बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 101

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17 Oct, 2015

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बैंकिंग जागरूकता,


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Small-Banks-2-2015

1) देश में बैंकिंग क्रांति की ओर एक और कदम उठाते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 16 सितम्बर 2015 को 10 प्रतिष्ठानों को छोटे वित्तीय बैंक (Small Financial Bank) खोलने की सैद्धांतिक अनुमति प्रदान कर दी। यह बैंक मुख्यत: छोटे तथा बैंकिंग सेवाओं से हीन स्थानों पर अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। छोटे बैंक खोलने की अनुमति वाले ये प्रतिष्ठान कौन से हैं? – 1) Au Financiers, 2) Capital Local Area Bank, 3) Disha Microfin, 4) Equitas Holdings, 5) ESAF Microfinance, 6) Janalakshmi Financial Services, 7) RGVN (North East) Microfinance, 8) Suryoday Micro Finance, 9) Ujjivan Financial Services 10) Utkarsh Micro Finance

विस्तार: इन छोटे बैंकों को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान करने के लिए तीन विभिन्न समितियों की सिफारिश को संज्ञान में लिया गया। इन समितियों में सर्वप्रमुख समिति RBI की पूर्व उप-गवर्नर ऊषा थोराट (Usha Thorat) की अध्यक्षता में गठित की गई थी। इन बैंकों से सम्बन्धित प्रस्तावित दिशानिर्देशों (draft guidelines) को 14 जुलाई 2014 को जारी किया गया था तथा इस सम्बन्ध में तमाम पक्षों की राय मांगी गई थी। इसके आधार पर छोटे बैंकों के अंतिम नियमों (final norms) को 27 नवम्बर 2014 को जारी किया गया था। छोटे बैंकों को मुख्यत: बैंकिंग सेवाओं से हीन स्थानों पर सेवाएं देने के उद्देश्य से स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि देश में वित्तीय क्षेत्र के सुधार से सम्बन्धित रघुराम समिति (Committee on Financial Sector Reforms) ने वर्ष 2009 में देश में छोटे बैंकों की संकल्पना तथा प्रासंगिकता के बारे में समीक्षा की थी।


RBI-New-2015

2) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने 29 सितम्बर 2015 को प्रस्तुत वर्ष 2015-16 चौथी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (4th Bi-monthly Monetary Policy Statement 2015-16) में रेपो दर (Repo Rate) में 50 आधार अंकों (basis points) की भारी भरकम कमी करने की घोषणा की। इससे पहले RBI ने एक बार में 50 आधार अंकों की कमी कब की थी? – 4 मार्च 2009 को

विस्तार: 4 मार्च 2009 को आरबीआई ने तत्कालीन 5.50% की रेपो दर को घटाकर 5.00% कर दिया था तथा इसके बाद एक साथ रेपो दर में 50 आधार अंकों की कमी इस बार ही की गई है। यह कटौती इस 2015 की चौथी कटौती है जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान तीसरी कटौती है। इसके साथ इस वित्तीय वर्ष अब तक रेपो दर में 100 आधार अंकों की कमी की की जा चुकी है। रेपो दर वह महत्वपूर्ण दर होती है जिसपर आरबीआई बैंकों को लघु-कालिक ऋण प्रदान करता है। इसलिए इस दर को ब्याज दर तय करने हेतु सबसे महत्वपूर्ण दर माना जाता है। उल्लेखनीय है कि देश का कॉरपोरेट जगत तथा वित्त मंत्रालय दोनों ने RBI से रेपो दरों में कमी करने की अपील की थी लेकिन संभवत: किसी को आशा नहीं थी कि गवर्नर रघुराम राजन एक बार में 50 आधार अंकों की कटौती कर देंगे। उद्योग जगत तेज वृद्धि के रास्ते पर चलने को बेकरार है लेकिन पिछली कटौतियों का लाभ बैंकों द्वारा उपभोक्ताओं तक न पहुँचाने कारण उसके हाथ बंधे रह जाते हैं। इसी को देखते हुए RBI गवर्नर ने बैंकों से यह अपील भी की वे ब्याज दरों में कमी का उचित फायदा ग्राहकों तक अवश्य पहुँचाए। देश के वित्तीय बाजारों ने रेपो दर में कमी का जोरदार इस्तकबाल किया और सुबह BSE का संवेदी सूचकांक (Sensex) 300 अंकों की गिरावट के स्थान पर बाजार बंदी तक 162 अंकों के लाभ की स्थिति में पहुँच गया।

चौथी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (2015-16) के मुख्य बिन्दु

  • रेपो दर को 50 आधार अंक घटा कर 6.75% किया गया
  • रिवर्स रेपो दर घट कर 5.75% हुई
  • कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) को 4% के स्तर पर पूर्ववत रखा गया
  • वर्ष 2015-16 के दौरान विकास दर अनुमान को 7.6% से घटा कर 7.4% किया गया
  • सरकारी बाण्डों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की सीमा को वर्ष 2018 तक 5% तक बढ़ाए जाने की घोषणा

SBI-Logo-2015

3) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो दर (Repo rate) में कमी की घोषणा के तुरंत बाद देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी आधार दर – Base Rate (यानि न्यूनतम ब्याज दर) में 0.4% कमी करने की अहम घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद SBI की नई आधार दर क्या हो जायेगी? – 9.3%

विस्तार: RBI द्वारा रेपो दर में कमी की घोषणा के कुछ ही समय बाद SBI ने अपनी आधार दर में 0.4% की कमी कर इसे 9.3% करने की घोषणा कर दी। यह नई दर 5 अक्टूबर 2015 से प्रभाव में आयेगी तथा इस कमी के चलते बैंक द्वारा प्रदत्त सभी प्रकार के ऋणों, जैसे गृह ऋण (Home Loan), वाहन ऋण (Auto Loan), कॉरपोरेट ऋण (Corporate Loan), आदि में कम से कम 0.4% की कमी आ जायेगी। इसके चलते SBI की आधार दर बाजार में सबसे कम हो गई हैं। इस प्रकार अपनी आधार दर में कमी कर SBI ने अन्य वाणिज्यिक बैंकों को ऐसा करने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया।


IDFC-Bank-2015

4) कौन सा निजी क्षेत्र का बैंक (private bank) 1 अक्टूबर 2015 से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र का हिस्सा बन गया जब इसने इस दिन से कुल 23 शाखाओं से अपना बैंकिंग व्यवसाय शुरू किया? – आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank)

विस्तार: आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank) 1 अक्टूबर को भारत के बैंकिंग क्षेत्र का सबसे नया खिलाड़ी हो गया जब इसने मुख्यत: मध्य प्रदेश, मुम्बई और दिल्ली में फैली 23 बैंक शाखाओं से अपना बैंकिंग व्यवसाय शुरू कर दिया। IDFC बैंक इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में वित्त पोषण करने में संलग्न संस्था IDFC (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेण्ट फाइनेंस कम्पनी – Infrastructure Development Finance Company) का हिस्सा है। यह बैंक प्रारंभ में होलसेल बैंकिंग (wholesale banking) से बैंकिंग व्यवसाय में उतर रहा है तथा आशा है कि जनवरी 2016 से यह रिटेल (retail banking) तथा लघु व मध्यम उद्योगों से सम्बन्धित बैंकिंग (SME banking) में भी उतर जायेगा। पिछले साल आईडीएफसी (IDFC) और बंधन (Bandhan) को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग लाइसेंस प्रदान किए थे तथा इन दोनों संस्थाओं ने 20 अन्य संस्थाओं को बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने की जंग में पराजित किया था। बंधन ने अपने बैंकिंग व्यवसाय की शुरूआत अगस्त में ही कर दी थी। इस प्रकार आईडीएफसी बैंक (IDFC Bank) और बंधन बैंक (Bandhan Bank) वर्ष 2015 के दौरान भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के सबसे नए-नवेले खिलाड़ी बन गए हैं।


5) भारत के कमोडिटी बाजारों (commodities markets) की उस 60 वर्ष पुरानी नियामक संस्था (regulatory body) का क्या नाम है जिसका विलय 28 सितम्बर 2015 को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) में कर दिया गया? – फार्वर्ड मार्केट्स कमीशन (Forward Markets Commission – FMC)

विस्तार: मुम्बई में 28 सितम्बर 2015 को आयोजित एक कार्यक्रम में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा परंपरागत स्टॉक मार्केट घण्टी बजाकर फार्वर्ड मार्केट्स कमीशन (FMC) के SEBI में विलय की रस्म अदा की गई। यह भारत में दो प्रमुख नियामक संस्थाओं का अपनी तरह का पहला विलय है तथा खास बात यह है कि यह विलय ऐसे समय में हुआ है जब नई नियामक संस्थाओं को बनाने पर विश्व-भर में अधिक जोर दिया जा रहा है। इस विलय के बाद अब देश में कमोडिटी बाजारों में संलग्न व्यवसायों को नए नियमों के साथ तालमेल स्थापित करने के लिए एक वर्ष की समयावधि दी जायेगी ताकि वे लगभग एक्विटी बाजार जैसे नियमों के साथ अपना तारम्य स्थापित कर सकें। इस विलय का विचार सर्वप्रथम पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने दिया था लेकिन इस विलय की आधिकारिक घोषणा वर्ष 2014-15 के केन्द्रीय बजट में की गई थी। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि यह विलय नेशनल स्पॉट एक्सजेंज लिमिटेड (National Spot Exchange Ltd. – NSEL) से सम्बन्धित धोखाधड़ी मामले के कारण इस विलय की जमीन तैयार होनी शुरू हुई थी क्योंकि उस मामले में FMC कि शिथिलता को उसके नियामक-सम्बन्धी कर्तव्यों की अवहेलना माना गया था। FMC यों तो वर्ष 1953 से भारत के कमोडिटी बाजारों की नियामक संस्था के रूप में कार्य कर रहा था लेकिन उसके पास शक्तियों की कमी होने के कारण देश के कमोडिटी बाजारों में अनियमतताएं तथा मूल्यों में भारी उतार-चढ़ाव अकसर देखने को मिलता था।


6) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 24 सितम्बर 2015 को ऋण लेने वाली इकाइयों/प्रतिष्ठानों के स्वामित्व सम्बन्धी नियमों (ownership norms) में नए दिशानिर्देशों (guidelines) की घोषणा कर दी। इसके अनुसार अब बैंकों को इन इकाइयों/प्रतिष्ठानों के स्वामित्व में परिवर्तन होने की स्थिति में उनको प्रदत्त क्रेडिट सुविधाओं को अपडेट करने की अनुमति होगी यदि स्वामित्व में किया गया परिवर्तन “स्ट्रैटेजिक डेब्ट रिस्ट्रक्चरिंग योजना” (‘Strategic Debt Restructuring Scheme’) की परिधि के बाहर है। इस नए दिशानिर्देश से बैंकों को क्या अहम लाभ हासिल होगा? – इससे बैंकों को समस्याओं का सामना कर रहीं इकाइयों/प्रतिष्ठानों के स्वामित्व में परिवर्तन (change in ownership) करने में अधिक आसानी मिलेगी

विस्तार: इससे बैंकों को ऐसी संकटग्रस्त इकाइयों/प्रतिष्ठानों के स्वामित्व में बदलाव करने में आसानी मिलेगी जो संचालन अथवा प्रबन्धकीय अक्षमताओं के कारण संकट में आए हैं तथा ऋण प्रदान करने वाले बैंकों द्वारा सहायता प्रदान किए जाने के बावजूद उबरने में असफल रहे हैं। हालांकि RBI ने इस नए दिशानिर्देश के साथ एक अहम शर्त भी लगाई है – बैंकों को ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी इकाइयों/प्रतिष्ठानों का स्वामित्व ऐसे लोगों को न मिले जो प्रमोटर समूह से जुड़े हों। इसके अलावा नए प्रमोटर की ऋण लेने वाली इन इकाइयों/प्रतिष्ठानों में कम से कम 51% हिस्सेदारी चुकता पूँजी (paid up equity capital) में हो।


7) केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (Minimum Alternate Tax – MAT) से सम्बन्धित क्या महत्वपूर्ण तथा नई छूट (exemption) की घोषणा 24 सितम्बर 2015 को की? – उसने भारत में बिना किसी स्थायी स्थापना (with no permanent establishment) के कार्यरत विदेशी कम्पनियों को वर्ष 2001-02 से MAT से छूट देने की घोषणा की

विस्तार: इस छूट की घोषणा का अर्थ हुआ कि भारत में संचालित ऐसी विदेशी कम्पनियाँ जो बिना किसी स्थायी स्थापना अथवा स्थल के अपना व्यवसाय कर रही हैं, वे अब अप्रैल 2001 से MAT की परिधि में नहीं आयेंगी। इस घोषणा के साथ वित्त मंत्रालय ने विदेशी पार्टफोलियो निवेशकों (foreign portfolio investors – FPIs) को MAT सम्बन्धी एक बड़ी राहत दी है। इससे मॉरिशस की कम्पनी केसलटन (Castleton) को भी बड़ी राहत मिली है जिसका MAT सम्बन्धी मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके अलावा सरकार ने MAT के बारे यह घोषणा भी की है कि उन कम्पनियों को भी MAT की परिधि से बाहर रखा जायेगा जिनके देशों की भारत सरकार के साथ डबल टैक्स एवॉयडेंस संधि (double tax avoidance agreement – DTAA) है। इसके बारे में सरकार भारतीय आयकर अधिनियम की धारा II5 JB में रेट्रोस्पेक्टिव प्रभाव वाले संशोधन का प्रस्ताव भी रखेगी। उल्लेखनीय है कि MAT में बारे में इस घोषणा से पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने निवेशकों के साथ एक बैठक की थी तथा इसमें कर सम्बन्धी विवादों को जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया था।


8) केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 25 सितम्बर 2015 को की गई घोषणा के अनुसार चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत सूक्ष्म (micro) तथा सीमांत (marginal) व्यवसायियों को कितनी आर्थिक सहायता प्रदान करने का लक्ष्य बनाया है?- 1.22 लाख करोड़

विस्तार: उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत संकल्पित मुद्रा (MUDRA) नामक संकल्पना को 5,000 करोड़ रुपए की प्रारंभिक पूँजी के साथ सिडबी का सहयोगी बनाया गया है। वित्त मंत्री द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार सरकार ने अब तक इस योजना के तहत 24,000 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता लघु व्यवसायियों को प्रदान कर दी है। PMMY के तहत प्रदत्त ऋणों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है – शिशु (रु. 50,000 तक), किशोर (50,000 से 5 लाख रुपए तक) तथा तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपए तक)।


9) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 22 सितम्बर 2015 को अवैध रूप से जनता से पैसा इकट्ठा करने के आरोप में किस कम्पनी पर 7,269.5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा दिया क्योंकि, जोकि SEBI द्वारा लगाया लगा अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है? – पीएसीएल (PACL)

विस्तार: 22 सितम्बर 2015 को दिए अपने आदेश में SEBI ने कहा कि PACL ने अवैध तरीके से भारी मात्रा में धन जनता से एकत्र कर एक साल से भी कम अवधि में 2,423 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। उसने कहा कि भारी अर्थदण्ड लगाए जाने का इससे बेहतर मामला नहीं हो सकता है तथा उसने PACL तथा उसके चार निदेशकों पर 7,269.5 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना लगा दिया। यह SEBI के इतिहास में किसी एक संस्था पर लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है। इससे पहले पिछले साल (2014 में) SEBI ने PACL को निर्देश दिया था कि वह जनता से एकत्रित 49,100 करोड़ की राशि वापस कर दे जो उसने 15 वर्ष की समयावधि के दौरान जनता से अवैध योजनाओं के माध्यम से एकत्र की थी। इस सम्बन्ध में SEBI की जाँच में यह तथ्य सामने आया था कि PACL तथा उसके चार निदेशक – तरलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रत भट्टाचार्य ने कृषि भूमि को खरीदने तथा विकसित करने जैसी तमाम अवैध योजनाओं के नाम पर जनता से भारी मात्रा में धन एकत्र किया था। यह कम्पनी जमीन खरीदने की योजना चलाती थी जिसके लिए लोगों से धन जमा किया जाता था। 15 वर्ष के दौरान कम्पनी ने लगभग 5.85 करोड़ लोगों से 49,100 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त की थी। लोगों को यह झासा दिया गया था कि कम्पनी में धन जमा करने पर अप्रत्याशित लाभ मिलेगा। यह देश में अवैध रूप से धन जमा करने का तथा इतने अधिक लोगों को जोड़ने का अब तक का सबसे बड़ा मामला है। लोगों से जमा धन को बजाए निवेश करने के सिर्फ कुछ निवेशकों को वापसी करने में यह कम्पनी लिप्त थी।


10) कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation – EPFO) के सदस्यों के आश्रितों को मिलने वाली बीमा सहायता को 16 सितम्बर 2015 को कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन की केन्द्रीय ट्रस्टी बोर्ड (Central Board of Trustees) की बैठक में बढ़ाकर 6 लाख रुपए की घोषणा की गई। अभी तक EPFO आश्रितों के लिए यह सहायता राशि कितनी थी? – 3.6 लाख रुपए

विस्तार: कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (EPFO) के सदस्यों के आश्रितों (dependents) को यह लाभ इम्प्लॉईज़ डिपॉज़िट लिंक्ड इंश्योरेंस योजना, 1976 (Employees Deposit Linked Insurance Scheme, 1976) के तहत प्रदान किया जाता है। एक अनुमान के अनुसार आश्रितों को मिलने वाले बीमा लाभ की राशि बढ़ाए जाने का लाभ EPFO से सम्बन्ध लगभग 4 करोड़ कर्मचारियों को मिलेगा। उल्लेखनीय है कि EPFO के सदस्यों की मृत्यु होने पर यह बीमा लाभ उनके आश्रितों को देने का प्रावधान है। इसके अलावा इस बैठक में यह फैसला भी लिया गया कि अब इस बीमा योजना का लाभ मिलने के लिए वर्तमान नियोक्ता (employer) के यहाँ एक साल निरंतर काम करने की बाध्यता को भी समाप्त कर दिया गया। अब किसी नियोक्ता के यहाँ मात्र एक दिन काम करने पर इस बीमा योजना का लाभ के सदस्य को प्राप्त होगा।


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