बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 45

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22 Dec, 2013

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बैंकिंग जागरूकता,


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New-Bank-Licences

1) यशवंत सिन्हा के नेतृत्व वाली संसद की वित्त पर गठित स्थायी समिति (Standing Committee on Finance) ने जल्द ही घोषित किए जाने वाले नए बैंक लाइसेंस के बारे में केन्द्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक को क्या सुझाव दिया है? – इस समिति ने सुझाव दिया है कि औद्यौगिक समूहों को बैंक लाइसेंस देने से परहेज करना चाहिए (समिति का मानना है कि चूंकि बैंकिंग में जनता का धन शामिल होता है और यह जन-कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला क्षेत्र है इसलिए यह आवश्यक है कि बैंकिंग और व्यवसाय को अलग रखा जाय। स्थायी समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण से पहले जैसी स्थितियां पुन: नहीं बनायी जानी चाहिए जब निजी बैंकों का प्रबन्धन अपने स्वयं के व्यवसायों के लिए ऋण उपलब्ध कराने में कोई हिचक नहीं दिखाता था और केन्द्र सरकार की सामाजिक प्राथमिकताओं से कोई सरोकार नहीं रखता था)

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2) अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (AIBEA) द्वारा हाल ही में जारी की गई बैंक से लिए कर्जों का भुगतान न कर पाने वाले बड़े बकायेदारों की सूची से इस बात का खुलासा हुआ कि देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर) की 25% गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियों (non-performing assets – NPAs) में 50 कार्पोरेट कम्पनियों की भूमिका है। इस सूची में सबसे ऊपर किस कार्पोरेट कम्पनी को रखा गया है जिसका बकाया सर्वाधिक है? – किंगफिशर एयरलाइन्स (विजय माल्या के स्वामित्व वाली इस एयरलाइन का बकाया ऋण रु. 2,673 करोड़ है। इस सूची में दूसरे स्थान पर विनसम डायमण्ड है जिसका बकाया उधार रु. 2,660 करोड़ रुपए है तथा तीसरे स्थान पर इलेक्ट्रोथर्म इण्डिया है (रु. 2,211) करोड़। भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (SBI को छोड़कर) की कुल गैर-निष्पादित परिसपत्तियाँ रु. 1,64,461 करोड़ थीं। इसमें से 50 सबसे बड़े कारपोरेट बकायेदारों का बकाया रु. 40,528 करोड़ था। इस सूची को जारी करते समय AIBEA का कहना था कि चूंकि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) तथा सरकार इन बकायेदारों का विवरण प्रकाशित नहीं करते हैं इसलिए वह नियमित रूप से इस सम्बन्ध में जानकारियां प्रकाशित करेगा)

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3) किस संस्था ने लघु वित्त संस्थाओं (microfinance institutions – MFIs) के लिए एक क्रेडिट इंफोरमेशन ब्यूरो स्थापित करने की योजना का खुलासा 3 दिसम्बर, 2013 को किया? – क्रेडिट इंफोरमेशन ब्यूरो इण्डिया लिमिटेड – CIBIL (CIBIL द्वारा घोषित इस योजना के अंतर्गत CIBIL भारत की प्रमुख लघु-वित्त संस्थाओं को सदस्य के रूप में शामिल कर उनकी लघु-वित्त से सम्बन्धित प्रचालन जानकारियों को साझा किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि CIBIL इस समय उपभोक्ता, खुदरा, मार्टगेज तथा घोटाले- इन चार क्षेत्रों पर जानकारियां उपलब्ध करा रही है। CIBIL का मुख्य काम ऋण लेने से पहले आवेदक की क्रेडिट जानकारियां बैंकों तथा सम्बन्धित वित्तीय संस्थाओं को उपलब्ध कराने का है। सिबिल ऋण लेने वाले प्रत्येक आवेदक के 300 से 900 अंकों के बीच के CIBIL स्कोर को रखने तथा इन्हें सम्बन्धित संस्थाओं को उपलब्ध कराता है जिससे आवेदक के ऋण चुकाने की क्षमता का पता चलता है)

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4) रिटेल तथा मर्चेन्ट आउटलेट्स  में डेबिट कार्ड के प्रयोग के सम्बन्ध में 1 दिसम्बर, 2013 से क्या नया नियम अनिवार्य कर दिया गया है? – 1 दिसम्बर से डेबिट कार्ड द्वारा रिटेल तथा मर्चेंट आउटलेट्स से की गई खरीद के लिए पिन नम्बर (PIN) पंच करना अब आवश्यक हो गया है (इसका अर्थ यह हुआ कि पिन कार्ड को याद रखे बिना डेबिट कार्ड स्वाइप कर खरीद नहीं की जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जून 2013 में प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) तथा मर्चेन्ट आउटलेट्स से की गई खरीद के लिए पिन नम्बर की पंचिंग के अनिवार्य नियम को लागू करने के लिए 30 नवम्बर 2013 तक की मोहलत दी थी। RBI के इस सम्बन्ध में एक कार्यसमूह की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया था कि नकली तथा स्किमिंग करके डेबिट कार्ड बनाने के कुछ प्रारंभिक मामले भारत में सामने आने लगे हैं तथा पिन सम्बन्धी यह अनिवार्यता नियम डेबिट कार्ड के प्रयोग में अधिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए लागू किया गया है)

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5) भारत में जीवन बीमा क्षेत्र की सबसे बड़ी कम्पनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने हाल ही में निर्णय लिया है कि वह दिसम्बर 2013 के दौरान जीवन आनंद, जीवन मधुर व जीवन सरल जैसी लोकप्रिय पालिसियों समेत कुल 34 पालिसियों की बिक्री बंद करने की घोषणा की है। इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण क्या है? – क्योंकि ये पालिसियां बीमा पालिसियों के बारे में जारी किए गए नए दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती हैं (उल्लेखनीय है कि भारत में बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था IRDA द्वारा गैर-लिंक्ड बीमा उत्पाद, लिंक्ड बीमा उत्पाद तथा स्वास्थ्य बीमा पालिसियों के बारे में जारी किए गए नए दिशानिर्देशों का अनुपालन न करने वाली की 34 पालिसियों को बंद किया जायेगा। IRDA ने यह दिशानिर्देश बीमा पालिसियों को उपभोक्ताओं के लिए अधिकाधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य के लिए जारी किया था)

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6) देश के किस प्रमुख औद्यौगिक समूह ने 27 नवम्बर, 2013 को बैंकिंग लाइसेंस के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के समक्ष किए अपने आवेदन को वापस लेने की घोषणा की? – टाटा सन्स, जोकि टाटा समूह की होल्डिंग कम्पनी है (इसी के साथ यह समूह टाटा बैंकिंग लाइसेंस के लिए अपना आवेदन वापस लेने वाला दूसरा समूह हो गया। इससे पहले कुछ समय पहले वीडियोकोन समूह की कम्पनी वैल्यू इण्डस्ट्रीज़ ने भी अपना आवेदन वापस ले लिया था। टाटा सन्स द्वारा अपना आवेदन वापस लेना का प्रमुख कारण रहा RBI द्वारा रखी गई वह शर्त रही जिसमें बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले समूह की सभी वित्तीय सेवा कम्पनियों को एक गैर-संचालित वित्तीय होल्डिंग कम्पनी (non-operating financial holding company (NOFHC)) के तहत लाना आवश्यक था। RBI की इस शर्त के चलते टाटा समूह को अपने विशाल समूह में बहुत बड़ा संरचनात्मक बदलाव करना अपेक्षित था। माना जा रहा है कि अब से लगभग 2 माह में नए बैंकिंग लाइसेंसों की घोषणा कर दी जायेगी)

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7) यूरोपीय संघ ने 4 दिसम्बर, 2013 को 6 वित्तीय संस्थाओं – जर्मनी के डोएश बैंक (Deutsche Bank), फ्रांस के सोसायटे जनरेल (Societe Generale), ब्रिटेन के RBS और RP मार्टिन तथा अमेरिका के JP मार्गन व Citigroup – पर कुल 1.7 अरब यूरो (लगभग 2.3 अरब डालर) का जुर्माना लगाने की घोषणा की। इस संस्थाओं पर इतना भारी-भरकम जुर्माना किस कारण लगाया गया? – इन संस्थाओं द्वारा बेंचमार्क ब्याज दरों को प्रभावित करने के चलते (उल्लेखनीय है कि इन 6 वित्तीय संस्थाओं पर यूरो और जापानी मुद्रा येन में उपलब्ध डिराइवेटिव्स की ब्याज दर को प्रभावित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया था तथा यूरोपीय संघ की जांच में इसे सही पाया गया। वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के दौरान भी ब्याज-दरों को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया था तथा यह आरोप उस समय पुष्ट पाया गया जब 2012 के दौरान बार्कलेज़ (Barclays) बैंक लिबोर (LIBOR) दर को प्रभावित करने के आरोप में आर्थिक जुर्माना अदा करने के लिए तैयार हो गया था। यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए इस जुर्माने में सर्वाधिक दण्ड डोएश बैंक पर लगाया गया है, जिसे 72.5 करोड़ यूरो अदा करने होंगे)

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8) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 28 नवम्बर, 2013 को बीमा क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम में शामिल गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (NBFCs) को क्या सहूलियत प्रदान करने की घोषणा की है? – यह कम्पनियां अब बीमा क्षेत्र के संयुक्त उपक्रमों में 50% से अधिक हिस्सेदारी भी हासिल कर सकती हैं (उल्लेखनीय है कि अब तक नियम यह था कि कोई NBFC बीमा क्षेत्र के संयुक्त उपक्रम में अपनी हिस्सेदारी को 50% से ऊपर नहीं रख सकती थी)

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  1. jiyaa says:

    Superb
    very helpful

  2. saurabh.muz says:

    awsm

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