बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 111

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Editorial Team

17 Jun, 2016

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बैंकिंग जागरूकता,


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UPI-NPCI-2016

1) भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India Ltd – NPCI) द्वारा 11 अप्रैल 2016 को शुरू की गई उस नई पेमेण्ट इंटरफेस (payment interface) का क्या नाम है जिसके द्वारा देश में मोबाइल द्वारा किए जाने वाले लेन-देन में आमूलचूल बदलाव लाने की कोशिश की गई है? – यूनीफाइड पेमेण्ट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface – UPI)

विस्तार: यूनीफाइड पेमेण्ट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface – UPI) उस क्रांतिकारी भुगतान इंटरफेस का नाम है जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 11 अप्रैल 2016 से शुरू कर दिया।

UPI की खास बात यह होगी कि इसके चलते प्रयोगकर्ता अपने फोन का इस्तेमाल एक प्राथमिक भुगतान उपकरण के तौर पर कर सकेंगे तथा ऐसा करने के लिए उन्हें अलग मोबाइल वॉलेट डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसका अर्थ हुआ कि UPI के चलते भुगतान करने अथवा प्राप्त करने के लिए अथवा धन के हस्तांतरण के लिए सिर्फ टेक्स्ट-आधारित संदेशों का इस्तेमाल करना होगा।

इमीडिएट पेमेण्ट्स सर्विस (Immediate Payments Service – IMPS) में जहाँ सिर्फ धन भेजने की सुविधा थी, वहीं UPI से धन को भेजने के अलवा प्राप्त भी किया जा सकेगा। इसके अलवा इसमें भुगतान सम्बन्धी रिक्वेश्ट्स (requests) को भेजा भी जा सकेगा।

UPI की एक और खास बात यह होगी कि यह विभिन्न बैंकों के प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल किए जाने में सक्षम होगा तथा इन प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर तुरंत भुगतान करने में सक्षम होगा। 11 अप्रैल को इसको शुरू किए जाने के दिन से इसके साथ 29 बैंकों ने जुड़ाव कर लिया है तथा वे अपने ग्राहकों को मोबाइल-आधारित लेन-देन के लिए इसकी सुविधा अपने प्लेटफॉर्म पर प्रदान करेंगे।

माना जा रहा है कि के शुरू होने से देश के सूक्ष्म-भुगतान (micro-payment) परिदृश्य में भारी बदलाव आ जायेगा तथा मोबाइल वॉलेट्स पर निर्भरता समाप्त हो जायेगी।

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2) केन्द्र सरकार ने भारत में व्यवसाय करने को आसान बनाने से सम्बन्धित कदम के तहत कैटेगरी 1 के बैंकों के बारे में क्या घोषणा 12 अप्रैल 2016 को की? – उसने इन बैंकों को किसी विदेशी उपक्रम की नई शाखा खोलने की शक्ति प्रदान कर दी

विस्तार: उल्लेखनीय है कि कैटेगरी 1 (Category-I) के प्राधिकृत डीलर बैंक (Authorised Dealer Banks), जिन्हें विदेशी मुद्रा (forex) का लेन-देन करने का अधिकार होता है, को अब यह अधिकार दे दिया गया है कि वे किसी विदेशी कम्पनी अथवा उपक्रम की देश में खुलने वाली नई शाखा को खोलने की अनुमति प्रदान कर सके।

इसके अलावा ऐसा कोई उपक्रम जिसे सरकार की किसी संस्था अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के किसी उपक्रम ने किसी परियोजना से सम्बन्धित कोई ठेका प्रदान किया है को देश में अपना बैंक खाता खोलने की अनुमति स्वत: मिल जायेगी।

हालांकि इस व्यवस्था को कुछ संवेदनशील क्षेत्रों जैसे प्रतिरक्षा, दूरसंचार, निजी सुरक्षा, सूचना प्रसारण क्षेत्र व गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए नहीं उपलब्ध कराया जायेगा।

इस घोषणा को कर केन्द्र सरकार ने देश की स्थितियों को व्यवसाय करने के लिए आसान बनाने (improve the ease of doing business in India) की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।

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3) कौन सा देश अप्रैल 2016 के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक (World Bank) का 189वाँ तथा नवीनतम सदस्य बना? – नौरू (Nauru)

विस्तार: दक्षिण प्रशांत महासागर का मात्र 21 वर्ग किलोमीटर वर्ग क्षेत्र का छोटा सा देश नौरू (Nauru) 12 अप्रैल 2016 को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund – IMF) तथा विश्व बैंक (World Bank) का औपचारिक सदस्य बन गया। इस प्रकार वह इन वैश्विक वित्तीय संस्थाओं का सदस्य बनने वाला 189वाँ तथा नवीनतम सदस्य बन गया।

नौरू से पहले इन संस्थाओं का नवीनतम सदस्य देश अफ्रीका का देश दक्षिण सूडान (South Sudan) था जिसे अप्रैल 2012 में यह सदस्यता हासिल हुई थी।

नौरू ने वाशिंग्टन में मुख्यालय वाली इन दोनों संस्थाओं का सदस्य बनने की गुजारिश अप्रैल 2014 में की थी। इससे पूर्व 1996 में यह देश संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) का सदस्य बना था तथा यह सदस्यता हासिल करने वाला दुनिया का सबसे छोटा देश था।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सदस्यता हासिल करने से नौरू को अपने सरकारी कोष तथा मौद्रिक नीति का प्रबन्धन करने के लिए तमाम विशेषज्ञ सलाह मिल सकेंगी। वहीं विश्व बैंक का सदस्य मिलने से नौरू को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहायता, तकनीकी सहायता तथा प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों जैसे बढ़ते समुद्र स्तर, जल प्रबन्धन, आदि का सामना करने के बारे में विशेष सलाह हासिल हो सकेगी।

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NDB-2015

4) 5 बड़े विकासशील ब्रिक्स (BRICS) देशों के लिए गठित न्यू डेवलपमेण्ट बैंक (New Development Bank – NDB) ने चार सदस्य देशों – ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका और भारत की चार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं (renewable energy projects) के लिए कुल 811 मिलियन डॉलर का ऋण प्रदान करने की घोषणा की है जोकि इस बैंक द्वारा प्रदत्त पहले ऋण होंगे। इसमें से भारत को 250 मिलियन ($250 million) का ऋण प्रदान किया गया है। भारत के लिए प्रदत्त यह ऋण किस भारतीय बैंक के मार्फत प्रदान किया गया है? – कैनरा बैंक

विस्तार: न्यू डेवलपमेण्ट बैंक (NDB) ने अपना संचालन शुरू करने के बाद प्रदान किए गए पहले ऋण के तहत चार सदस्य देशों को कुल 811 मिलियन डॉलर का ऋण उनकी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना (renewable energy projects) के लिए प्रदान किया है। इसी के अंतर्गत भारत को प्रदान किया गया ऋण सार्वजनिक क्षेत्र के कैनरा बैंक को प्रदान किया गया है। कैनरा बैंक को दिया गया यह ऋण 250 मिलियन डॉलर ($250 million) का है।

इसके अलावा ब्राज़ील के एक बैंक, चीन की एक ऊर्जा कम्पनी तथा दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी विद्युत कम्पनी (Eskom) को भी NDB ने ऋण प्रदान किया है।

उल्लेखनीय है कि इस चार देशों – ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका और भारत के अलावा रूस इस बैंक के पाँच संस्थापकों में शामिल है।

इस प्रथम ऋण को कई चरणों में प्रदान कर NDB इन देशों में कुल 2,370 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में अपना सहयोग प्रदान करना चाहता है। इन परियोजनाओं से एक वर्ष में लगभग 40 लाख टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होने की संभावना है।

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RBI-New-2015

5) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वर्ष 2016-17 की पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (First bi-monthly Monetary Policy Review) 5 अप्रैल 2016 को प्रस्तुत की। RBI के गवर्नर रघुराम राजन द्वारा प्रस्तुत इस समीक्षा का सर्वप्रमुख बिन्दु क्या रहा? – रेपो दर (Repo Rate) को 25 आधार अंक घटा दिया गया

विस्तार: रेपो दर (अथवा रीपरचेज़ दर) वह दर होती है जिसपर RBI वाणिज्यिक बैंकों को लघु-अवधि के ऋण प्रदान करता है। इस दर को देश में ब्याज दर तय करने में महत्वपूर्ण माना जाता है। अभी तक यह दर 6.75% थी लेकिन 5 अप्रैल 2016 को प्रस्तुत द्वि-मासिक मौद्रिक समीक्षा में इसे 25 आधार अंक घटा कर 6.50% कर दिया गया।

6.50% के स्तर पर मार्च 2011 के बाद रेपो दर का अब तक का न्यूनतम स्तर है। वहीं रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate) को 6% कर दिया गया जिसके चलते रेपो दर तथा रिवर्स रेपो दर के बीच विद्यमान अंतर मात्र 50 आधार अंक रह गया। उल्लेखनीय है कि रिवर्स रेपो दर वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपने अतिरिक्त जमा को RBI में रखते है।

मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (marginal standing facility (MSF) दर को 7.0% के स्तर पर रखा गया तथा इससे सम्बद्ध बैंक दर (Bank Rate) भी 7.0 के स्तर पर पहुँच गई।

वहीं RBI ने कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) के न्यूनतम दैनिक स्तर को 95% से घटाकर 90% कर दिया। यह परिवर्तन 16 अप्रैल 2016 से प्रभावी बनाया गया है। लेकिन कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) को 4% के स्तर पर यथावत रखा गया है।

RBI ने मार्च 2017 तक उपभोक्ता-आधारित मुद्रास्फीति (consumer price inflation) की दर को 5% के स्तर पर रहने का अनुमान लगाया है जबकि वर्ष 2016-17 के दौरान अर्थव्यवस्था की रफ्तार 7.6% रहने का अनुमान लगाया गया है।

उल्लेखनीय है कि मौद्रिक नीति में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली रेपो दर में कमी करने का अनुमान तमाम विशेषज्ञों ने लगाया था हालांकि कटौती के स्तर को लेकर सब अपनी-अपनी राय दे रहे थे। रेपो दर में इस कटौती से यह भी स्पष्ट हो गया कि RBI केन्द्र सरकार की संतुलित राजकोषीय नीति का समर्थन करता है।

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6) कौन सी कम्पनी देश के म्यूचुअल फण्ड क्षेत्र (Mutual Fund sector) में प्रवेश करने वाली नवीनतम कम्पनी बन गई है जब इस कम्पनी ने अप्रैल 2016 के दौरान अपनी प्रस्तावित चार म्यूचुअल फण्ड योजनाओं के बारे में SEBI को जानकारी प्रदान की? – महिन्द्रा एसेट मैनेजमेण्ट कम्पनी (Mahindra Asset Management Company – Mahindra AMC)

विस्तार: महिन्द्रा एसेट मैनेजमेण्ट कम्पनी देश के दिग्गज औद्यौगिक समूह महिन्द्रा की कम्पनी महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा फाइनेंशियल सर्विसेज (Mahindra and Mahindra Financial Services) की पूर्ण स्वामित्व वाली कम्पनी है। यह भारत के म्यूचुअल फण्ड क्षेत्र में प्रवेश करने वाली नवीनतम कम्पनी हो गई है। उल्लेखनीय है कि इस कम्पनी को म्यूचुअल फण्ड क्षेत्र में कार्य करने के लिए आवश्यक अनुमति देश के पूँजी बाजार की नियामक संस्था SEBI से फरवरी 2016 के दौरान मिली थी।

8 अप्रैल 2016 को महिन्द्रा एसेट मैनेजमेण्ट कम्पनी (Mahindra AMC) ने जानकारी दी कि उसने अपने उत्पादों तथा विपणन टीम को तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। यह कम्पनी देश के ग्रामीण तथा अर्द्ध-शहरी इलाकों में म्यूचुअल फण्ड उत्पादों को बेचने पर जोर देगी जहाँ इसकी मातृ कम्पनी महिन्द्रा फाइनेंस की उपस्थिति काफी मजबूत है।

SEBI में दायर दस्तावेजों में Mahindra AMC कम से कम चार म्यूचुअल फण्ड योजनाओं से अपना काम शुरू करेगी। इन चार योजनाओं के नाम हैं – महिन्द्रा MF बचत योजना, महिन्द्रा MF कर बचत योजना, महिन्द्रा MF बाल विकास योजना और महिन्द्रा MF लिक्विड फण्ड।

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7) किस निजी क्षेत्र के बैंक ने अप्रैल 2016 के दौरान देश की अपनी तरह की पहली आधार-आधारित एटीएम प्रयोग सुविधा (Aadhaar-based ATM usage facility) प्रदान की है जिसके तहत ग्राहक एक परंपरागत बैंक पिन (PIN) के बजाय अपनी बायोमीट्रिक जानकारी प्रदान कर ATM सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे? – डीसीबी बैंक (DCB Bank)

विस्तार: डीसीबी बैंक (DCB Bank) छोटे आकार का एक निजी क्षेत्र का अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक है जिसकी उपस्थिति देश के 17 राज्यों तथा 2 केन्द्र शासित प्रदेशों में है। इस बैंक ने अप्रैल 2016 के दौरान देश की अपनी तरह की पहली आधार-आधारित एटीएम सेवाओं की शुरुआत की।

इस सुविधा के तहत एटीएम में किसी लेन-देने के लिए ग्राहक को एटीएम मशीन में अपना 12-अंकीय आधार नम्बर प्रदान करना होगा अथवा अपने कार्ड को स्वाइप कर इस लेन-देन को शुरू करना होगा लेकिन पहचान को कन्फर्म करने के लिए अपनी बायोमीट्रिक जानकारी प्रदान करनी होगी।

इस सुविधा को प्राप्त करने के लिए ग्राहकों को अपने खाते को आधार से जोड़ना पड़ेगा। इस सुविधा को डीसीबी बैंक से स्वयं तैयार किया है तथा इसमें आधार के सर्वर को बैंक के सर्वर से जोड़ कर ग्राहक की आधार-सम्बन्धी पहचान को वैरीफाई करने की व्यवस्था की गई है।

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8) 25 मार्च 2016 को अपना संचालन शुरू कर कौन सा स्टॉक एक्सचेंज (stock exchange) एशिया का सबसे नया स्टॉक एक्सचेंज बन गया? – येंगोन स्टॉक एक्सचेंज (म्यांमार)

विस्तार: येंगोन स्टॉक एक्सचेंज (Yangon Stock Exchange – YSE) ने अपना संचालन 25 मार्च 2016 से शुरू कर दिया तथा इस दिन से यहाँ ट्रेडिंग का कार्य विधिवत शुरू कर दिया गया। यहाँ आईपीओ (IPO) लाने वाली पहली कम्पनी फर्स्ट म्यांमार इन्वेस्टमेण्ट (First Myanmar Investment – FMI) बन गई जोकि देश की सबसे बड़ी कम्पनियों में से एक है। इसके बाद कई अन्य बड़ी कम्पनियों के IPO इस नए स्टॉक एक्सचेंज में प्रस्तावित हैं।

YSE की स्थापना अक्टूबर 2015 के दौरान म्यांमार की सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी म्यांमा इकोनॉमिक बैंक (Myanma Economic Bank) तथा जापान की दो कम्पनियों ने संयुक्त उपक्रम (joint venture) के तौर पर किया था।

उल्लेखनीय है कि देश में पिछले 50 वर्षों से कोई स्टॉक एक्सचेंज नहीं है। पिछली आधी सदी के दौरान सैन्य नियंत्रण वाली सरकार ने म्यांमार की अर्थव्यवस्था को लगभग चौपट कर दिया है। इस सरकार का अंत 2011 में हुआ जब एक अर्द्ध-सैन्य सरकार ने देश की कमान अपने हाथों में ली।

इस अर्द्ध-सैन्य सरकार (semi-civilian government) ने तमाम आर्थिक सुधारों को शुरू किया तथा स्टॉक एक्सचेंज को शुरू करना इन्हीं सुधारों में से एक है। इसी के तहत एशिया के इस नवीनतम येंगोन स्टॉक एक्सचेंज (YSE) की स्थापना की गई।

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9) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रैल 2016 को कृषि उत्पादों की ट्रेडिंग के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल को लाँच किया जिसके द्वारा किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर बाजार मूल्य तथा बिचौलियों के शोषण से मुक्ति मिलने की आशा है। इस महात्वाकांक्षी पोर्टल का नाम क्या है? – नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट पोर्टल (National Agriculture Market portal – e-NAM)

विस्तार: कृषि उत्पादों से सम्बन्धित इस ऑनलाइन पोर्टल (e-NAM) की स्थापना का मुख्य लक्ष्य उत्पादकों /विक्रेताओं में उत्पादों के बाजार मूल्य के बारे में अनभिज्ञता को समाप्त कर मूल्यों को अधिकाधिक पारदर्शी बनाना है। कुल मिलाकर इसके द्वारा किसानों को सही बाजार मूल्य प्रदान कर लाभान्वित करने का खाका तैयार किया गया है।

e-NAM के तहत किसान पोर्टल पर उन उत्पादों को सूचीबद्ध कर सकेंगे जिन्हें वे बेचना चाहते हैं। उनके उत्पादों को खरीदने के लिए स्थानीय व्यापारियों के अलावा दूसरे राज्य के व्यापारी भी अपनी बोली (bids) लगा सकेंगे तथा किसानों को बोली का चुनाव करने की स्वतंत्रता होगी।

इस पोर्टल की सुविधा प्रारंभ में देश के आठ राज्यों में शुरू की गई है – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान तथा हरियाणा तथा इसके माध्यम से 21 विभिन्न थोक मण्डियों में कुल 25 उत्पाद बेचे जा सकेंगे।

उत्पाद जिन्हें शुरू में इस पोर्टल के द्वारा बेचा जा सकेगा, हैं – काला चना, अरण्डी के बीज, धान, गेहूँ, मक्का, हल्दी, प्याज, सरसों, महुआ के फूल, इमली तथा मटर।

उल्लेखनीय है कि कृषि मंत्रालय का लक्ष्य है कि मार्च 2018 तक देश के 585 संगठित बाजारों को e-NAM प्लेटफॉर्म पर लाया जाए। इसमें से 200 के सितम्बर 2016 तक, 200 के मार्च 2017 तक तथा शेष 185 के मार्च 2018 तक जुड़ने की संभावना है।

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10) कौन सा राज्य भारत का ऐसा पहला राज्य बन गया जिसने अपने यहाँ भूमि के स्वामित्व तथा सम्पदा के मालिकाना हक (title) के लिए विधिवत गारण्टी देने सम्बन्धी एक ऐतिहासिक कानून अप्रैल 2016 के दौरान पारित कर दिया? – राजस्थान (Rajasthan)

विस्तार: वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार (Rajasthan Govt.) ने राजस्थान शहरी भूमि (मालिकाना हक प्रमाणन) विधेयक, 2016 (Rajasthan Urban Land (Certification Of Titles) Bill, 2016) को विधानसभा में अप्रैल 2016 के दौरान ध्वनि-मत से पारित करा कर देश में एक नया इतिहास रच दिया। इस विधेयक के पारित होने से राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ भूमि के मालिकाना हक के लिए भू-स्वामि को बाकायदा प्रमाण-पत्र अथवा तत्सम्बन्धी दस्तावेज मिलेगा। इसका अर्थ हुआ कि राज्य सरकार भूमि के स्वामियों को भूस्वामित्व की गारण्टी प्रदान करेगी।

उल्लेखनीय है कि देश में अभी तक भूमि के स्वामित्व के बारे में भूस्वामियों के पास मौजूद एकमात्र दस्तावेज भूमि को बेचने वाले तथा खरीदने वाले के बीच हुए सौदे की रजिस्ट्री अथवा सम्पत्ति के लिए जमा किए जाने वाली तमाम तरह के करों (taxes) की रसीदें (receipts) होती हैं। लेकिन इन रजिस्ट्रियों को बहुधा न्यायालय में चुनौती दी जाती है तथा कई बार एक सम्पत्ति के एवज में कई रजिस्ट्रियाँ दिखा कर सालों-साल मुकदमे लड़े जाते हैं। इसके चलते भूमि के सही मालिक को प्रताड़ना तो होती ही है लेकिन इससे तमाम परियोजनाओं और निवेशों के अटकने का खतरा पैदा हो जाता है।

राजस्थान सरकार द्वारा पारित इस नए विधेयक से अब भूस्वामियों के स्वामित्व को प्रमाणित कर ऐसे विवादों पर लगाम जा सकेगी। इससे भूस्वामियों तथा उनसे आगे सौदा करने वालों में पारदर्शिता काफी बढ़ जायेगी।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि भूस्वामित्व के बारे में कानूनों में सुधार की मांग देश में निवेश करने वाली विदेशी कम्पनियाँ काफी समय से करती आई हैं तथा अब राजस्थान ने इस मामले में पहल की है।

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