बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 66

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Editorial Team

29 Aug, 2014

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बैंकिंग जागरूकता,


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Shadow-Banking

1) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 18 अगस्त 2014 को शैडो बैंकिंग (Shadow Banking) पर गठित 15-सदस्यीय समिति का अध्यक्ष किसे बनाया गया है? – पी. विजय भास्कर, RBI के कार्यकारी निदेशक

व्याख्या : शैडो बैंकिंग से तात्पर्य गैर-बैकिंग वित्तीय कम्पनियों (NBFCs) द्वारा बैंकों जैसी सेवाएं देने से होता है जिससे ऐसी कम्पनियां नियामक कार्रवाइयों की परिधि से भी बाहर रहती हैं। ऐसी कम्पनियां अधिकांशत: निवेशकों और कर्जदारों के बीच बिचौलिए का काम करती हैं। इस विषय पर गठित इस समिति का मुख्य कार्य यह पता लगाना होगा कि शैडो बैंकिंग में कितना धन लगा हुआ है और इस क्षेत्र के मुख्य खिलाड़ी कौन हैं। इसके अलावा रियल एस्टेट क्षेत्र की इस क्षेत्र से सम्बन्धित गतिविधियों का बारीक अध्ययन भी यह समिति करेगी। इस समिति में RBI, SEBI, केन्द्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (Central Economic Intelligence Bureau) और राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB) के प्रतिनिधियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

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2) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2014 को घोषित उस योजना का क्या नाम है जिसमे देश गरीबों का बैंक खाता खोला जायेगा और इसके साथ एक लाख रुपए का दुर्घटना बीमा और डेबिट कार्ड की सुविधा भी प्रदान की जायेगी? – “प्रधानमंत्री जन धन योजना”

विस्तार : उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कैबिनेट ने दो चरणों में वित्तीय समावेशन (financial inclusion) योजना के तहत देश के 15 करोड़ गरीब लोगों का बैंक खाता खोलने वाली इस योजना को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है जिसमें खाताधरकों को 5 हजार रुपए की ओवरड्राफ्ट सुविधा और 1 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा प्रदान किया जायेगा। केन्द्र सरकार द्वारा एक मिशन के स्वरूप में लागू की जाने वाली इस योजना के तहत देश के प्रत्येक 7.5 करोड़ परिवारों के दो खाते अगस्त 2018 तक खोलने का महात्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि देश में करोड़ों गरीब लोगों के पास मोबाइल फोन है लेकिन बैंक खाता नहीं है और उन्होंने आशा व्यक्त की कि “प्रधानमंत्री जन धन योजना” के द्वारा देश के अधिकाधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली (formal banking system) का हिस्सा बनाया जायेगा।

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3) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 22 अगस्त 2014 को ग्राहकों का एक चार्टर जारी किया जिसमें किसी वित्तीय लेन-देन के समय ग्राहक और वित्तीय सेवा प्रदत्ता कम्पनी (financial services provider) के बीच सम्बन्धों का आधार परिभाषित करने का प्रयास किया गया है। इस चार्टर (सेवा घोषणापत्र) के मुख्य बिन्दु क्या हैं?

– कोई भी वित्तीय सेवा प्रदत्ता कम्पनी किसी भी ग्राहक से लिंग, आयु, धर्म, जाति, शारीरिक अक्षमता, आदि के आधार पर कोई भेदभाव किसी वित्तीय सेवा को प्रदान करने के समय नहीं करेगी

– किसी वित्तीय उत्पाद अथवा सेवा को ग्राहक को बेचने के समय वित्तीय सेवा प्रदत्ता कम्पनी ऐसी किसी जानकारी को ग्राहक से नहीं छिपायेगी जिससे ग्राहक को विशेष रूप से कोई प्रतिकूलता प्राप्त होने की संभावना हो

– वित्तीय सेवा प्रदत्ता कम्पनी को कोशिश करनी होगी कि किसी वित्तीय सेवा अथवा वित्तीय उत्पाद को बेचते समय उस सेवा अथवा उत्पाद से सम्बन्धित जानकारी को यथासंभव अत्यंत सरल भाषा में सुलभ उपलब्ध कराया जाय

– वित्तीय सेवा प्रदत्ता कम्पनी को अधिकार है कि वह ऐसे वित्तीय उत्पाद अथवा सेवाएं तैयार करे जिसे ग्राहकों के एक विशेष वर्ग की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही विशेष रूप से तैयार किया गया हो तथा जिसमें ग्राहकों से भेदभाव की कुछ गुंजाइश भी रहती हो

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4) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 14 अगस्त 2014 को घोषणा की कि उसके निदेशक बोर्ड ने एक नया उच्च पद सृजित करने के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है तथा अब इस पद-सृजन को मूर्त रूप देने के लिए अपेक्षित विधायी संशोधनों के लिए उसने केन्द्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। यह नया प्रस्तावित पद कौन सा है जो के उप-गवर्नर के बराबर का दर्जा रखेगा? – मुख्य संचालन अधिकारी (Chief Operating Officer – COO)

व्याख्या : उल्लेखनीय है कि RBI का नेतृत्व वर्तमान में एक गवर्नर और चार उप-गवर्नरों द्वारा किया जा रहा है। अब इन पाँच सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों में काम का बंटवारा नए सिरे से और कार्यकुशल तरीके से करने के लिए RBI ने इस पद के सृजन का प्रस्ताव रखा है। RBI अब अपने मानव-संसाधन ढांचे में पुनर्सुधार कर भारत के केन्द्रीय बैंक के रूप में जिम्मेदारियों को निभाने के लिए अधिक प्रभावशाली स्वरूप अख्तियार करना चाहता है।

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5) जुलाई 2014 के दौरान किसने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के चौथे उप-गवर्नर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है? – एस.एस. मुन्द्रा (S.S. Mundra)

व्याख्या : एस.एस. मुन्द्रा (जिनका पूरा नाम सुभाष शिवरतन मुन्द्रा है) ने 31 जुलाई 2014 को RBI के चौथे उप-गवर्नर के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। वे इससे पहले बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) के अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक (CMD) के पद पर कार्यरत थे तथा इस पद से ही सेवानिवृत्त हुए थे। मुन्द्रा के RBI में शामिल हो जाने के बाद उनके अलावा बैंक में तैनात तीन उप-गवर्नर हैं – उर्जित पटेल, एच.आर. खान और आर. गाँधी। RBI में चौथे उप-गवर्नर का यह पद तब खाली हो गया था जब के.सी. चक्रबर्ती ने अप्रैल 2014 में अपने कार्यकाल के समाप्त होने से दो माह पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

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6) वित्त मंत्रालय ने 20 अगस्त 2014 को दो बैंकों की शाखाओं की फॉरेंसिक ऑडिट जाँच का आदेश दे दिया जिनपर 436 करोड़ के वित्तीय कुप्रबन्धन का आरोप लगा है। इस मामले में शामिल ये दो बैंक कौन से हैं? – देना बैंक और ऑरियण्टल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC)

व्याख्या : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुम्बई स्थित देना बैंक की शाखा के प्रबन्धन ने एक दलाल के माध्यम से सात कॉर्पोरेट कम्पनियों से 256.5 करोड़ रुपए अवैध फिक्सड डिपॉज़िट योजना के लिए प्राप्त किए जबकि ऑरियण्टल बैंक ऑफ कॉमर्स में 180 करोड़ रुपए के वित्तीय घपले की बात कही गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वित्तीय कुप्रबन्धन और धोखाधड़ी की खबरों को देखते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने इस क्षेत्र के बैंकों के जोखिम प्रबन्धन को कड़ा करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं।

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7) किस अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था ने 20 अगस्त 2014 को 2.5 अरब डॉलर मूल्य के घरेलू भारतीय रुपए वाले बाण्ड कार्यक्रम (Onshore Indian Rupee Bond Programme) को शुरू किया जिसके माध्यम से प्राप्त किए जाने वाले धन से भारतीय पूँजी बाजार को मजबूत करने और देश में मूलभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण में लगाया जायेगा? – इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (International Finance Corporation – IFC)

व्याख्या : IFC विश्व बैंक समूह की संस्था है। यह मुख्यत: विकासशील देशों के निजी उपक्रमों और परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता और परामर्श प्रदान करने का काम करती है। IFC के इस बाण्ड कार्यक्रम के तहत अगले 5 वर्षों के लिए 2.5 अरब डॉलर की राशि रुपया-आधारित बाण्ड (rupee-denominated bonds) और मुद्रा स्वैप के द्वारा एकत्र की जायेगी और इसका अनुप्रयोग मुख्यत: भारत में मूलभूत संरचना के विकास में की जायेगी।

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8) केन्द्र सरकार की उस महात्वाकांक्षी ई-गवर्नेंस परियोजना का क्या नाम है जिसको केन्द्रीय कैबिनेट ने 20 अगस्त 2014 को अपनी स्वीकृति दे दी और जिसके तहत भारत के सभी नागरिकों तक सभी सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है? – “डिज़िटल इण्डिया” परियोजना (‘Digital India’ Project)

व्याख्या : 1 लाख करोड़ रुपए की इस महात्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नवीनतम सूचना व संचार तकनीक का लाभ जन-जन को पहुँचा कर प्रत्येक भारतवासी को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जोड़ना है। “डिज़िटल इण्डिया” परियोजना में भारत सरकार के सभी वर्तमान ई-गवर्नेंस कार्यक्रमों जैसे ई-बिज़ (Ebiz) परियोजना, ई-क्रांति, वर्चुअल क्लासरूम, ई-वीज़ा, राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) परियोजना, आदि को एक ही छत के तले लाने की कोशिश की जायेगी। इसके अलावा इसमें सरकारी विभागों को पेपर-मुक्त करने के लिए ई-ऑफिस कार्यक्रम, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का उत्पादन अधिकाधिक भारत में करने का प्रयास और उद्यमी विकास निधि को कार्यान्वित करने की कोशिश की जायेगी। “डिज़िटल इण्डिया” परियोजना को वर्ष 2014-15 के आम बजट में घोषित किया गया था तथा इसके कार्यान्वयन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीधे रुचि ले रहे हैं।

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9) तेलंगाना सरकार द्वारा 19 अगस्त 2014 को पूरे राज्य में आयोजित उस विवादास्पद सर्वे का क्या नाम था जिसको लेकर राज्य के तमाम वर्गों में आशंका व्याप्त रही और जिसके चलते राज्य सरकार और केन्द्र के बीच भी विवाद उठ खड़ा हुआ? – “समग्र कुटुम्ब सर्वे” (“Intensive Household Survey”)

व्याख्या : इस एक-दिवसीय सर्वे का आयोजन राज्य के सभी 10 जिलों में किया गया। इस सर्वे को कराने की घोषणा तेलंगाना का मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव ने 1 अगस्त 2014 को की थी। सरकार ने घोषणा की थी कि सर्वे के तहत मुख्यत: सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों का पता लगाने का प्रयास किया जायेगा। इस अवसर पर 19 अगस्त को पूरे तेलंगाना राज्य में सरकारी अवकाश घोषित कर दिया गया। वहीं राज्य में रहने वाले बाहरी राज्यों के लोगों, मुख्यत: हैदराबाद में रह रहे आन्ध्र वासियों में इस सर्वे को लेकर भारी आशंकाएं व्याप्त थीं। इनमें से तमाम लोगों का मानना था कि सर्वे में प्राप्त जानकारियों के आधार पर बाहरी लोगों के साथ भेदभाव किया जा सकता है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मामले को हैदराबाद उच्च न्यायालय भी ले जाया गया था। 14 अगस्त 2014 को इस मामले की सुनवाई करते हुए हैदराबाद उच्च न्यायालय ने इस सर्वे को इस शर्त पर कराने की अनुमति प्रदान कर दी थी कि यह सर्वे बाध्यकारई नहीं हो सकता है तथा लोग अपनी सुविधा के अनुसार प्रश्नों के उत्तर देने से बच सकते हैं। इस सर्वे को कराने में चार लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और हजारों अन्य सहायकों को लगाया गया था।

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10) भारत के पूंजी बाजार की विनियामक संस्था SEBI ने 22 अगस्त 2014 को किस गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी (NBFC) को अपने लगभग 5.85 करोड़ ग्राहकों से गलत तरह से एकत्र धनराशि को वापस करने का अहम आदेश दिया? – पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड – PACL

व्याख्या : दिल्ली में मुख्यालय वाली कम्पनी पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (PACL) एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी (NBFC) है और वर्ष 2011-12 में इसके 15 क्षेत्रीय कार्यालय और लगभग 33.5 लाख फील्ड एसोसिएट्स थे जो कम्पनी के लिए लोगों से धन एकत्र करने में संलग्न थे। यह कम्पनी दो प्रकार की जमा योजनाओं का संचालन करती थी – एक नकद जमा योजना और दूसरी किश्त आधारित जमा योजना। इन योजनाओं के लिए वह अपने जमाकर्ताओं को अलग-अलग जमावधियों में जमीन आवंटित करने का दावा करती थी।

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Responses on This Article

Previous Responses on This Article

  1. ramukumarcisf@gmail.com says:

    thanks
    SIR

  2. Grv says:

    sorry sir …that was my mistak

  3. navgesh says:

    Good Initiative..Thanks alot..

  4. rahulmohod says:

    1 no. hai boss

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