बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 103

Site Administrator

Editorial Team

29 Nov, 2015

6538 Times Read.

बैंकिंग जागरूकता,


RSS Feeds RSS Feed for this Article



Read this in English

Raghuram-Rajan-2015

1) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) को 10 नवम्बर 2015 को बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेण्ट – (BIS) का नया उपाध्यक्ष (Vice President) नियुक्त किया गया। इस प्रकार वे इस प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था के उपाध्यक्ष बनने वाले RBI के पहले गवर्नर बन गए। बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेण्ट कहाँ स्थित है? – बेसल (स्विटज़रलैण्ड)

विस्तार: स्विटज़रलैण्ड के बेसल (Basel) नगर में स्थित बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेण्ट (BIS) विश्व के समस्त केन्द्रीय बैंकों में परस्पर सहयोग बढ़ाने तथा वैश्विक मौद्रिक एवं वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके निदेशक मण्डल में सभी केन्द्रीय बैंकों के प्रमुखों को स्थान दिया जाता है।

  • रघुराम राजन, जो काफी लम्बे समय से विश्व के समस्त केन्द्रीय बैंकों में परस्पर सहयोग बढ़ाने की वकालत करते आए हैं, को तीन वर्ष की समयावधि के लिए BIS का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्हें 2013 में उस समय RBI का गवर्नर बनाया गया था जब भारतीय मुद्रा समस्याओं का सामना कर रही थी तथा वे कुछ ही समय में इसको उबारने में सफल रहे थे।

Zarin-Daruwala-StanChart-2015

2) आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) की किस महिला अधिकारी को स्टैण्डर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) ने किसे अपने भारतीय संचालन का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है? – ज़रीन दारूवाला

विस्तार: ज़रीन दारूवाला (Zarin Daruwala) अभी तक आईसीआईसीआई बैंक के होलसेल बैंकिंग व्यवसाय (wholesale banking business) की प्रेसीडेण्ट (President) के रूप में कार्यरत थीं तथा उन्होंने स्टैण्डर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त होने के बाद इस पद से 17 नवम्बर 2015 को इस्तीफा दे दिया।

  • 50-वर्षीया ज़रीन दारूवाला चार्टर्ड एकाउण्टेंट (CA) तथा कम्पनी सेक्रेटरी (CS) हैं। उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के पूर्ववर्ती स्वरूप आईसीआईसीआई लिमिटेड (ICICI Limited) को 1989 में एक मैनेजमेण्ट ट्रेनी के तौर पर ज्वाइन किया था तथा 1994 में एक बैंक बनने वाले इस प्रतिष्ठान के लगभग सभी प्रमुख भागों में उन्होंने अपनी भूमिका निभाई है।
  • स्टैण्डर्ड चार्टर्ड भारत में कार्यरत सबसे पुराना विदेशी बैंक है। ज़रीन दारूवाला ऐसे समय में स्टैण्डर्ड चार्टर्ड में शामिल हो रहीं है जब बैंक तमाम समस्याओं से गुज़र रहा है। ये विश्व भर में कार्यरत अपने 15,000 कर्मचारियों की छंटनी कर रहा है तथा भारत में कुछ लोगों को भी काम से हटाया जा रहा है।

3) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 19 अक्टूबर 2015 को की गई घोषणा के अनुसार केन्द्र सरकार ने सबसे लम्बी समयावधि की सरकारी प्रतिभूतियों (govt. securities) को जारी करने की योजना बनाई है। इन प्रस्तावित प्रतिभूतियों का परिपक्वता (मैच्योरिटी) काल कितना होगा, जोकि सरकार द्वारा जारी प्रतिभूतियों के लिए सर्वाधिक होगा? – 40 वर्ष

विस्तार: 40 वर्ष की परिपक्वता काल की इन सरकारी प्रतिभूतियों (govt. securities or G-secs) को जारी करने से सरकार को देश के विकास के लिए धन अपेक्षाकृत कम मूल्य पर हासिल हो सकेगा। अभी तक सरकार द्वारा जारी ऐसी प्रतिभूतियों का अधिकतम परिपक्वता काल 30 वर्ष है।

  • इन 40-वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियों के सम्बन्ध में एक अहम तथ्य यह है कि सरकार ने इन्हें जारी करने के लिए ऐसे समय का चुनाव किया है जब ब्याज दर नीचे आने का सिलसिला चल रहा है। इसके अलावा यह ऐसे समय में किया जा रहा है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों की सीमा को बढ़ाने का फैसला किया है। इसके चलते दीर्घ-कालिक विदेशी निवेशक जैसे पेंशन फण्ड्स, सॉवरिन फण्ड्स तथा बीमा कम्पनियों को आकर्षित करने में सरकार को सफलता मिल सकती है।
  • उल्लेखनीय है कि ऐसे निवेशक अपने निवेश का काफी बड़ा हिस्सा 20, 30, 40 तथा इससे अधिक समयावधि की सरकारी प्रतिभूतियों में निवेशित करते हैं।
  • RBI के आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक सबसे लम्बी समयावधि की सरकारी प्रतिभूतियों की समयावधि 30-साल की है तथा ये जून 2045 में परिपक्व होंगी।

swachh-swachh-Cess

4) केन्द्र सरकार ने सेवाओं (services) पर कितने प्रतिशत स्वच्छ भारत अधिभार (Swachh Bharat Cess) लागू किए जाने की घोषणा 6 नवम्बर 2015 को की? – 0.5%

विस्तार: 0.5% का यह स्वच्छ भारत अधिभार (Swachh Bharat Cess) उन सभी सेवाओं पर लगाया जायेगा जिनपर वर्तमान पर सेवा कर (service tax) लगाया जा रहा है। स्वच्छ भारत अधिभार 15 नवम्बर 2015 से प्रभावी होगा तथा इसके तहत एकत्रित धन को सिर्फ स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े कार्यों पर किया जायेगा।

  • इसके अलावा केन्द्र सरकार ने भारत से संचालित अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं तथा मेट्रो व बड़े शहरों के बीच संचालित उड़ानों पर 2% क्षेत्रीय कनेक्टिविटी अधिभार (regional connectivity cess) लगाने की घोषणा भी की। इस अधिभार को 1 जनवरी 2016 से लागू किया जायेगा तथा इसके द्वारा एकत्रित धनराशि के द्वारा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी कोष (Regional Connectivity Fund – RCF) स्थापित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना को 1 अप्रैल 2016 से लागू किया जा रहा है।

5) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 15 अक्टूबर 2015 को वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बल देने के लिए एक नया कोष – फाइनेंशियल इन्क्ल्यूशन फण्ड (Financial Inclusion Fund – FIF) स्थापित करने की घोषणा की। इस नवगठित कोष के तहत कितनी निधि रखी जायेगी? – रु. 2,000 करोड़

विस्तार: फाइनेंशियल इन्क्ल्यूशन फण्ड (FIF) की स्थापना देश में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) तथा इससे सम्बन्धित अनुसंधान को बल देने तथा प्रौद्यौगिकी हस्तांतरण (technology transfer) के लिए की जायेगी। इसके द्वारा देश में वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को बल मिलेगा तथा लोगों में इसके सम्बन्ध में जागरूकता फैलाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सम्बन्धित तकनीकों के विकास के लिए अनुसंधान पर जोर दिया जायेगा। हालांकि इस कोष का प्रयोग बैंकिंग तथा अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जायेगा।

  • उल्लेखनीय है कि इस वित्तीय समावेशन के लिए आरबीआई अभी तक दो तरह के कोषों का संचालन कर रहा था – फाइनेंशियल इन्क्ल्यूशन फण्ड (Financial Inclusion Fund) तथा फाइनेंशियल इन्क्ल्यूशन टैक्नोलॉजी फण्ड (Financial Inclusion Technology Fund)। अब RBI ने निर्णय लिया है कि इन दोनों कोषों का विलय कर इसे फाइनेंशियल इन्क्ल्यूशन फण्ड (FIF) के नाम से ही पुकारा जायेगा। इस कोष का प्रयोग अगले तीन वर्ष अथवा इस योजना में शामिल समस्त भागीदारों द्वारा लिए अगले गए निर्णय तक किया जाने का प्रस्ताव है।
  • फाइनेंशियल इन्क्ल्यूशन फण्ड का प्रशासन केन्द्र सरकार द्वारा एक पुनर्गठित सलाहकार बोर्ड द्वारा किया जायेगा जबकि इसका संचालन व प्रबन्धन नाबार्ड (NABARD) द्वारा किया जायेगा।

6) वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज़ (Moody’s) ने 1 नवम्बर 2015 को जारी एक रिपोर्ट में भारतीय बैंकिंग प्रणाली की आउटलुक को नकारात्मक (negative) से संतुलित (stable) कर दिया है। ऐसा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में पिछले कुछ समय से उठाए जाने वाले सुधारात्मक उपायों के चलते किया गया है। इस एजेंसी ने कब से भारतीय बैंकिंग प्रणाली की आउटलुक को नकारात्मक रखा हुआ था? – नवम्बर 2011 से

विस्तार: उल्लेखनीय है कि मूडीज़ ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली (Indian Banking System) से सम्बन्धित अपनी आउटलुक को नवम्बर 2011 से लगातार “नकारात्मक” (‘negative’) बनाया हुआ था। इसका मुख्य कारण भारतीय बैंकों की परिसम्पत्तियों की गुणवत्ता कमतर (घटिया) होना था। लेकिन एजेंसी ने अब स्वीकार किया है कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली में सुधारात्मक उपाय अपनाये जा रहे हैं।

  • 1 नवम्बर 2015 को जारी अपनी नवीनतम रिपोर्ट “”Banking System Outlook — India: Gradual Improvement in Operating Environment Drives Stable Outlook” में मूडीज़ ने जिक्र किया कि उसने आगामी 1 से डेढ़ साल की समयावधि के लिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली की आउटलुक को “नकारात्मक” से सुधार कर “संतुलित” इसलिए किया है क्योंकि भारतीय बैंकों के परिचालन सम्बन्धी माहौल तथा परिसम्पत्तियों की गुणवत्ता में कुछ सुधार दिखना शुरू हो गया है। हालांकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि सुधार की यह रफ्तार बहुत तेज परिणाम देती हुई भी नहीं दिख रही है।

7) निजी क्षेत्र के किस बैंक ने 27 अक्टूबर 2015 को दावा किया कि वह गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी (गिफ्ट-सिटी – GIFT City) में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाला पहला बैंक बन गया है? – यस बैंक

विस्तार: यस बैंक (Yes Bank) ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक सिटी (गिफ्ट-सिटी) में अपनी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं (International Financial Services) शुरू करने की घोषणा 27 अकटूबर को की। साथ ही उसने दावा किया कि वह गिफ्ट-सिटी में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं से सम्बन्धित बैंकिंग इकाई (IFSC Banking Unit) शुरू करने वाले पहला बैंक है।

  • उल्लेखनीय है कि गिफ्ट सिटी को भारत के पहले अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र (International Financial Services Centre – IFSC) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसे जापान के शिंजुकु (Shinjuku), चीन के शंघाई (Shanghai) और लंदन के लंदन डॉकयार्ड्स (London Dockyards) की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।
  • लगभग 886 एकड़ क्षेत्र में फैला गिफ्ट सिटी प्रधानमंत्री की अत्यंत महात्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है जिसके तहत गुजरात की राजधानी गाँधीनगर के पास वर्ष 2026 तक लगभग 78,000 करोड़ का निवेश करने का लक्ष्य रखा गया है।

8) रिलयांस कैपिटल एसेट मैनेजमेण्ट (Reliance Capital Asset Management – RCAM) ने किस सुप्रसिद्ध वैश्विक वित्तीय समूह के भारतीय म्यूचुअल फण्ड व्यवसाय को खरीदने की घोषणा 21 अक्टूबर 2015 को की जिसके चलते वह केन्द्र सरकार के महात्वाकांक्षी केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के एक्सचेंज ट्रेडेट फण्ड (CPSE – ETF) का एक्सक्लूसिव फण्ड मैनेजर बन जायेगी? – गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs)

विस्तार: 21 अक्टूबर 2015 को की गई घोषणा के अनुसार रिलयांस कैपिटल एसेट मैनेजमेण्ट (RCAM) गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेण्ट इण्डिया (Goldman Sachs Asset Management India) का अधिग्रहण 243 करोड़ रुपए के पूर्ण नकद सौदे में कर लेगा। इससे RCAM को गोल्डमैन सैक्स के भारतीय म्यूचुअल फण्ड व्यवसाय की सभी 12 म्यूचुअल फण्ड योजनाओं का नियंत्रण हासिल हो जायेगा जिसके पास लगभग 7132 करोड़ रुपए की प्रबन्धकीय परिसम्पत्तियाँ (asset under management – AUM) हैं।

  • इस सौदे की खास बात यह होगी कि इससे RCAM को भारत सरकार के केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड (Central Public Sector Enterprises (CPSE) Exchange Traded Fund) (यानि CPSE – ETF) के एक्सक्लूसिव फण्ड मैनेजर बनने का अधिकार मिल जायेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि केन्द्र सरकार ने CPSE- ETF प्रबन्धन का काम गोल्डमैन सैक्स को ही सौंपा था। उस ETF के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेच कर केन्द्र सरकार ने अब तक लगभग 4,000 करोड़ रुपए अर्जित कर लिए हैं।
  • RCAM अनिल अम्बानी के नियंत्रण वाले अनिल धीरूभाई अम्बानी रिलायंस समूह का हिस्सा है।
  • उल्लेखनीय है कि गोल्डमैन सैक्स ने वर्ष 2011 में बेंचमार्क म्यूचुअल फण्ड (Benchmark Mutual Fund) का 120 करोड़ रुपए में अधिग्रहण कर भारतीय म्यूचुअल फण्ड बाजार में प्रवेश किया था।
  • गोल्डमैन सैक्स भारतीय म्यूचुअल फण्ड बाजार को छोड़ने वाली तमाम विदेशों कम्पनियों की कड़ी में नवीनतम कम्पनी बन गई है। इससे पहले स्टैण्डर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered), फिडेलिटी (Fidelity), मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley), आईएनजी (ING), पाइनब्रिज (PineBridge) और डोइश बैंक (Deutsche Bank) भी भारतीय म्यूचुअल फण्ड क्षेत्र में अपनी-अपनी हिस्सेदारियाँ बेचकर जा चुके हैं।

9) बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के साथ लिस्टिंग सम्बन्धी नया करार कर 27 अक्टूबर 2015 को कौन सी कम्पनी देश की पहली कम्पनी बन गई जिसने SEBI द्वारा जारी लिस्टिंग सम्बन्धी नए दिशानिर्देशों के अनुसार स्टॉक एक्सचेंज के साथ नया करार किया है? – रिलायंस इण्डस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL)

विस्तार: उल्लेखनीय है कि सितम्बर 2015 के दौरान भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने लिस्टिंग सम्बन्धी नए दिशानिर्देश जारी किए थे जिसके तहत कम्पनियों को स्टॉक एक्सचेंजों के साथ लिस्टिंग सम्बन्धी नया करार 6 माह के भीतर करना अनिवार्य था।

  • अभी तक लिस्टिंग सम्बन्धी करार कम्पनी तथा स्टॉक एक्सचेंज के बीच द्विपक्षीय करार होता था जिसमें देश के पूँजी बाजार नियामक SEBI की कोई भूमिका नहीं होती थी। इसके चलते प्रत्येक कम्पनी का स्टॉक एक्सचेंज के साथ अलग प्रकार का करार होता था तथा इसके चलते SEBI को अपने नियमों का अनुपालन कराने में समस्या का सामना करना पड़ता था।
  • अब मुकेश अम्बानी (Mukesh Ambani) के नेतृत्व वाली रिलायंस इण्डस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) देश की पहली कम्पनी बन गई जिसने नए लिस्टिंग दिशानिर्देशों के अनुसार BSE के साथ नया करार किया है।
  • SEBI ने इस नए दिशानिर्देश को 2 सितम्बर 2015 को जारी किया तथा तथा इसे 1 दिसम्बर 2015 से प्रभाव में लाया जा रहा है।

Railway-LIC2015

10) भारतीय रेलवे (Indian Railways) को 27 अक्टूबर 2015 को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने दीर्घ-कालिक वित्त-पोषण (long-term funding) के करार के तहत 2,000 करोड़ रुपए की पहली किश्त प्रदान की। LIC भारतीय रेल की क्षमता विस्तार के उद्देश्य से कुल कितनी राशि दीर्घ-कालिक वित्त-पोषण समझौते के तहत प्रदान कर रहा है? – 1.5 लाख करोड़ रुपए

विस्तार: LIC ने 27 अक्टूबर को 2,000 करोड़ रुपए का पहला चेक भारतीय रेल वित्त निगम (IRFC) को प्रदान किया जिसके लिए LIC तथा भारतीय रेल के बीच मार्च 2015 में समझौता हुआ था।

  • इस समझौते के तहत LIC भारतीय रेल को अपनी क्षमता विस्तारीकरण के उद्देश्य से कुल 1.5 लाख करोड़ रुपए की राशि प्रदान करेगा। इसके एवज में भारतीय रेल के IRFC जैसे उपक्रम LIC को बाण्ड जारी करेंगे। इन बाण्डों पर ब्याज तथा ऋण वापसी की 5 वर्ष की विशेष छूट LIC ने प्रदान की है।
  • उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल पिछले काफी समय से अपनी तमाम परियोजनाओं को लटकाए हुए है क्योंकि इन परियोजनाओं के वित्त-पोषण के लिए उसके पास अपेक्षित मात्रा में वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
  • रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वित्त-पोषण की इस गंभीर समस्या को देखते हुए इस वर्ष के रेल बजट में संस्थागत वित्त के रूप में अतिरिक्त बजटीय संसाधनों की सहायता लेने की बात कही थी। इसी के तहत LIC के साथ यह महात्वाकांक्षी करार किया गया था।

| Current Affairs | Banking Awareness | SBI | RRB | SBI | IBPS | Banking | GK | Banking| Hindi Banking Awareness|


Responses on This Article

© NIRDESHAK. ALL RIGHTS RESERVED.