बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 106

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Editorial Team

11 Feb, 2016

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बैंकिंग जागरूकता,


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RBI-New-2015

1) देश में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने के लिए RBI द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट 28 दिसम्बर 2015 को जारी कर दी। इसमें वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया को बल देने के लिए तमाम सिफारिशें की गईं है। इस समिति की अध्यक्षता किसने की? – दीपक मोहंती (कार्यकारी निदेशक, आरबीआई)

विस्तार: RBI ने इस समिति का गठन जुलाई 2015 के दौरान किया था तथा इसका शीर्षक था “वित्तीय समावेशन पर मध्यम-कालिक मार्ग” (‘Medium-Term path on Financial Inclusion’)। इसकी अध्यक्षता RBI के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) दीपक मोहंती (Deepak Mohanty) को सौंपी गई थी।

दीपक मोहंती समिति की प्रमुख सिफारिशें:

– बैंकों को महिलाओं के खाते खोलने के लिए और तत्परता दिखानी होगी

– महिलाओं में वित्तीय समावेशन को बल देने के लिए केन्द्र सरकार को “सुकन्या शिक्षा” (Sukanya Shiksha) नामक कल्याणकारी योजना को अपनाना चाहिए जिसमें वित्त पोषण केन्द्र तथा राज्य दोनों सरकारों द्वारा किया जाय।

– सरकार से व्यक्तियों को धन हस्तांतरण (Government-to-Person – G2P) के ढांचे को मजबूत करने के लिए मोबाइल बैंकिंग सुविधा को और अधिक कार्यकुशल बनाया जाय

– प्रत्येक व्यक्तिगत बैंक खाते को आधार (Aadhaar) जैसी बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली से जोड़ा जाय तथा इससे सम्बन्धित जानकारी को क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कम्पनियों के साथ साझा किया जाय

– इस्लामिक बैंकिंग जैसे उपागमों को बढ़ावा देने के लिए विशेषीकृत ब्याज-रहित खातों (specialised interest-free windows) व बैंकिंग उत्पादों को शुरू किया जाय

– भूमि रिकॉर्डों (land records) के डिज़िटलीकरण की प्रक्रिया को मजबूत कर तमाम कृषि क्षेत्रों को औपचारिक वित्तीय सहायता से अधिक तत्परता से जोड़ा जाय

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2) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 17 दिसम्बर 2015 को सभी बैंकों को अपने लेंडिंग दरों (lending rates) की समीक्षा नियमित रूप से करने तथा अगले साल से प्रभाव में लाई जा रही नई लेंडिंग रेट व्यवस्था (New lending rate regime) के मद्देनज़र ऋण हासिल करने के मूल्य (cost of borrowing) पर निगाह रखने की हिदायत जारी की। लेंडिंग रेट्स की यह नई व्यवस्था किस तिथि से लागू कर दी जायेगी? – 1 अप्रैल 2016 से

विस्तार: इस नई लेंडिंग रेट प्रणाली को “फण्ड्स की सीमांत लागत-आधारित लेंडिंग रेट” (‘Marginal Cost of Funds-based Lending Rate’) का नाम दिया गया है तथा इसे 1 अप्रैल 2016 से प्रभाव में लाया जायेगा। इस नई प्रणाली में लेंडिंग रेट्स को वर्तमान में प्रयोग में लाई जा रही फण्ड्स की औसत लागत व्यवस्था (average cost of funds system) के बजाय बैंकों को ऋण हासिल करने के दौरान लगने वाली सीमांत लागत (banks’ marginal cost of borrowing) के आधार पर तय किया जायेगा।

– इस नई व्यवस्था को इसलिए लागू किया जा रहा है ताकि बैंकों पर ब्याज दरों में आ रही कमी का लाभ अपने ग्राहकों को पहुँचाने के लिए दबाव डाला जा सके। उल्लेखनीय है कि RBI ने जनवरी 2015 से रेपो दर (Repo Rates) में कुल 125 आधार अंकों की कमी की है लेकिन बैंकों ने अपने लेंडिंग रेट्स में मात्र 60 आधार-अंकों की कमी कर अपने ग्राहकों को इसका समुचित लाभ प्रदान नहीं किया है।

– वहीं जमा दरों (deposit rates) में 100 से अधिक आधार अंकों की कमी कर दी गई है जिसका अर्थ हुआ कि ग्राहकों के लिए बैंकों में धन जमा करना कम लाभकारी हो गया है जबकि उनके द्वारा लिए गए ऋण के लिए उन्हें ब्याज में कमी का बहुत कम लाभ मिल पाया है।

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Currency-Notes-2015

3) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2005 से पहले के करेंसी नोटों को बदल कर इसके स्थान पर नए नोट लेने के लिए तय समयसीमा को 23 दिसम्बर 2015 को एक बार फिर बढ़ा दिया। अब यह नई समयसीमा क्या तय की गई है? – 30 जून 2016

विस्तार: वर्ष 2005 से पहले जारी करेंसी नोटों (pre-2005 currency notes) को बदलने की RBI की समयसीमा 31 दिसम्बर 2015 थी जिसे अब बढ़ा कर 30 जून 2016 कर दिया गया है। RBI ने जनवरी 2014 से अब तक कुल पाँच बार इस समयसीमा को बढ़ाया है। RBI द्वारा की गई घोषणा के अनुसार महात्मा गाँधी के चित्रों वाले पुराने नोटों की वैधानिकता बनी रहेगी।

– हालांकि पहले पुराने नोटों को बदलने की सुविधा सभी बैंकों में उपलब्ध थी लेकिन 1 जनवरी 2016 से कुछ निर्धारित बैंक शाखाओं में ही यह संभव होगा।

– उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 से पूर्व के नोटों को इनमें अपेक्षाकृत कम सुरक्षा फीचर्स के होने के चलते वापस लिया जा रहा है। इसके अलावा करेंसी नोटो प्रचलन के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार एक ही समय एक से अधिक सीरीज़ के नोटों के प्रचलन को सही नहीं माना जाता है।

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4) कौन सा उपक्रम सरकार द्वारा “ई-साइन” (‘eSign’) हेतु प्रमाणित संस्था “ई-मुद्रा” (‘e-Mudhra’) के साथ डिज़िटल सिगनेचर के लिए गठजोड़ करने वाला देश का पहला उपक्रम बन गया है? – “एक्सिस बैंक” (Axis Bank)

विस्तार: भारत में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने ई-साइन सेवा प्रदान करने करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रमाणित एकमात्र कम्पनी ई-मुद्रा (‘e-Mudhra’) के साथ एक करार किया है। इसके तहत आधार (Aadhaar) नम्बर हासिल कर चुके बैंक के ग्राहक बैंक में अपने डिज़िटल साइन का प्रयोग तमाम दस्तावेजों में कर सकेंगे। इसके द्वारा उन्हें ऑनलाइन लेन-देन करने में काफी सुविधा हासिल होगी। इस करार से एक्सिस बैंक डिज़िटल साइन की इस सुविधा के लिए करार करने वाला देश का पहला बैंक भी बन गया है।

– यह “ई-साइन” सेवा आधार के डेटाबेस से जानकारी हासिल कर व्यक्तियों की पहचान से सम्बन्धित डिज़िटल हस्ताक्षर अपने आप जारी करने में सक्षम है। इस हस्ताक्षर को वैधानिक मान्यता हासिल है।

– उल्लेखनीय है कि वर्तमान में बैंक की किसी भी सेवा या उत्पाद के लिए आवेदन करने के लिए ग्राहक को आवेदन के साथ अपनी पहचान सम्बन्धी तमाम दस्तावेजों को लगाना पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि RBI के केवाईसी (KYC – know-your-customer) नियमों के अनुसार ग्राहकों की व्यक्तिगत तथा निवास-सम्बन्धी तमाम जानकारियाँ प्रदान करना जरूरी होता है।

– ई-मुद्रा ने अपनी ई-साइन सेवा को जुलाई 2015 में ही शुरू किया था।

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IRCTC-2016

5) भारतीय रेल (Indian Railway) ने अपनी यात्री टिकट बेचने के लिए निजी क्षेत्र के किस बैंक के साथ अपनी तरह का पहला समझौता 23 दिसम्बर 2015 को किया जिसके तहत यात्री रेल टिकटों को बैंक के एप्लीकेशन्स से खरीद सकेंगे? – आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank)

विस्तार: भारतीय रेल के ई-टिकेटिंग प्लेटफॉर्म इण्डियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टूरिज़्म कॉरपोरेशन (Indian Railway Catering and Tourism Corporation – IRCTC) ने 23 दिसम्बर 2015 को देश के निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक ICICI बैंक से एक समझौता किया जिसका तहत अब यात्री ICICI बैंक के मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन तथा प्रीपेड डिज़िटल वॉलेट का प्रयोग कर भारतीय रेल के यात्री टिकट खरीद सकेंगे।

– IRCTC यह द्वारा किया गया इस तरह का पहला करार है जिसमें किसी बैंक के एप्लीकेशन्स द्वारा रेल टिकट को बेचा जायेगा।

– इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले ग्राहकों को IRCTC की बेवसाइट पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ICICI बैंक की बेवसाइट पर भी एक वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) कराना होगा।

– इस सुविधा की खास बात यह है कि इसका लाभ ICICI बैंक के ग्राहकों के अलावा अन्य बैंकों के ग्राहक भी उठा सकेंगे। ग्राहक टिकट खरीदने के लिए जहाँ ICICI बैंक के एप्लीकेशन्स का प्रयोग करेंगे वहीं इन टिकटों के लिए ऑनलाइन भुगतान के लिए भी किसी भी बैंक के डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेटबैंकिंग सुविधा का लाभ उठाया जा सकेगा।

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Mobo-Money-2015

6) किस प्रमुख आईटी कम्पनी ने “मोबोमनी” (‘MoboMoney’) नामक अपनी मोबाइल वॉलेट (mobile wallet) सेवा को दिसम्बर 2015 के दौरान शुरू किया? – टेक महिन्द्रा लिमिटेड

विस्तार: टेक महिन्द्रा लिमिटेड (Tech Mahindra Ltd.), जोकि RBI से पेमेण्ट्स बैंक (Payments Bank) का लाइसेंस प्राप्त करने वाले 11 उपक्रमों में शामिल है, ने 23 दिसम्बर 2015 को “मोबोमनी” (‘MoboMoney’) नामक अपनी मोबाइल वॉलेट सेवा को शुरू किया।

– “मोबोमनी” के माध्यम से ग्राहक ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों प्रकार के भुगतान करने में सक्षम होंगे। इसके द्वारा ग्रॉसरी स्टोर्स, रेस्टॉरेण्ट्स तथा ऐसे अन्य स्थानों पर भुगतान किया जा सकेगा। टेक महिन्द्रा ने दावा किया कि इस मोबाइल वॉलेट के द्वारा 1 रुपए जितने कम मूल्य के भुगतान भी किए जा सकेंगे।

– “मोबोमनी” को चलाने के लिए नियर-फील्ड कॉम्यूनिकेशन (near-field communication (NFC) technology) तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसमें ग्राहकों तथा दुकानदारों को NFC टैग जारी किए जाते हैं। इसके अलावा दुकानदारों को एक प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) डिवाइस अथवा NFC तकनीक पर आधारित स्मार्टफोन भी रखना होगा जबकि ग्राहक को सिर्फ सौदे के समय जारी किए गए NFC टैग की आवश्यकता पड़ेगी।

– टेक महिन्द्रा ने इस मोबाइल वॉलेट को जारी करते समय यह दावा भी किया कि यह देश का पहला वाणिज्यिक आधार पर जारी किया गया कॉन्टैक्ट-लेस पेमेण्ट वॉलेट है।

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7) दिसम्बर 2015 के दौरान जारी वर्ष 2016 की गई विश्व बैंक की ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यवसाय करने में आसानी) सूची (World Bank’s Ease of Doing Business global list 2016) में भारत को कुल 189 देशों में कौन से स्थान पर रखा गया है? – 130वें स्थान पर

विस्तार: वर्ष 2015 की इस सूची में भारत को 134वें स्थान पर रखा गया था तथा इस प्रकार भारत ने पिछले एक साल के दौरान 4 स्थानों का उछाल दर्ज किया है। वर्ष 2016 की सूची में स्थिति में उछाल दो क्षेत्रों में प्रगति के कारण हुआ है – व्यवसाय शुरू करने तथा व्यवसाय के लिए विद्युत कनेक्शन मिलने में आसानी के कारण।

– हालांकि चार स्थानों का उछाल आने के बावजूद भारत 99वें स्थान पर काबिज नेपाल (Nepal), 107वें स्थान पर काबिज श्रीलंका (Sri Lanka) तथा 71 वें स्थान पर काबिज भूटान (Bhutan) से पीछे है। भूटान दक्षिण एशिया में व्यवसाय करने के लिए सर्वश्रेष्ठ देश बनकर उभरा है।

– इस सूची में सिंगापुर (Singapore) एक बार फिर पहले स्थान पर रहा है जबकि उसके बाद क्रमश: न्यूज़ीलैण्ड (New Zealand), डेनमार्क (Denmark) और दक्षिण कोरिया (South Korea) का स्थान है। वहीं चीन (China) की स्थिति में 2015 के 90वें स्थान के मुकाबले 84वें स्थान पर पहुँचकर कुल 6 स्थान का सुधार आया है। जबकि पाकिस्तान (Pakistan) पिछले बार के 128वें स्थान से 10 स्थान फिसलकर 138वें स्थान पर पहुँच गया है।

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8) केन्द्र सरकार (Union Govt.) ने दिवालियापन (Bankruptcy) से सम्बन्धित मामलों के जल्द निस्तारण करने के सम्बन्ध में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 21 दिसम्बर 2015 को दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code 2015) को राज्यसभा में प्रस्तुत किया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य क्या है? – इसके द्वारा दिवालियेपन से सम्बन्धित मामलों को 180 दिनों में निस्तारित करने की सीमा तय कर ऐसे मामलों को जल्द निस्तारित करने की कोशिश की जायेगी

विस्तार: उल्लेखनीय है कि भारत में दिवालियापन (Bankruptcy) से सम्बन्धित वर्तमान कानून बहुत लचर हैं तथा ऐसे मामलों में लोगों को दिवालिया (Bankrupt or Insolvent) करार दिए गए लोगों से अपना पैसा मिलने में 5 से 15 वर्ष तक का समय बहुधा लग जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस विषय से सम्बन्धित कोई एकल कानून नहीं है।

– अब दिवालियापन से सम्बन्धित मामलों को जल्द निस्तारित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इस विधेयक को प्रस्तुत किया है जो कम से कम 12 वर्तमान कानूनों में संशोधन प्रस्तावित करता है। इसमें कम्पनी कानून 2013, आयकर कानून तथा भुगतान एवं निपटारा प्रणाली कानून 2007 (Payment and Settlement Systems Act 2007) में परिवर्तन किया जाना प्रस्तावित है। इसके अलावा ऐसे मामलों में प्रोफेशनल लोगों की मदद लेने का भी प्रावधान किया गया है।

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9) विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization – WTO) के दसवें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन (10th Ministerial Conference) की समाप्ति 19 दिसम्बर 2015 को हो गई जिसमें व्यापार को बढ़ाने से सम्बन्धित कई महत्वपूर्ण समझौते किए गए। यह सम्मेलन किस स्थान पर आयोजित किया गया? – नैरोबी – Nairobi (केन्या)

विस्तार: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दसवें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन का आयोजन 15 दिसम्बर से 19 दिसम्बर 2015 के बीच केन्या की राजधानी नैरोबी (Nairobi) में किया गया। यह पहला मौका था जब इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन किसी अफ्रीकी देश में किया गया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता अमीना मोहम्मद (Amina Mohamed) ने की जो केन्या के विदेशी मामलों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की कैबिनेट सचिव हैं।

– इस सम्मेलन की समाप्ति से पहले विश्व के सबसे पिछड़े देशों के कृषि, कपास, आदि मुद्दों से सम्बन्धित छह समझौतों को हस्ताक्षरित किया गया। इसमें कृषि निर्यात (farm exports) से सम्बन्धित निर्यात सब्सिडीज़ (export subsidies) को समाप्त करने पर देशों द्वारा जताई गई प्रतिबद्धता वाला वह निर्णय भी शामिल था जिसे WTO के महानिदेशक रॉबर्टो आज़ेवेडो (Roberto Azevêdo) ने संगठन के 20 साल के इतिहास के दौरान कृषि क्षेत्र से सम्बन्धित सबसे महत्वपूर्ण करार बताया।

– लेकिन इस सम्मेलन की समाप्ति से पूर्व अमीर देशों द्वारा प्रदान की जा रही घरेलू सब्सिडी (domestic subsidies) को नियंत्रित करने को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका जिसको लेकर पिछड़े देशों ने काफी जोर लगाया था। वहीं भारत ने इस सम्मेलन में भी 14-वर्ष पुरानी दोहा वार्ता (Doha Round) में लिए गए निर्णयों को पूरा न करने पर अपनी निराशा व्यक्त की।

– उल्लेखनीय है कि WTO के मंत्रीस्तरीय सम्मेलन की शुरूआत वर्ष 1996 में हुई थी जब ऐसा पहला सम्मेलन सिंगापुर (Singapore) में किया गया था।

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10) 10 देशों के क्षेत्रीय संगठन आसियान (ASEAN) द्वारा 31 दिसम्बर 2015 को लाँच किए गए क्षेत्रीय आर्थिक ब्लॉक का नाम क्या है? – आसियान एकोनॉमिक कम्यूनिटी (Asean Economic Community – AEC)

विस्तार: आसियान (ASEAN) ने यूरोपीय संगठन (European Union – EU) की तर्ज पर इस क्षेत्रीय आर्थिक ब्लॉक को आधिकारिक रूप से 31 दिसम्बर 2015 को शुरू किया। इसको खड़ा करने में अमेरिका ने आसियान की मदद की है तथा इसके द्वारा आसियान मुख्य रूप से इस क्षेत्र में चीन और जापान की आर्थिक ताकत का मिलकर मुकाबला करने की मंशा रखता है। AEC के द्वारा इस क्षेत्र में व्यापारिक शुल्कों (trade tariffs) को कम कर श्रम, सेवाओं तथा उत्पादों के आवागमन को सुगम बनाने का प्रयास किया जायेगा।

– आसियान में शामिल 10 देश हैं – ब्रुनेई, कम्बोडिया, इण्डोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपीन्स, सिंगापुर, थाईलैण्ड और वियतनाम। इस क्षेत्र में एक ओर जहाँ मध्यम वर्ग की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है वहीं कुछ स्थानों पर गरीबी और असमानता का बोलबाला है।

– उल्लेखनीय है कि आसियान क्षेत्र का आर्थिक एकीकरण अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि इसके द्वारा वह क्षेत्र में चीन की लगातार बढ़ रही आर्थिक तथा सैन्य ताकत पर नियंत्रण रखना चाहता है।

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