बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 104

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15 Dec, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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Yuan-China-2015

1) विश्व की एक प्रमुख आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में चीन (China) को एक बड़ी सफलता तब मिली जब उसकी मुद्रा युआन (Yuan) को विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights – SDR) वाली वैश्चिक मुद्राओं में शामिल करने की घोषणा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 30 नवम्बर 2015 को कर दी। इससे चीनी मुद्रा अब डॉलर, यूरो, पाउण्ड स्टर्लिंग तथा येन जैसी चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं की कतार में आकर खड़ी हो जायेगी। युआन को आधिकारिक रूप से SDR मुद्रा का दर्जा कब से प्रदान किया जायेगा? – अक्टूबर 2016 से

विस्तार: IMF द्वारा की गई घोषणा के अनुसार चीनी मुद्रा युआन (जिसे रेनमिनबी (Renminbi) के नाम से भी जाना जाता है) को अक्टूबर 2016 से विशेष आहरण अधिकार (SDR) वाली अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं में शामिल कर लिया जायेगा तथा इस मुद्रा बास्केट में युआन की भारिता (weightage) अथवा हिस्सेदारी 10.92% होगी।

  • IMF की इस घोषणा को चीन की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में साख तथा उसके द्वारा वैश्विक वित्त व्यवस्था में स्थान बनाने के लिए किए गए प्रयासों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके चलते अब चीनी मुद्रा में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करना आसान हो जायेगा तथा युआन को अंतर्राष्ट्रीय विनिमय मुद्रा का पूर्ण दर्जा मिल जायेगा।
  • उल्लेखनीय है कि SDR बॉस्केट में शामिल होने के लिए चीन ने IMF की तमाम शर्तों को पूरा करने की दिशा में बड़ा गंभीर प्रयास किया है। इसके तहत विदेशियों को चीनी मुद्रा की पहुँच आसान बनाने, युआन के विनिमय समय में वृद्धि करने तथा अधिक मात्रा में ऋण जारी करने जैसे कई प्रयास किए गए।
  • SDR बॉस्केट में शामिल होने के लिए युआन को अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहुँच तथा प्रकृति में बदलाव करने की दरकार थी जिसके न होने के कारण वर्ष 2010 में IMF की अंतिम समीक्षा में युआन को इन पैमानों पर उपयुक्त नहीं माना गया था।

2) किस प्रमुख विदेशी बैंक (foreign banks) ने भारत में अपने निजी बैंकिंग परिचालन (private banking operations) को बंद करने की घोषणा 27 नवम्बर 2015 को की? – एचएसबीसी (HSBC)

विस्तार: ब्रिटेन में मुख्यालय वाले एचएसबीसी होल्डिंग्स पीएलसी., (HSBC Holdings Plc.) जोकि यूरोप का सबसे बड़ा बैंक है, ने 27 नवम्बर 2015 को घोषणा की कि वह भारत में अपने निजी बैंकिंग परिचालन को बंद कर देगा। निजी बैंकिंग परिचालन को बंद करने का फैसला HSBC समूह ने इस व्यवसाय की वृहद समीक्षा में किया जिसमें इसे संभवत: अलाभकारी माना गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार HSBC के भारतीय निजी बैंकिंग परिचालन में लगभग 70 लोग कार्यरत हैं।

  • अब HSBC भारत में अपने निजी बैंकिंग ग्राहकों को बैंक के वैश्विक खुदरा बैंकिंग और सम्पत्ति प्रबन्धन प्लेटफॉर्म (global retail banking and wealth management platform) में स्थानांतरित करने की कोशिश करेगा जिसका नाम एचएसबीसी प्रीमियर (HSBC Premier) है।
  • HSBC की इस घोषणा के चलते वह भारत में निजी बैंकिंग व्यवसाय को छोड़कर जाने वाले कई विदेशी बैंकों की कड़ी में जुड़ गया है, जो गला-काट प्रतिस्पर्धा वाले इस बैंकिंग क्षेत्र को छोड़कर बाहर निकल चुके हैं।
  • इससे पहले रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैण्ड (RBS) और मॉर्गन स्टैन्ली (Morgan Stanley) ने भी भारत में अपनी वैश्विक बैंकिंग पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत निजी बैंकिंग इकाइयों को बेच दिया था।

3) केन्द्र सरकार ने 25 नवम्बर 2015 को प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत जारी किए गए रूपे डेबिट कार्डों (RuPay Debit cards) के धारकों को कार्ड के साथ मिलने वाली दुर्घटना बीमा-कवर सुविधा के लिए कार्ड प्रयोग करने की समयावधि को बढ़ाकर 90 दिन कर दिया है। अभी तक यह समयावधि कितनी थी? – 45 दिन

विस्तार: उल्लेखनीय है कि 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खाता खुलाने वाले लोगों को रुपे डेबिट कार्ड ((RuPay Debit card) के साथ 1 लाख रुपए की दुर्घटना बीमा सुविधा भी प्रदान की जाती है। इस लाभ को हासिल करने के लिए अभी तक दुर्घटना होने से 45 दिन पूर्व इस कार्ड का उपयोग कम से कम एक बार किए जाने का नियम था। लेकिन इसके चलते तमाम कार्ड धारकों को असुविधा पेश आ रही थी। इसको देखते हुए नेशनल पेमण्ट कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया (NPCI) ने इस समयावधि को बढ़ाकर 90 दिन कर दिया है।

  • बढ़ाई गई अवधि के लिए उन्हें ही दुर्घटना बीमा का लाभ प्रदान किया जायेगा जिन्हें मृत्यु अथवा अपंगता प्रदान करने वाली यह दुर्घटना 25 नवम्बर अथवा इसके बाद हुई है।
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत अब तक लगभग 16.54 करोड़ खाताधारकों को रुपे डेबिट कार्ड प्रदान किए गए हैं।

4) वर्ष 2015-16 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर (GDP Growth Rate) कितनी रही जिसके बारे में केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central Statistics Office -CSO) ने 30 नवम्बर 2015 को आंकड़े प्रस्तुत किए? – 7.4%

विस्तार: जुलाई से सितम्बर 2015 की तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.4% रही। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2015) के दौरान विकास दर 7% थी जबकि पिछले वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान विकास दर 8.4% थी। इस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 7 से 7.5% के निर्धारित अनुमान के आसपास ही चल रही है।

  • दूसरी तिमाही के दौरान मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर 9.3% रही (पिछले तिमाही में 7.2%)। वहीं कृषि क्षेत्र की विकास दर 2.2% रही (पिछले तिमाही में 1.9%)।
  • इस आंकड़ों के सामने आने के बाद माना जा रहा है कि वर्ष 2015-16 (संपूर्ण वर्ष) के वृद्धि सम्बन्धी अनुमान में भारत सरकार कुछ कमी कर सकती है।

RBI-New-2015

5) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लगभग 17 हजार कर्मचारी 19 नवम्बर 2015 को एक दिन की हड़ताल पर रहे जिसके चलते देश के बैंकों की निपटारा प्रणाली (settlement system) प्रभावित हुई। RBI के कर्मचारियों ने इस हड़ताल का आयोजन क्यों किया? – अपने लिए बेहतर सेवानिवृत्ति पैकेज के समर्थन तथा RBI में प्रस्तावित कुछ सुधारों के विरोध के लिए

विस्तार: देश भर के RBI कर्मचारी अपने लिए बेहतर सेवानिवृत्ति लाभों के समर्थन तथा प्रस्तावित मौद्रिक नीति समिति के विरोध में एक दिन की हड़ताल पर रहे। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने प्रमुख मौद्रिक फैसले लेने के लिए जिस मौद्रिक नीति समिति (monetary policy committee) के गठन का प्रस्ताव रखा है उसमें RBI के प्रतिनिधियों के अलावा केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों को स्थान देने की बात कही गई है।

  • RBI के कर्मचारी प्रस्तावित मौद्रिक नीति समिति के गठन को RBI के अधिकारों को कम करने तथा मौद्रिक नीति सम्बन्धी उसकी स्वायत्तता को प्रभावित करने के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि RBI के गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने मौद्रिक नीति समिति के गठन का समर्थन किया है।
  • 19 नवम्बर की हड़ताल RBI में पिछले 6 साल में हुई पहली हड़ताल थी। इससे पहले RBI में वर्ष 2009 में हड़ताल हुई थी।

6) क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयर (CARE) द्वारा 24 नवम्बर 2015 को जारी आंकड़ों के अनुसार 30 सितम्बर 2015 को समाप्त हुए एक साल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों समेत 37 भारतीय बैंकों की गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियों (Non-Performing Assets (NPAs) में कितने प्रतिशत वृद्धि हुई है? – 26.8%

विस्तार: उल्लेखनीय है कि भारतीय बैंकों की NPAs में पिछले एक साल के दौरान हुई 26.8% की यह वृद्धि इससे पूर्व वर्ष की समान समयावधि के मुकाबले लगभग 10% अधिक है। तब इन बैंकों की NPAs में 16.9% की वृद्धि हुई थी।

  • अब जब इन 37 बैंकों की कुल NPAs का कुल मूल्य 3,36,685 करोड़ रुपए है तथा एक साल के दौरान इसमें लगभग 71,000 करोड़ की वृद्धि हुई है।
  • बड़े बैंकों में, बैंक ऑफ इण्डिया (BOI) की NPAs 14,127 करोड़ रुपए से बढ़कर 29,893 करोड़ रुपए हो गईं, बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) की NPAs 13,057 करोड़ रुपए से बढ़कर 23,710 करोड़ रुपए हो गईं तथा इण्डियन ओवरसीज़ बैंक (IOB) की NPAs 13,333 करोड़ रुपए से बढ़कर 19,423 करोड़ रुपए हो गईं।
  • NPAs की तरफ से एकमात्र सुनहरी किरण भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की तरफ से दिखी है जिसकी NPAs की गुणवत्ता में सुधार दर्ज हुआ है। कुल प्रदत्त ऋण (advances) के परिप्रेक्ष्य में इस बैंक की सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ (Gross NPAs) 4.89% (60,712 करोड़ रुपए) के स्तर से कम होकर 4.15% (56,834 करोड़ रुपए) रह गईं हैं।

7) भारत में निजी क्षेत्र के किस वित्तीय समूह ने ब्रिटेन में छोटे व्यवसायों तथा व्यवसायियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाले ओकनॉर्थ बैंक (OakNorth Bank) में 40% हिस्सेदारी खरीद ली है, जिसके सम्बन्ध में 13 नवम्बर 2015 को जानकारी दी गई? – इण्डियाबुल्स समूह (Indiabulls Group)

विस्तार: 13 नवम्बर को जारी की गई जानकारी के अनुसार मुम्बई में मुख्यालय वाले इण्डियाबुल्स समूह (Indiabulls Group) ने ब्रिटेन के ओकनॉर्थ बैंक (OakNorth Bank) में 40% हिस्सेदारी खरीद ली है। इसके लिए इण्डियाबुल्स ने 10 करोड़ डॉलर (6.6 करोड़ पाउण्ड) खर्च किए हैं।

  • ओकनॉर्थ बैंक ब्रिटेन में स्थित है तथा छोटे उद्योगों तथा व्यवसायियों को वित्त पोषण प्रदान करता है। वहीं इण्डियाबुल्स समूह रियल एस्टेट क्षेत्र, वित्तीय सेवा क्षेत्र तथा ऋण सेवाओं में संलग्न है। इण्डियाबुल्स समूह ने यह सौदा अपनी सहयोगी कम्पनी इण्डियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (Indiabulls Housing Finance) के द्वारा किया है, जो भारत में निजी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कम्पनी है।
  • माना जा रहा है कि इस अधिग्रहण से इण्डियाबुल्स को छोटे व्यवसाय वर्ग (small business segment) में अपना विस्तार करने में मदद मिलेगी। 40% हिस्सेदारी खरीद की यह घोषणा भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली ब्रिटेन यात्रा के दौरान की गई।

coal-india-Lted-2015

8) आर्थिक मामलों पर गठित कैबिनेट समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs – CCEA) ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कोल इण्डिया लिमिटेड (Coal India Limited – CIL) में केन्द्र सरकार के कितने प्रतिशत हिस्से के विनिवेश (disinvest) की स्वीकृति 18 नवम्बर 2015 को प्रदान कर दी? – 10%

विस्तार: कोल इण्डिया लिमिटेड (CIL) में 10% विनिवेश करने के फैसले की जानकारी कोयला एवं ऊर्जा मंत्री पियूष गोयल ने 18 नवम्बर को CCEA की बैठक के बाद दी। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार इस विनिवेश के द्वारा लगभग 20,000 करोड़ हासिल करने की आशा कर रही है। हालांकि इस विनिवेश के लिए IPO की तारीख की कोई जानकारी नहीं दी गई।

  • कोल इण्डिया लिमिटेड के मौजूदा बाजार पूँजीकरण (current market capitalization) के अनुसार इसके 10% हिस्से के विनिवेश से सरकार को 21,100 करोड़ रुपए हासिल हो सकते हैं। यह प्रस्तावित विनिवेश इस उपक्रम के इतिहास में तीसरा विनिवेश होगा।
  • यदि सरकार कोल इण्डिया का इस कीमत पर विनिवेश करने में सफल होती है तो सरकार को उसके 69,500 करोड़ रुपए के विनिवेश लक्ष्य के पास पहुँचने में बड़ी मदद मिल सकती है, हालांकि तब भी यह लक्ष्य काफी दूर ही रह जायेगा। इस वित्तीय वर्ष में केन्द्र सरकार ने अब तक चार उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी का विनेवेश कर मात्र 12,600 करोड़ रुपए हासिल किए हैं। वे चार उपक्रम जिनमें विनिवेश किया गया है, हैं – पॉवर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC), ड्रेजिंग कॉरपोरेशन (Dredging Corporation) और इण्डियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC)।

Vijay-Kelkar-PPP-Committee-2015

9) सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnership – PPP) से मूलभूत संरचना (infrastructure) का विकास करने के मॉडल की समीक्षा के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में मुख्यत: ऐसी परियोजनाओं का वित्त-पोषण (financing) दुरुस्त करने और PPP मॉडल पर और ध्यान देने की सिफारिश की है। 19 नवम्बर 2015 को अपनी रिपोर्ट पेश करने वाली इस समिति का अध्यक्षता कौन कर रहा है? – विजय केलकर (Vijay Kelkar)

विस्तार: वित्त आयोग (Finance Commission) के पूर्व अध्यक्ष विजय केलकर सार्वजनिक-निजी भागीदारी से मूलभूत संरचना का विकास करने के मॉडल की समीक्षा करने वाली इस समिति की अध्यक्षता कर रहे थे। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट 19 नवम्बर को केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौंप दी।

  • इस समिति ने तमाम परियोजनाओं के विकास के लिए अपनाए जा रहे इस मॉडल में जोखिम भागीदारी समेत तमाम पक्षों की विस्तृत समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि PPP मॉडल के ढांचे को सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों के अनुसार सुधारा जाना चाहिए तथा इसे नए सिरे से तैयार करना चाहिए।
  • अपनी समीक्षा के दौरान इस समिति ने PPP मॉडल के तहत सरकार के साथ काम करने वाले कुछ प्रमुख उपक्रमों से इस विषय पर उनका पक्ष जाना। कई उपक्रमों के प्रमुखों ने मॉडल के तहत क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं के लिए एक निष्पक्ष नियामक (neutral regulator) गठित करने की वकालत की।
  • विजय केलकर की अध्यक्षता में गठित इस 10-सदस्यीय समिति में अन्य प्रमुख सदस्य थे – सीएस राजन (मुख्य सचिव, राजस्थान), एस.बी. नायर (अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक, ), शेखर शाह (महानिदेशक, NCAER), प्रदीप कुमार (प्रबन्ध निदेशक, CBG SBI) और विक्रम लिमये (प्रबन्ध निदेशक, IDFC)।

10) एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत 10-सदस्यीय संगठन आसियान (ASEAN) के सदस्य देशों ने यूरोपीय संघ (EU) की तर्ज पर एक क्षेत्रीय आर्थिक ब्लॉक (regional economic bloc) स्थापित करने की घोषणा की। यह घोषणा 22 नवम्बर 2015 को कुआलालम्पुर (मलेशिया) में सम्पन्न वर्ष 2015 के आसियान शिखर सम्मेलन (ASEAN Summit 2015) के अंतिम दिन की गई। इस प्रस्तावित क्षेत्रीय आर्थिक ब्लॉक को किस नाम से जाना जायेगा? – आसियान इकोनॉमिक कम्यूनिटी (ASEAN Economic Community – AEC)

विस्तार: आसियान इकोनॉमिक कम्यूनिटी (AEC) नामक क्षेत्रीय आर्थिक ब्लॉक बनाने का फैसला कुआलालम्पुर में हुए आसियान के 27वें शिखर सम्मेलन में लिया गया। संगठन के दस सदस्यों ने इस प्रस्तावित क्षेत्रीय आर्थिक ब्लॉक की स्थापना के लिए एक समझौते पर 22 नवम्बर 2015 को हस्ताक्षर किए। इस हस्ताक्षर समारोह को तमाम विश्व नेताओं की मौजूदगी में आयोजित किया गया जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव बान की-मून भी शामिल थे। नरेन्द्र मोदी भारत-आसियान सम्मेलन में भाग लेने आए थे।

  • प्रस्तावित आसियान इकोनॉमिक कम्यूनिटी (AEC) को आसियान क्षेत्र में एक एकल बाजार स्थापित करने के उद्देश्य से स्थापित किया जायेगा जिससे इस बेहद प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में सामान-उत्पादों की आवाजाही सुगम हो तथा कुशल कारीगरों का स्थानांतरण आसान हो। इस आर्थिक ब्लॉक के तहत 62 करोड़ की विशाल जनसंख्या तथा कुल 2.4 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के बाजार को एक सूत्र में बाँधा जा सकेगा।
  • आसियान (दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संगठन – Association of Southeast Asian Nations) में शामिल 10 देश हैं – ब्रुनेई, कम्बोडिया, इण्डोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपीन्स, सिंगापुर, थाईलैण्ड और वियतनाम।

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