बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 105

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Editorial Team

22 Dec, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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Negotiable-Instruments-Act-2015

1) भारतीय संसद ने 7 दिसम्बर 2015 को उस संशोधन विधेयक (amendment bill) को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी जिसके तहत चेक बाउंस (cheque bounce) होने के मामलों में अब मुकदमा वहाँ दर्ज किया जा सकेगा जहाँ चेक प्रस्तुत किया गया है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पारित किए गए इस संशोधन विधेयक का क्या नाम है? – निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेण्ट्स (संशोधन) विधेयक, 2015 (Negotiable Instruments (Amendment) Bill, 2015)

विस्तार: निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेण्ट्स (संशोधन) विधेयक, 2015 को लोकसभा द्वारा इसी वर्ष मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया था। अब 7 दिसम्बर 2015 को इस विधेयक को राज्यसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद यह विधेयक भारतीय संसद द्वारा पूर्णतया पारित हो गया है।

  • इस विधेयक के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय को पलटा जा रहा है जिसमें कहा गया था कि चेक बाउंस होने के मामलों में मुकदमा वहीं दायर किया जा सकता है जहाँ चेक जारी करने वाला बैंक स्थित है। इस विधेयक ने यह व्यवस्था कर दी है कि ऐसे मामलों में मुकदमा वहाँ दर्ज किया जायेगा जहाँ चेक को भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक ने यह प्रावधान भी किया है कि चेक बाउंस से सम्बन्धित मामले उन्हीं न्यायालयों में दायर किए जा सकेंगे जिनका अधिकार क्षेत्र चेक से भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति के बैंक पर है।
  • माना जा रहा है कि निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेण्ट्स (संशोधन) विधेयक, 2015 का प्रभाव चेक बाउंस से सम्बन्धित 18 लाख से अधिक लम्बित मामलों पर पड़ेगा।

2) प्रस्तावित गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (GST) पर गठित केन्द्र सरकार की समिति ने GST की मानक दर (standard rate) को कितना रखने की सिफारिश की है, जैसा कि 4 दिसम्बर 2015 को जारी इस समिति की रिपोर्ट में जाहिर हुआ? – 16.9 से 17.9% तक

विस्तार: GST के मुद्दे पर गठित इस समिति की अध्यक्षता मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) अरविन्द सुब्रह्मण्यम (Arvind Subramanian) ने की। उन्होंने समिति की सिफारिश रिपोर्ट को 4 दिसम्बर 2015 को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंपा।

  • इस समिति ने सिफारिश की है कि GST की मानक दर को 16.9 से 17.9% के बीच में रखा जाय। यह दर GST के तहत स्थापित नए अप्रत्यक्ष कर ढांचे (Indirect Tax structure) में अधिकांश सेवाओं तथा उत्पादों पर लगायी जायेगी।
  • समिति ने यह सिफारिश भी की है कि उत्पादों के अंतर-राजकीय व्यापार (inter-state trade of goods) के दौरान प्रस्तावित 1% कर को भी समाप्त किया जाय ताकि इससे उत्पादन करने वाले राज्यों को लाभ मिले। यह कांग्रेस पार्टी की एक अहम मांग रही है। इसके अलावा समिति ने न्यूनतम 12% से अधिकतम 40% दर का प्रस्ताव भी रखा है। 40% की अधिकतम दर शराब जैसे उत्पादों पर लगाए जाने का प्रस्ताव है।

Pan-Card-transactions-2015

3) केन्द्रीय वित्त मंत्रालय (Union Finance Ministry) ने 16 दिसम्बर 2015 को दो लाख रुपए से अधिक के सभी प्रकार के सौदों के लिए पैन – PAN (स्थायी खाता संख्या) की जानकारी प्रदान करना अनिवार्य कर दिया। इस दिशानिर्देश के द्वारा सरकार काले धन से सम्बन्धित सौदों पर नकेल कसने की मंशा रखती है। यह नियम किस तिथि से प्रभाव में आ जायेगा? – 1 जनवरी 2016 से

विस्तार: 1 जनवरी 2016 से उत्पादों अथवा सेवाओं की खरीद से सम्बन्धित 2 लाख रुपए से अधिक की धनराशि वाले सभी सौदों के लिए PAN का विवरण देना अनिवार्य होगा। इन सौदों के लिए भुगतान चाहें किसी भी माध्यम (जैसे नकद, चेक, ड्राफ्ट अथवा क्रेडिट कार्ड)  से किया गया हो, PAN की जानकारी देना अनिवार्य होगा।

  • वहीं अचल सम्पत्ति (immovable property) की खरीद के मामलों में PAN विवरण देने हेतु सीमा को वर्तमान 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख कर दिया गया है।
  • जहाँ तक होटल अथवा रेस्टोरेण्ट के एक बार के अधिकतम बिल (one-time payment) की सीमा (जिसके लिए PAN विवरण देना अनिवार्य होगा) को भी वर्तमान 25,000 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया है।
  • गैर-सूचीबद्ध कम्पनी (unlisted company) के शेयरों की खरीद अथवा बिक्री के मामलों में भी उक्त सीमा को वर्तमान 50,000 रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए कर दिया गया है।
  • हालांकि नो-फ्रिल बैंक खाते (no-frills bank account), जैसे जन-धन खाते, को खोलने के लिए PAN विवरण प्रदान करने की कोई बाध्यता नहीं होगी।

Federal-Reserve-2015

4) एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका (U.S.) के केन्द्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) ने 16 दिसम्बर 2015 को ब्याज दरों (interest rates) में 0.25% वृद्धि की घोषणा की। यह फेडरल रिज़र्व द्वारा कितने वर्षों बाद अमेरिकी में की गई ब्याज वृद्धि है? – लगभग 9 वर्षों बाद

विस्तार: उल्लेखनीय है कि इससे पहले अमेरिका के केन्द्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व ने वर्ष 2006 में अंतिम बार ब्याज दरों में वृद्धि की थी। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अमेरिका की बेंचमार्क ब्याज दर दिसम्बर 2008 से लगभग शून्य (0% से 0.25%) बनी हुई थी। वैसे अमेरिका में ब्याज दरों में की गई वृद्धि अप्रत्याशित नहीं थी तथा इसकी संभावना काफी पहले से जताई जा चुकी थी।

  • फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि करने का विश्व भर में व्यापक असर देखा जा सकता है। इससे जहाँ ब्रिटेन में भी ब्याज दर में वृद्धि की जा सकती है वहीं पहले से ही गिरावट के दौर से गुज़र रहे विकासशील देशों के लिए ऋण लेना और महंगा हो सकता है।
  • आशंका व्यक्त की जा रही है कि दरों में वृद्धि के कारण मंदी और बढ़ेगी क्योंकि इससे अमेरिकी मुद्रा डॉलर (dollar) की कीमत बढ़ जायेगी। डॉलर का प्रयोग विश्व के अधिकांश देश और कम्पनियाँ ऋण हासिल करने के लिए करती हैं।

5) मौजूदा वित्तीय वर्ष के प्रथम छह माह के दौरान कौन सा देश मॉरीशस (Mauritius) को पछाड़कर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investments – FDI) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है, जिसके सम्बन्ध में आंकड़े दिसम्बर 2015 के दौरान जारी किए गए? – सिंगापुर (Singapore)

विस्तार: औद्यौगिक नीति एवं सवर्द्धन विभाग (Department of Industrial Policy and Promotion – DIPP) द्वारा दिसम्बर 2015 के दौरान जारी आंकड़ों के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष 2015-16 के प्रथम छह माह (अप्रैल-सितम्बर 2015) के दौरान सिंगापुर (Singapore) से भारत को प्राप्त कुल FDI की मात्रा 6.69 अरब डॉलर (रु. 43,096 करोड़) थी जबकि इसी समयावधि के दौरान मॉरीशस से हासिल FDI की मात्रा 3.66 अरब डॉलर (रु. 23,490 करोड़) थी। इससे स्पष्ट हो गया कि पिछले एक साल में सिंगापुर से हासिल FDI में दोगुना से भी काफी अधिक वृद्धि दर्ज हुई थी, जब FDI का स्तर मात्र 2.41 अरब डॉलर था।

  • यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि सिंगापुर के साथ भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षरित दोहरा कर-परिहार संधि (Double Taxation Avoidance Agreement – DTAA) में लिमिट ऑफ बेनेफिट उपबन्ध (Limit-of-Benefit (LoB) clause)  के कारण सिंगापुर में आधार वाले निवेशकों के लिए FDI अधिक लाभदायक हो गई है। इसी के चलते सिंगापुर से प्राप्त होने वाली FDI में भारी वृद्धि हुई है।
  • यदि अप्रैल 2000 से सितम्बर 2015 के FDI आंकड़ों पर नज़र डाली जाय तो भारत को हासिल कुल FDI में सिंगापुर की हिस्सेदारी लगभग 15% थी जबकि समान समयावधि के दौरान मॉरीशस की हिस्सेदारी काफी अधिक 34% तक थी। मॉरीशस काफी समय से भारत को हासिल FDI का मुख्य स्तंभ रहा है।

COP21-Agreement2015

6) पेरिस (Paris) में 21वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (UN Climate Change Summit – COP21)में दुनिया के 196 देशों ने एक ऐतिहासिक समझौता के मसौदे को अपनी स्वीकृति 12 दिसम्बर 2015 को प्रदान कर दी जिसके अनुसार सभी देश वैश्विक तापमान वृद्धि (Global Warming) को दो डिग्री से काफी कम रखने पर अपना योगदान देने पर राजी हो गए। समझौते में एक अहम व्यवस्था यह की गई है कि विकासशील देशों को पर्यावरण संकट से निपटने के प्रयासों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। यह महात्वाकांक्षी समझौता कब से प्रभाव में आयेगा? – वर्ष 2020 से

विस्तार: इस ऐतिहासिक समझौते का मुख्य लक्ष्य वैश्विक तापमान में होने वाली वृद्धि को पूर्व-औद्यगिक युग के तापमान (pre-industrial temperatures) के परिप्रेक्ष्य में 2 डिग्री से काफी कम रखना तय किया गया है। वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित रखने की यह चुनौती तब और कड़ी हो सकती है जब यह महात्वाकांक्षी लक्ष्य आवश्यकानुसार 1.5 डिग्री सेल्सियस भी हो सकता है।

  • यह ऐतिहासिक जलवायु सम्मेलन पेरिस में 30 नवम्बर 2015 को शुरू हुए सम्मेलन में दो सप्ताह के गहन विचार-विमर्श और चर्चा के दौर के बाद 12 दिसम्बर 2015 को अपने मुकाम पर पहुँचा।
  • इस समझौते को वर्ष 2020 में प्रभाव में लाया जायेगा जबकि इसके क्रियान्वयन के तीन वर्ष बाद वर्ष 2023 में इसकी पहली वैश्विक समीक्षा की जायेगी। इसके बाद प्रत्येक पाँच वर्ष में यह समीक्षा की जायेगी। वहीं इस समझौता का वर्ष 2025 अथवा 2030 में हिस्सा बनने वाले देशों को वर्ष 2020 तक इसकी अंतिम जानकारी प्रदान करनी होगी।

7) सार्वजनिक क्षेत्र के किस बैंक के निदेशक मण्डल ने 3 दिसम्बर 2015 को केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी को वर्तमान 65% से घटा कर 52% करने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी? – देना बैंक (Dena Bank)

विस्तार: देना बैंक के निदेशक मण्डल ने 3 दिसम्बर 2015 को आयोजित अपनी बैठक में बैंक में केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी को 65% से घटाकर 52% करने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। माना जा रहा है कि हिस्सेदारी को बेचने से प्राप्त धन से बैंक अपनी पूँजी ढांचे को सुदृढ़ कर इसे बेसल-तीन मानकों (Basel – III standard) के अनुसार बनाने की कोशिश करेगा।

  • उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने पिछले वर्ष सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी के स्तर को घटाकर 52% तक लाने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके द्वारा हासिल धन को बैंकों के पूँजी ढांचे (capital structure) को सुदृढ़ करने की योजना है क्योंकि तृतीय स्तंभ के बेसल मानक के अनुसार भारतीय बैंकों का न्यूनतम पूँजी पर्याप्तता अनुपात (capital adequacy ratio) 9% होना अनिवार्य है।
  • वहीं सरकारी क्षेत्र के बैंकों के लिए यह नियम भी लागू है कि वे किसी भी परिस्थिति में सरकारी हिस्सेदारी को 51% से कम नहीं कर सकते हैं ताकि इन बैंकों के स्वामित्व की प्रकृति में कोई परिवर्तन न हो।

8) आदित्य बिड़ला नूवो लिमिटेड (ABNL) द्वारा 2 दिसम्बर 2015 को की गई घोषणा के अनुसार प्रमुख बीमा कम्पनी सन लाइफ (Sun Life) बिड़ला सन लाइफ इन्श्योरेंस (Birla Sun Life Insurance – BSLI) में अपनी हिस्सेदारी को वर्तमान 26% से बढ़ाकर 49% तक कर देगी। सन लाइफ किस देश की बीमा कम्पनी है? – कनाडा (Canada)

विस्तार: बिड़ला सन लाइफ इन्श्योरेंस भारत के प्रमुख निजी जीवन बीमा प्रतिष्ठानों में से एक है। 30 सितम्बर 2015 तक इसकी नए बीमा प्रीमियम में 7.9% की हिस्सेदारी थी।

  • अपनी हिस्सेदारी के 23% हिस्से को बेचकर आदित्य बिड़ला नूवो लिमिटेड की बिड़ला सन लाइफ इन्श्योरेंस में हिस्सेदारी घट कर 51% हो जायेगी जबकि कनाडा की सन लाइफ की हिस्सेदारी 49% हो जायेगी। यह सौदा वर्ष 2015-16 के अंत तक पूरा होने की संभावना और इसके लिए तब तक नियामक संस्थाओं तथा वैधानिक अनुमतियाँ मिल जाने की संभावना है।
  • बिड़ला सन लाइफ इन्श्योरेंस में 23% हिस्सेदारी खरीदने के लिए सन लाइफ को 1,664 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े हैं जिसका अर्थ हुआ कि बिड़ला सन लाइफ इन्श्योरेंस की कुल कीमत 7,235 करोड़ रुपए आंकी गई है।

9) क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क (Brickwork) द्वारा दिसम्बर 2015 के दौरान जारी रिपोर्ट के अनुसार अपनी अर्थव्यवस्था के आकार के अनुसार कौन सा राज्य भारत का अग्रणी राज्य है? – महाराष्ट्र (Maharashtra)

विस्तार: ब्रिकवर्क्स (Brickwork) द्वारा भारत के राज्यों की अर्थव्यवस्था का आकलन करने सम्बन्धी चौथी रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार भारतीय राज्यों में महाराष्ट्र (Maharashtra) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है तथा इसका राजकीय सकल उत्पाद (gross state domestic product (GSDP) 16.87 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। इसके बाद क्रमश: तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का स्थान है।

  • इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि महाराष्ट्र अपने राजस्व का लगभग 70% हिस्सा कर राजस्व (tax revenues) के रूप में प्राप्त करता है तथा इस मामले में भी वह भारत में सबसे आगे है। इसके बाद क्रमश: गुजरात और तमिलनाडु का स्थान है।
  • वहीं गुजरात और महाराष्ट्र अपने राजकीय सकल उत्पाद में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी के मामले में दो अग्रणी राज्य बनकर उभरे हैं तथा इनकी हिस्सेदारी क्रमश: 27.26% और 25.18% है। इस मामले में अन्य अग्रणी राज्य हैं – तमिलनाडु (19.1%), झारखण्ड (18.8%) और हरियाणा (18.1%)।
  • राजकीय सकल उत्पाद में सेवा क्षेत्र (services sector) की हिस्सेदारी के मामले में कर्नाटक अपने IT/BPO/ KPO क्षेत्र की बदौलत अग्रणी राज्य बनकर उभरा। इसके बाद क्रमश: तमिलनाडु, महाराष्ट्र और आन्ध्र प्रदेश का स्थान रहा।
  • 17.06% विकास दर के साथ बिहार सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला राज्य बनकर उभरा जबकि इसके बाद मध्य प्रदेश (16.86%) और गोवा (16.43%) का स्थान रहा। वहीं सबसे धीमी विकास दर के मामले में 5.3% के साथ तेलंगाना पहले स्थान पर रहा। इसके बाद क्रमश: पंजाब (10.16%) और राजस्थान (11%) का स्थान रहा।
  • वहीं इस रिपोर्ट में वर्ष 2015 के दौरान भारत की विकास दर 7.5% रहने का अनुमान लगाया तथा इसके चलते भारत 6.9‍ की विकास दर वाले चीन से आगे रहा।

WTO-2-2015

10) विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization – WTO) के दसवें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन (10th Ministerial Conference) की समाप्ति 19 दिसम्बर 2015 को हो गई जिसमें व्यापार को बढ़ाने से सम्बन्धित कई महत्वपूर्ण समझौते किए गए। यह सम्मेलन किस स्थान पर आयोजित किया गया? – नैरोबी – Nairobi (केन्या)

विस्तार: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दसवें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन का आयोजन 15 दिसम्बर से 19 दिसम्बर 2015 के बीच केन्या की राजधानी नैरोबी (Nairobi) में किया गया। यह पहला मौका था जब इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन किसी अफ्रीकी देश में किया गया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता अमीना मोहम्मद (Amina Mohamed) ने की जो केन्या के विदेशी मामलों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की कैबिनेट सचिव हैं।

  • इस सम्मेलन की समाप्ति से पहले विश्व के सबसे पिछड़े देशों के कृषि, कपास, आदि मुद्दों से सम्बन्धित छह समझौतों को हस्ताक्षरित किया गया। इसमें कृषि निर्यात (farm exports) से सम्बन्धित निर्यात सब्सिडीज़ (export subsidies) को समाप्त करने पर देशों द्वारा जताई गई प्रतिबद्धता वाला वह निर्णय भी शामिल था जिसे WTO के महानिदेशक रॉबर्टो आज़ेवेडो (Roberto Azevêdo) ने संगठन के 20 साल के इतिहास के दौरान कृषि क्षेत्र से सम्बन्धित सबसे महत्वपूर्ण करार बताया।
  • लेकिन इस सम्मेलन की समाप्ति से पूर्व अमीर देशों द्वारा प्रदान की जा रही घरेलू सब्सिडी (domerstic subsidies) को नियंत्रित करने को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका जिसको लेकर पिछड़े देशों ने काफी जोर लगाया था। वहीं भारत ने इस सम्मेलन में भी 14-वर्ष पुरानी दोहा वार्ता (Doha Round) में लिए गए निर्णयों को पूरा न करने पर अपनी निराशा व्यक्त की।
  • उल्लेखनीय है कि WTO के मंत्रीस्तरीय सम्मेलन की शुरूआत वर्ष 1996 में हुई थी जब ऐसा पहला सम्मेलन सिंगापुर (Singapore) में किया गया था।

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