बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 108

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Editorial Team

17 Mar, 2016

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बैंकिंग जागरूकता,


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Bank-losses-2016

1) सार्वजनिक क्षेत्र के किस बैंक (PSU bank) ने 12 फरवरी 2016 को 3,342 करोड़ रुपए का तिमाही घाटा घोषित किया जोकि भारतीय बैंकिंग इतिहास में किसी भी बैंक द्वारा घोषित सर्वाधिक तिमाही घाटा है? – बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)

विस्तार: 12 फरवरी 2016 को घोषित परिणामों के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) का वर्ष 2015-16 की तीसरी तिमाही (सितम्बर-दिसम्बर) के दौरान का शुद्ध घाटा (net loss) 3,342 करोड़ रुपए रहा जबकि पिछले वर्ष (2014-15) की समान तिमाही में उसने 333 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ (net profit) अर्जित किया था।

इस तिमाही घाटे से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह भारत के बैंकिंग इतिहास में किसी भी बैंक को हुआ सर्वाधिक तिमाही घाटा (largest quarterly loss) है। इस भारी-भरकम घाटे का मुख्य कारण बुरे ऋण (bad loans) में हुई वृद्धि के कारण बैंक द्वारा किए गए प्रावधानों (provisions) में भारी वृद्धि है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल की समान तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा ने बुरे ऋण के चलते जहाँ मात्र 1,149 करोड़ का प्रावधान किया था वहीं इस वर्ष किया गया प्रावधान 463% बढ़कर 6,474 करोड़ रुपए हो गया।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU banks) को निर्देश दिया है कि ऋण चुकाने में दिक्कत पेश कर रहे कुछ खातों (troubled accounts) को भी अब आधिकारिक बुरे ऋण (bad loans) अथवा गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियों (NPAs) की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। यह एक प्रमुख कारण है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बुरे ऋण में भारी वृद्धि हुई है।

2015-16 की तीसरी तिमाही के दौरान खराब प्रदर्शन करने वाले कुछ अन्य बैंक हैं – आईडीबीआई बैंक (2,184 करोड़ रुपए का घाटा), इण्डियन ओवरसीज़ बैंक (1,425 करोड़ रुपए का घाटा) और बैंक ऑफ इण्डिया (1,505 करोड़ रुपए का घाटा)।

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Wealth-Management-Services-2016

2) कौन सा बैंक 14 जनवरी 2016 को अपनी वैल्थ मैनेजमेण्ट सेवा (Wealth Management Services) शुरू कर ऐसी सेवाएं प्रदान करने वाला देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक (PSU bank) बना? – भारतीय स्टेट बैंक (SBI)

विस्तार: भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जोकि देश का सबसे बड़ा बैंक है, ने 14 जनवरी 2016 को “एसबीआई एक्सक्लूसिफ” (SBI Exclusif’) नाम से अपनी वैल्थ मैनेजमेण्ट सेवा (Wealth Management Services) शुरू कर दी। इस सेवा को शुरू कर SBI वैल्थ मैनेजमेण्ट सेवा प्रदान करने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का देश का पहला बैंक बन गया।

“एसबीआई एक्सक्लूसिफ” को फिलहाल बेंगलूरु की तीन एसबीआई शाखाओं – इंदिरानगर (Indiranagar), कोरामंगला (Koramangala) और सेण्ट्रल बंगलूरु (Central Bengaluru) – में शुरू किया गया है। बैंक जल्द ही इस सेवा को देश के अन्य शहरों में शुरू करेगा। इन शाखाओं में एक पूर्णतया समर्पित रिलेशनशिप मैनेजर, सर्विस मैनेजर तथा निवेश सलाह प्रदान करने वाली टीम को रखा जायेगा।

“एसबीआई एक्सक्लूसिफ” सेवा के लिए ग्राहकों के पास न्यूनतम 30 लाख रुपए का सम्पदा-आधार (wealth base) होना चाहिए। हालांकि बैंक का मानना है कि इस क्षेत्र के व्यवसाय को बढ़ाने के लिए इसे घटाकर 10 से 15 लाख रुपए तक किया जा सकता है। इसके अलावा अप्रवासी भारतीयों (NRIs) को भी “एसबीआई एक्सक्लूसिफ” की सेवाओं के लिए आकर्षित किया जायेगा।

एसबीआई की “एसबीआई एक्सक्लूसिफ” की एक और खासियत यह होगी कि इसमें रिलेशनशिप मैनेजर्स के प्रदर्शन को सीधे ग्राहकों की संतुष्टि (customers satisfaction) तथा उनकी सम्पदा में उचित सलाह से होने वाली संवृद्धि से जोड़ा जायेगा। उल्लेखनीय है कि देश में अभी तक वैल्थ मैनेजमेण्ट सेवाएं निजी क्षेत्र के बैंक ही प्रदान करते आए हैं।

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3) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 1 फरवरी 2016 को “फ्लैक्सीपे होम लोन” (‘FlexiPay Home Loan’) योजना लाँच की जिसमें कर्ज लेने वालों को प्रारंभिक 3 से 5 वर्ष के दौरान सिर्फ ब्याज का भुगतान देने का विकल्प दिया गया है। यह होम लोन योजना किस वर्ग को ध्यान में रखकर शुरू की गई है? – युवा कामकाजी प्रोफेशनल्स

विस्तार: एसबीआई (SBI) की नई गृह ऋण योजना “फ्लैक्सीपे होम लोन” को मुख्यत: युवा कामकाजी प्रोफेशनल्स (Young working professionals) को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। इसमें ऋण-अवधि के प्रारंभिक 3 से 5 वर्ष के दौरान ऋण लेने वालों को सिर्फ ऋण के ब्याज (interest) का भुगतान करने का विकल्प प्रदान किया जायेगा। इसके चलते उनकी प्रारंभिक कर्ज वापसी की किश्तें कम राशि की रहेंगी। इसके बाद उन्हें एक आम होम लोन योजना की तरह से समान मासिक किश्तों (EMIs) से शेष राशि का भुगतान करना होगा।

3 से 5 वर्ष के बाद कर्ज अदायगी की किश्तों की राशि बढ़ जायेगी क्योंकि तब इसमें ब्याज के अलावा मूल धन (principal amount) का अंश भी शामिल हो जायेगा। इससे कर्ज लेने वालों को शुरू में कम धनराशि का भुगतान करना होगा।

माना जा रहा है कि इस होम लोन योजना से युवा कामकाजी प्रोफेशनल्स को आम होम लोन योजनाओं के बदले कहीं अधिक राशि का कर्ज मिल सकेगा तथा अपने करियर की राह पर सशक्त होते हुए वे आगे चलकर बड़ी धनराशि का भुगतान कर सकेंगे।

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4) एशिया प्रशांत क्षेत्र में मूलभूत संरचना (infrastructure) के ढांचे को मजबूत करने के मुख्य उद्देश्य से गठित नई अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेण्ट बैंक (Asian Infrastructure Investment Bank – AIIB) का आधिकारिक संचालन 16 जनवरी 2016 को तब शुरू हो गया जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने बीजिंग में इसका उद्घाटन किया। अमेरिका के नेतृत्व वाले विश्व बैंक (World Bank) के लिए एक बड़े प्रतिद्वन्दी के रूप में देखे जा रहे इस बैंक का पहला अध्यक्ष किसे बनाया गया? – जिन लीकुन (Jin Liqun)

विस्तार: एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेण्ट बैंक (AIIB) की स्थापना चीन द्वारा की गई है। उसने सबसे पहले वर्ष 2013 में इस बैंक की स्थापना करने की योजना सार्वजनिक की थी तथा अक्टूबर 2014 में इसे स्थापित किया गया था। इस बैंक ने 16 जनवरी 2016 से औपचारिक रूप से अपना संचालन (operations) शुरू कर दिया। AIIB में चीन की सर्वाधिक हिस्सेदारी (30.34%) तथा सर्वाधिक वोटिंग अधिकार (26.06%) हैं। माना जा रहा है कि यह बैंक विकास वित्त के क्षेत्र के अलिखित नियमों को बदलने का बीड़ा उठा कर अमेरिका के नेतृत्व वाले विश्व बैंक (World Bank) को आने वाले दिनों में कड़ी चुनौती पेश कर सकता है। AIIB में भारत की हिस्सेदारी (8.52%) तथा वोटिंग अधिकार (7.51%) चीन के बाद सर्वाधिक हैं।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के विरोध के बावजूद ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फिलीपीन्स तथा दक्षिण कोरिया जैसे उसके उसके कुछ प्रमुख सहयोगी देशों ने AIIB का दामन थाम लिया है। इससे अंतर्राष्ट्रीय वित्त के क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे की झलक मिलती है। AIIB अगले चार से पाँच सालों के दौरान प्रतिवर्ष 10 से 15 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा जिसके द्वारा मूलभूत संरचना के विकास का काम किया जायेगा। AIIB का मुख्यालय बीजिंग में स्थापित किया गया है तथा अभी तक इसके कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में काम-काज देख रहे चीन के जिन लीकुन (in Liqun) इसके पहले पूर्ण-कालिक अध्यक्ष (President) बनाए गए।

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5) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने 2 फरवरी 2016 को वर्ष 2016-17 की छठवीं द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (Sixth Bi-monthly Monetary Policy Review) प्रस्तुत की। इस समीक्षा में सभी प्रमुख दरों को यथावत रखा गया, जिसका अर्थ हुआ कि अर्थव्यवस्था में ब्याज दर के निर्धारण में प्रमुख भूमिका निभाने वाली रेपो दर (Repo Rate) 6.5% पर यथावत रहेगी। समीक्षा में वर्ष 2016-17 के दौरान अर्थव्यवस्था की विकास दर कितनी रहने का अनुमान लगाया गया है? – 7.6%

विस्तार: RBI ने सभी प्रमुख दरों को यथावत रखने हुए यह इशारा भी किया कि ब्याज दरों के कम होने का दौर संभवत: जारी रहेगा।

लेकिन उसने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के चलते सावधान रहने को भी कहा।

मार्च 2017 को समाप्त हो रहे वर्ष 2016-17 के दौरान विकास दर (Growth Rate) 7.6% होने का अनुमान इस समीक्षा में लगाया गया।

वहीं इस समीक्षा के बाद जहाँ रेपो दर (Repo Rate) 6.5% पर यथावत रहीं वहीं नकदी रिज़र्व अनुपात – cash reserve ratio – CRR (यानि बैंकों में जमा नकदी वह भाग जो RBI में रिज़र्व के रूप में रखा जाता है) भी 4.0% पर यथावत रहा।

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6) भारतीय रिज़र्ब बैंक (RBI) ने पेंशनर्स के खाते में एक वर्ष के दौरान क्रेडिट ट्रांसज़ेक्शन्स (credit transactions) की अधिकतम सीमा क्या तय कर दी, जिसके सम्बन्ध में सभी बैंकों को 21 जनवरी 2016 को दिशानिर्देश जारी कर दिए गए? – चौदह (14)

विस्तार: RBI ने 21 जनवरी 2016 को सभी वाणिज्यिक बैंकों को यह दिशानिर्देश जारी कर दिए कि पेंशनर्स के बैंक खातों में क्रेडिट ट्रांसज़ेक्शन्स की अधिकतम संख्या चौदह (14) प्रतिवर्ष होगी।

उल्लेखनीय है कि एजेंसी बैंकों को पेंशनर्स के खातों में पेंशन सम्बन्धी हिसाब-किताब करने, भुगतान करने तथा ऐसी अन्य सेवाओं के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा 65 रुपए प्रति ट्रांसज़ेक्शन्स की दर से कमीशन प्रदान किया जाता है।

लेकिन RBI के सामने यह पहलू सामने आया कि कई बार बैंक बकाया भुगतान तथा महंगाई भत्ते (DA) की किश्त के भुगतान के रूप में पेंशनधारकों को क्रेडिट किए जा रहे हिस्सों को कई क्रेडिट ट्रांसज़ेक्शन्स में बाँट देते हैं जिससे एजेंसी बैंकों को मिलने वाले कमीशन में स्वत: वृद्धि हो जाती है।

इसके चलते अब बैंक पेंशनधारकों के खातों में एक साल में अधिकतम 14 क्रेडिट ट्रांसज़ेक्शन्स किए जा सकेंगे। इनमें 12 मासिक पेंशन भुगतान तथा अधिकतम 2 अन्य क्रेडिट भुगतान होंगे जिनके द्वारा बकाया (arrear) अथवा महंगाई भत्ते (DA) में हुई वृद्धि का लाभ पेंशनधारकों को प्रदान किया जायेगा।

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7) वित्तीय सेवाओं की सचिव (Financial Services Secretary) आंजलि छिब्ब दुग्गल द्वारा 3 फरवरी 2016 को की गई घोषणा के अनुसार केन्द्र सरकार मौजूदा वित्तीय वर्ष (2015-16) के दौरान सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों (PSU Banks) को और कितनी वित्तीय सहायता प्रदान करेगी? – रु. 5,000 करोड़

विस्तार: उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से कुल 25,000 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की थी। इसमें से लगभग रु. 20,088 करोड़ की आर्थिक सहायता 13 सार्वजनिक बैंकों को इस वित्तीय वर्ष के दौरान पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है।

इसलिए अब सरकार को अब इन बैंकों को 5,000 करोड़ रुपए की सहायता और प्रदान कर अपने लक्ष्य को पूरा करना है।

केन्द्र सरकार ने वर्ष 2015 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अगले 4 वर्षों के दौरान कुल 70,000 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से “इन्द्रधनुष” (‘Indradhanush’) नामक एक महात्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी। स्तंभ तीन के बेसल मानकों (Basel-III capital norms) का अनुपालन करने के उद्देश्य से बैंकों को अपने पूँजी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए इसके अलावा 1.1 लाख करोड़ रुपए बाजार से हासिल करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया था।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि इस साल के रु. 25,000 करोड़ रुपए के अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अगले दो वित्तीय वर्षों के दौरान 10,000-10,000 करोड़ की वित्तीय सहायता और प्रदान की जायेगी।

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8) भारतीय बैंकों, बीमा कम्पनियों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियाँ (NBFCs) तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा इण्डियन एकाउण्टिंग स्टैण्डर्ड्स (Ind AS) को अपनाने के सम्बन्ध में केन्द्र सरकार ने सम्बन्धित रोड-मैप की घोषणा 19 जनवरी 2016 को कर दी। इस रोड-मैप के अनुसार भारत में इण्डियन एकाउण्टिंग स्टैण्डर्ड्स को अपनाए जाने की निर्धारित तिथि क्या है? – 1 अप्रैल 2018

विस्तार: इण्डियन एकाउण्टिंग स्टैण्डर्ड्स (Indian Accounting Standards – Ind AS) वे लेखांकन मानक (accounting standards) हैं जिन्हें भारतीय संस्थाओं तथा अधिकारियों ने तैयार किया है तथा यह मानक International Financial Reporting Standards – IFRS) के मानकों का अनुपालन करेंगे। इसके चलते इन्हें के IFRS साथ एकीकृत किया जा सकेगा।

केन्द्र सरकार ने इस सम्बन्ध में जारी रोडमैप में बताया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) तथा बीमा कम्पनियाँ 1 अप्रैल 2018 से शुरू वित्तीय वर्ष से अपने वित्तीय खातों को Ind AS के मानकों के अनुसार तैयार करेंगे। इसके अलावा अखिल भारतीय स्तर पर वित्तीय ऋण प्रदान करने वाली संस्थाओं जैसे एक्ज़िम बैंक (EXIM Bank), राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB), सिडबी (SIDBI), आदि को भी इसका अनुपालन करना होगा।

लेकिन शहरी सहकारी बैंक (urban cooperative banks – UCBs) तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों regional rural banks – RRBs) को Ind AS के अनुपालन से बाहर रखा गया है तथा ये उपक्रम अपने वर्तमान मानकों के अनुसार खाते तैयार करते रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि इण्डियन एकाउण्टिंग स्टैण्डर्ड्स को कार्यान्वित करने की घोषणा केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2015-16 के बजट घोषणा में की थी।

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9) आयकर कानून, 1961 को सरल बनाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति (expert committee) की पहली रिपोर्ट जनवरी 2016 के दौरान जारी की गई। इस रिपोर्ट में नए उद्यमों को आयकर में छूट तथा स्रोत पर कटने वाले करों (TDS) को कम करने समेत तमाम महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इस समिति की अध्यक्षता कौन कर रहा है? – न्यायमूर्ति आर.वी. ईश्वर

विस्तार: न्यायमूर्ति आर.वी. ईश्वर (Justice R.V. Easwar) समिति का गठन केन्द्र सरकार ने 27 अक्टूबर 2015 को किया था तथा इसका मुख्य उद्देश्य आयकर कानून 1961 के प्रावधानों को ज़्यादा से ज़्यादा सरल व व्यावहारिक बनाने के लिए सिफारिशें प्रदान करना है। उक्त समिति की पहली रिपोर्ट जनवरी 2016 के दौरान जारी की गई।

न्यायमूर्ति आर.वी. ईश्वर समिति की प्रथम रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें:

व्यक्तिगत (individual), अविभाजित हिन्दू परिवारों (HUF) अथवा साझेदारी फर्मों (partnership firms) के लिए प्रकल्पित आय योजना (presumptive income scheme) हेतु टर्नओवर सीमा को वर्तमान 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ प्रतिवर्ष किया जाय

1 करोड़ से कम सालाना आय वाले प्रोफेशनल्स के लिए नई आयकर योजना बनाई जाय

नए व्यवसायों को उनके संचालन के प्रथम वर्ष के दौरान कर राहत प्रदान की जाय

स्रोत पर आयकर कटौती (TDS) के ढांचे को अधिक तर्कसंगत बनाया जाय

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10) देश में नए उद्यमियों तथा उद्यमों को बढ़ावा देने की अत्यंत महात्वाकांक्षी पहल के तहत केन्द्र सरकार ने “स्टार्ट-अप मिशन” (“Start-Up Mission”) को अमली जामा पहनाया जब 16 जनवरी 2016 को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित स्टार्ट-अप इण्डिया (Start-Up India) कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमाम आकर्षक घोषणाएं कीं। स्टार्ट-अप्स को एक बड़ी राहत देते हुए उन्हें कितने वर्षों की कर-छूट (tax exemption) देने की घोषणा की गई? – 3 वर्ष

विस्तार: उल्लेखनीय है कि स्टार्ट-अप्स (नवोदित उद्यमों) की तमाम मांगों में से एक बड़ी मांग कर-छूट है। इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्टार्ट-अप्स (start-ups) को 3 सालों के लिए कर छूट प्रदान करने की अहम घोषणा की। उक्त घोषणा के तहत 1 अप्रैल 2016 के बाद शुरू किए गए स्टार्ट-अप्स को करों में यह तीन-वर्षीय छूट प्रदान की जायेगी।

स्टार्टअप्स मिशन” के तहत की गईं अन्य प्रमुख घोषणाएं:

एक स्टार्ट-अप इण्डिया हब (Start-up India Hub) की स्थापना कर स्टार्ट-अप्स को मदद प्रदान करने के प्रयास किए जायेंगी

स्टार्ट-अप से सम्बन्धित पेटेण्ट्स को स्वीकृति के लिए फास्ट ट्रैक व्यवस्था

स्टार्ट-अप्स के लिए क्रेडिट गारण्टी प्रणाली की स्थापना जिसके लिए नेशनल क्रेडिट गारण्टी ट्रस्ट कम्पनी (NCGTC) तथा सिडबी (SIDBI) अगले 4 वर्षों तक 500 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का बजट आवंटित करेंगे।

स्टार्ट-अप्स के लिए सेल्फ-सर्टीफेक्शन योजना

स्टार्ट-अप्स को व्यवसाय से बाहर होने (exit) में आसानी प्रदान करने के लिए आसान एक्ज़िट नियम (इसके तहत आसान डेब्ट स्ट्रक्चर वाले स्टार्ट-अप्स को आवेदन करने के 90 दिन तक व्यवसाय से बाहर होने की सुविधा प्रदान की गई है)

स्टार्ट-अप्स को शुरू करने के लिए App के माध्यम से मात्र एक दिन में स्टार्ट-अप को शुरू करने की व्यवस्था

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