minimum balance) न रखे जाने से सम्बन्धित क्या महत्वपूर्ण दिशानिर्देश 10 मई 2016 को दिया? – उसने कहा कि बचत खातों में बैलेंस शून्य (zero) हो जाने के बाद बैंक खातों पर न्यूनतम बैलेंस रखने से सम्बन्धित शुल्क नहीं लगा सकते हैं

विस्तार: उल्लेखनीय है कि RBI ने वर्ष 2014 के दौरान यह दिशानिर्देश दिया था कि बैंक बचत खातों में न्यूनतम निर्धारित बैलेंस से कम बैलेंस होने की स्थिति में खाताधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए जुर्माना लागू करे।

इसके बाद 1 अप्रैल 2015 से लागू अपने आदेश के अनुसार RBI ने बैंकों को कहा था कि वे ग्राहकों की समस्याओं अथवा उन्हें अपने बैलेंस की उचित जानकारी न होने की स्थिति का अनुचित लाभ न उठाएं। लेकिन तमाम बैंकों ने इस आदेश को अनसूना कर दिया जिसका असर यह हुआ कि बचत खातों में बैलेंस शून्य (zero) हो जाने पर भी बैंक नॉन-मेन्टीनेंस शुल्क वसूलते रहे जिससे तमाम खातों में बैलेंस ऋणात्मक (negative) हो गया।

अब RBI ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि बैंक खातों में बैलेंस शून्य होने पर बैंक जुर्माना नहीं वसूल सकेंगे। और यदि ऐसा होता है तो खाताधारकों को बैकिंग लेखपाल में अपनी शिकायत करने का अधिकार होगा।

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2) सार्वजनिक क्षेत्र के किस बैंक ने 18 मई 2016 को मार्च 2016 में समाप्त हुई तिमाही में 5,367 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा (net loss) घोषित किया, जोकि किसी भारतीय बैंक का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा (largest quarterly loss) है? – पंजाब नेशनल बैंक (PNB)  

विस्तार: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने मार्च 2016 को समाप्त हुई तिमाही का कुल घाटा 5,367 करोड़ रुपए रहने की घोषणा 18 मई 2016 को जारी परिणाम में की। इतने बड़े घाटे का मुख्य कारण खराब ऋण (Bad Debts) की मात्रा में आई अभूतपूर्व वृद्धि है। इस तिमाही के दौरान बैंक का कुल खराब ऋण 55,818 करोड़ रुपए रहा जबकि इससे पहले की तिमाही में यह 34,338 करोड़ रुपए था।

इन खराब ऋणों की भरपाई के लिए बैंक को काफी बड़ी मात्रा में प्रावधान (provision) करना पड़ा जिससे इसका घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। यह भारत के बैंकिंग इतिहास में घोषित अब तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा है।

उल्लेखनीय है कि अब तक सबसे बड़े तिमाही घाटे का रिकॉर्ड बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) के नाम था जिसने दिसम्बर 2015 को समाप्त हुई तिमाही में 3,342 करोड़ रुपए का घाटा अर्जित किया था। वहीं इसी के बैंक के नाम भारतीय बैंकिंग इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा तिमाही घाटा भी दर्ज है – मार्च 2016 को समाप्त हुई तिमाही के दौरान 3,230 करोड़ रुपए।

सर्वाधिक तिमाही घाटे में अगला स्थान आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) का है जिसने दिसम्बर 2015 को समाप्त तिमाही में 2,183 करोड़ रुपए का घाटा अर्जित किया था।

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SBI-Associates-2016

3) भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत भारतीय स्टेट बैंक के 5 सहयोगी बैंकों (associated banks of SBI) ने 17 मई 2016 को अपने मातृ बैंक (SBI) में अपने विलय का प्रस्ताव रख दिया। SBI के ये 5 सहयोगी बैंक कौन से हैं? – a) स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर, b) स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, c) स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, d) स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और e) स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर

विस्तार: SBI के इन 5 सहयोगी बैंकों ने 17 मई 2016 को हुई एक बैठक में अपना विलय SBI में करने का एहम प्रस्ताव रखा। इस बैंकों के निदेशक मण्डलों ने कहा कि वे SBI में अपना विलय करने के इच्छुक हैं। अब SBI के केन्द्रीय बोर्ड (Central Board) को इस मुद्दे पर अपना फैसला लेना होगा।

इस मुद्दे पर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के तमाम जानकारों का भी मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों का विलय करना जरूरी है ताकि इसके चलते बड़े आकार के ऐसे बैंकों को तैयार किया जा सके जो अपने आकार तथा परिचालन में दुनिया के बड़े बैंकों की बराबरी कर सकें।

SBI, जोकि भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक है, अभी भी दुनिया के 50 बड़े बैंकों में शामिल नहीं है। वर्तमान में इसका स्थान 67वाँ ही है। भारतीय अर्थव्यवस्था, जोकि वर्तमान में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्था है, का बैंकिंग क्षेत्र अभी भी काफी छितरा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती संप्रग (UPA) सरकार के काल में SBI के दो सहयोगी बैंकों का विलय SBI में किया गया था। ये दो बैंक थे – स्टेट बैंक ऑफ इंदौर (2010 में विलय) तथा स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र (2008 में विलय)।

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RBS-2016

4) किस बहुराष्ट्रीय बैंक ने अपने भारतीय परिचालन को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह से बंद करने की घोषणा 16 मई 2016 को की? – रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैण्ड (Royal Bank of Scotland)

विस्तार: रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैण्ड (Royal Bank of Scotland) के प्रबन्धन द्वारा 16 मई 2016 को की गई घोषणा के अनुसार बैंक भारत में अपने कॉरपोरेट (corporate), खुदरा (retail) तथा संस्थागत (institutional) बैंकिंग परिचालन को चरणबद्ध तरीके से बंद कर देगा। इस निर्णय के तहत बैंक अपने 10 खुदरा बैंक शाखाओं को बंद कर देगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रॉस मैकईवान (Ross McEwan) द्वारा पिछले साल यह निर्णय लिया गया था कि 38 देशों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा उनका बैंक 13 देशों में परिचालन बंद कर देगा।

रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैण्ड ने पिछले आठ वर्षों के दौरान अपनी लागत को कम करने की कोशिशों को जारी रखा है क्योंकि 2008 के अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संकट के चलते बैंक की वित्तीय स्थिति डांवाडोल होने के कारण ब्रिटिश सरकार द्वारा दिए गए बेल-आउट पैकेज की शर्तों को पूरा करने के लिए ऐसा करना अनिवार्य है।

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5) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा ऑफ-लाइन लेन-देन (offline transactions) के लिए मई 2016 के दौरान लाँच किए गई नई कार्ड-लेस भुगतान सुविधा (card-less payment solution) का नाम क्या है? – एमवीज़ा (mVisa)

विस्तार: भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मई 2016 के दौरान अपनी नई मोबाइल भुगतान सुविधा शुरू की जिसके द्वारा उसके ग्राहक अपने स्मार्ट-फोन पर मात्र एक क्यूआर कोड (QR (quick response) code) को स्कैन कर ऑफलाइन भुगतान वाली दूकानों पर बिना कार्ड के भुगतान कर सकेंगे।

इस सुविधा को “एमवीज़ा” (mVisa) नाम दिया गया है तथा इसका लाभ SBI के समस्त क्रेडिट कार्ड धारक, डेबिट कार्ड धारक व नेट बैंकिंग ग्राहक ले सकेंगे। इसमें बिना किसी कार्ड के भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस सुविधा को SBI के एनीव्येर नामक एप्प (SBI Anywhere app) की मदद से इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इस सुविधा के तहत किसी लेन-देन की शुरूआत व्यवसायी भी कर सकेंगे तथा इसके लिए उन्हें SBI के एमवीज़ा मर्चेन्ट एप्प (SBI mVisa merchant app) का इस्तेमाल करना होगा। लेन-देन को शुरू करने के लिए उनके द्वारा प्राप्त क्यूआर कोड (QR code) को ग्राहक द्वारा स्कैन करना होगा तथा स्कैन के सफल होने पर यह लेन-देन पूरा हो जायेगा। यह सुविधा पूरी तरह से कार्ड-विहीन (cardless) है तथा ग्राहकों के लिहाज से काफी सुरक्षित भी है क्योंकि इसमें ग्राहकों को लेन-देन के दौरान अपने कार्ड के किसी प्रकार के विवरण को किसी को देने की जरूरत नहीं पड़ती है।

इस सुविधा को सबसे पहले बेंगलूरु में तमाम मर्चेन्ट्स के पास उपलब्ध कराया गया है तथा इसे जल्द ही देश के अन्य शहरों में विस्तारित किया जायेगा।

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6) राज्य सभा (Rajya Sabha) ने 11 मई 2016 को दीवालिया तथा दीवालियापन संहिता 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code 2016) को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। इससे भारत में व्यवसाय करने की स्थितियां आसान होने की संभावना है। उक्त संहिता के सर्वप्रमुख लाभ क्या होंगे? – इससे दीवालियापन से सम्बन्धित मामलों के जल्दी निपटारे, घाटे में डूबे व्यवसायों को जल्द बंद करने तथा बड़े बकायेदारों का डेटाबेस तैयार होने की संभावना है

विस्तार: 11 मई 2016 को राज्य सभा द्वारा पारित दीवालिया तथा दीवालियापन विधेयक 2016 को कुछ ही दिन पूर्व लोकसभा ने पारित किया है। अब राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत किए जाने के बाद यह एक कानून बन जायेगा।

उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक (World Bank) के आंकड़ों के अनुसार दीवालियापन सम्बन्धित मामलों के निपटारे में भारत का स्थान दुनिया भर के 189 देशों में 136वाँ है। यहाँ किसी व्यवसाय को दीवालिया (Bankrupt) घोषित किए जाने के बाद उसे बंद करने में औसतन लगभग 4 वर्ष का समय लगता है। इस नए कानून (दीवालियापन संहिता) के लागू होने के बाद यह समय घटकर मात्र एक वर्ष जाने की संभावना व्यक्त की गई है।

इस विधेयक में दीवालियापन सम्बन्धित मामलों के निपटारे के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित करने का प्रावधान किया गया है जो बीमार कम्पनियों की मदद करेंगे। इसके अलावा भारतीय दीवालिया तथा दीवालियापन बोर्ड (Insolvency and Bankruptcy Board of India) गठित करने का भी उल्लेख इसमें है जोकि इस विषय से सम्बन्धित नियामक संस्था होगी।

यह नई दीवालियापन संहिता वर्तमान कानूनों का स्थान लेने के साथ कम्पनी कानून समेत तमाम कानूनों में संशोधन करेगी। इसमें अधिकार क्षेत्र में व्यक्ति, कम्पनियां, सीमित देयता वाली साझेदारी फर्म तथा अन्य साझेदारी फर्म आयेंगी।

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7) किस प्रमुख उद्योगपति ने RBI द्वारा प्रदत्त पेमेण्ट्स बैंक (Payments Bank) के लाइसेंस को वापस करने की घोषणा मई 2016 के दौरान की? – दिलीप सिंघवी (Dilip Shanghvi)

विस्तार: दिग्गज फार्मा कम्पनी सन फार्मास्यूटिकल्स (Sun Pharmaceutical Industries Ltd.) के संस्थापक तथा अध्यक्ष दिलीप सिंघवी (Dilip Shanghvi) को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश में पेमेण्ट्स बैंक (Payments Bank) खोलने के लिए अपनी सैद्धांतिक अनुमति पिछले वर्ष प्रदान की थी। उन्हें यह अनुमति उनकी निजी क्षमता के लिए प्रदान की गई थी तथा इससे उनकी कम्पनी का कोई सम्बन्ध नहीं था। उन्होंने पेमेण्ट्स बैंक के लिए टेलेनॉर फाइनेंशियल सर्विसेज (Telenor Financial Services) तथा आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank) के साथ करार भी किया था।

लेकिन 20 मई 2016 को उन्होंने घोषणा की कि वे अपना पेमेण्ट्स बैंक लाइसेंस RBI को वापस कर रहे हैं। इस नए घटनाक्रम की जानकारी देते हुए इस प्रस्तावित उपक्रम में शामिल उनके सहयोगी भी शामिल थे।

पेमेण्ट्स बैंक का लाइसेंस वापस कर दिलीप सिंघवी इस लाइसेंस को वापस करने वाले दूसरे व्यक्ति/उपक्रम बन गए हैं। इससे पहले चोलामण्डलम इन्वेस्टमेण्ट एण्ड फाइनेंस क. (Cholamandalam Investment and Finance Co.) ने भी RBI द्वारा प्रदत्त यह लाइसेंस वापस करने की घोषणा की थी।

उल्लेखनीय है कि RBI ने वर्ष 2015 में कुल 11 उपक्रमों/व्यक्तियों को पेमेण्ट्स बैंक के नाम से पुकारे जाने वाले बैंक को खोलने का सैद्धांतिक लाइसेंस प्रदान किया था।

पेमेण्ट्स बैंक के द्वारा ऐसे क्षेत्रों में मूलभूत बचत खाता, जमा, भुगतान, आदि सेवाएं प्रदान करने की व्यवस्था की जायेगी जहाँ औपचारिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

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8) सऊदी अरब (Saudi Arabia) के इस्लामिक डेवलपमेण्ट बैंक (Islamic Development Bank – IDB) द्वारा की गई घोषणा के अनुसार यह बैंक भारत के किस राज्य में इस्लामिक पद्धति की बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए अपनी पहली शाखा जल्द ही खोलेगा? – गुजरात

विस्तार: इस्लामिक डेवलपमेण्ट बैंक (IDB) जल्द ही गुजरात (Gujarat) में अपनी शाखा खोलेगा जो देश में इस्लामिक बैंकिंग पद्धति पर संचालित इस बैंक की पहली शाखा होगी।

माना जा रहा है कि बैंक की इस पहली शाखा से इस्लामिक वित्तीय व्यवस्था का अनुसरण करने वाले उपक्रमों तथा नवोदित व्यवसायों को तमाम एशियाई तथा अफ्रीकी मुस्लिम देशों में अपनी गतिविधियों के संचालन में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि इस्लामिक बैंकिंग एक विशिष्ट बैंकिंग पद्धति है जिसमें इस्लामिक रिवायतों का ध्यान रखते हुए ब्याज (interest) के निर्वाह पर प्रतिबन्ध रखा जाता है।

इस्लामिक डेवलपमेण्ट बैंक के भारतीय उपक्रम की अगुवाई गुजरात के मुस्लिम उद्यमी ज़फर सरेशवाला (Zafar Sareshwala) करेंगे जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से निकटता के लिए जाना जाता है।

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9) वह कौन सा बैंक ने जिसने 6 जून 2016 को देश के पहले प्रमाणित ग्रीन बाण्ड (certified Green Bond) को लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) में जारी कर 500 मिलियन डॉलर की राशि हासिल की है? – एक्सिस बैंक (Axis Bank)

विस्तार: देश के निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक – एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने 6 जून 2016 को लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) पर प्रमाणित ग्रीन बाण्ड (certified Green Bond) को जारी किया जिसके द्वारा हासिल राशि का उपयोग जलवायु परिवर्तन सम्बन्धित समस्याओं को हल करने के लिए वित्त-पोषण के लिए किया जायेगा। इस बाण्ड निर्गम द्वारा बैंक ने कुल 500 मिलियन डॉलर की राशि हासिल की।

इस ग्रीन बाण्ड को क्लाइमेट बॉण्ड्स स्टैण्डर्ड बोर्ड (Climate Bonds Standards Board – CBSB) द्वारा प्रमाणित किया गया है।

इस बाण्ड से हासिल इस राशि का उपयोग हरित ऊर्जा, वैकल्पिक यातायात साधनों के विकास तथा सम्बन्धित हरित प्रौद्यौगिकियों के वित्त-पोषण के लिए किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि भारत ने वर्ष 2022 तक 1,75,000 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हरित तकनीकों द्वारा करने का महात्वाकांक्षी लक्ष्य बनाया है तथा एक्सिस बैंक का यह हरित बाण्ड निर्गम इसी संकल्पना को पुष्ट करता है।

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10) भारतीय मुद्रा रुपए के पहले बड़े अवमूल्यन (Depreciation) को करने की घटना के कितने वर्ष 6 जून 2016 को पूरे हो गए? – 50 वर्ष

विस्तार: ठीक पचास वर्ष पूर्व 6 जून 1966 को भारतीय मुद्रा रुपए (Indian Rupee) की कीमत में एक बड़ा अवमूल्यन (Depreciation) कर देश की भुगतान संतुलन की खस्ताहाल स्थिति से उबरने की कोशिश की गई थी। 1947 में स्वतंत्र होने के बाद 1950 तथा 1960 के दशकों के दौरान भारत का व्यापार घाटा तेजी से बढ़ा था। तब भारत को सिर्फ धनी देशों से मिलने वाली विदेशी सहायता का सहारा था।

1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद स्थितियाँ और कठिन हो गईं। सशस्त्र सेनाओं पर किए गए भारी खर्च के कारण भारत सरकार की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल हो गई थी।

सरकार के पास मौजूद उपाय बेहद सीमिति थे तथा इसको देखकर तत्कालीन इंदिरा गाँधी सरकार ने रुपए के मूल्य में अवमूल्यन का फैसला लिया, जिसके कारण उसे घोर भर्त्सना भी झेलनी पड़ी थी।

इस अवमूल्यन के चलते डॉलर के परिप्रेक्ष्य में भारतीय रुपए की कीमत 4.76 रुपए प्रति डॉलर से घट कर 7.50 रुपए प्रति डॉलर हो गई थी, यानि रुपए का प्रभावी अवमूल्यन 57% किया गया था।

उल्लेखनीय है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपने दस्तावेजों में 6 जून 1966 को किए गए अवमूल्यन को दूसरे अवमूल्यन के रूप में दर्ज किया हुआ है। पहला अवमूल्यन 18 सितम्बर 1949 को माना गया था जब पाउण्ड (British Pound) की कीमत में अवमूल्यन के चलते रुपए की कीमत भी घटाई गई थी। यह वह दौर था जब रुपए का डॉलर के बजाए ब्रिटिश पाउण्ड के परिप्रेक्ष्य में विनिमय (exchange) किया जाता था।

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