बैंकिंग एवं वित्तीय सचेतना – भाग 109

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Editorial Team

14 Apr, 2016

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बैंकिंग जागरूकता,


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Banks-Bureau-2016

1) एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU banks) के प्रमुखों का चयन तथा उनकी नियुक्ति करने तथा इन बैंकों की वित्तीय आवश्यकताओं तथा व्यावसायिक रणनीतिओं को दुरुस्त करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने एक नई संस्था का गठन 28 फरवरी 2016 को किया। इस नई संस्था का नाम क्या है जिसको स्थापित करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार ने वर्ष 2015 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए घोषित कार्यक्रम “इन्द्रधनुष” के तहत की थी? – बैंक बोर्ड ब्यूरो (Banks Board Bureau – BBB)

विस्तार: बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) की स्थापना केन्द्र सरकार ने 28 फरवरी 2016 को की। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों तथा उच्च-अधिकारियों की नियुक्ति में केन्द्र सरकार को यथोचित सलाह प्रदान करना तथा इन बैंकों द्वारा झेली जा रहीं बुरे ऋण (bad debts) जैसी समस्याओं का हल निकालना है।

इस बोर्ड ने आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल 2016 से कार्य करना शुरू कर दिया।

बैंक बोर्ड ब्यूरो को केन्द्र सरकार ने इस क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित प्रोफेशनल्स की संस्था के रूप में स्थापित किया है तथा यह उस नियुक्ति बोर्ड (Appointments Board) का स्थान लेगा जिसके द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूर्णकालिक निदेशकों (Whole-time Directors) तथा गैर-कार्यकारी अध्यक्षों (non-Executive Chairman) की नियुक्ति की जाती थी।

बैंक बोर्ड ब्यूरो की स्थापना ऐसे समय में हुई है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियों (Non-Performing Assets – NPAs) में भारी वृद्धि की समस्या से जूझ रहे हैं। इन बैंकों की NPAs अब 4 लाख करोड़ का स्तर पार कर चुकी हैं।

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Gyan-Sangam-2016

2) बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी हस्तियों की वार्षिक बैठक “ज्ञान संगम” (‘Gyan Sangam’) के वर्ष 2016 के संस्करण का आरंभ 4 मार्च 2016 से किस स्थान पर हुआ? – गुड़गाँव

विस्तार: “ज्ञान संगम” (‘Gyan Sangam’) भारत में बैंकिंग क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों, वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के शीर्ष अधिकारियों का वार्षिक संगम है जिसका पहला संसकरण वर्ष 2015 में पुणे (Pune) में आयोजित किया गया था। अब इस आयोजन का यह दूसरा संस्करण 4 और 5 मार्च 2016 को गुड़गाँव (Gurgaon) में आयोजित किया जा रहा है। इस वार्षिक बैठक में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कारकों तथा इस क्षेत्र की मौजूदा स्थितियों के बारे में गंभीर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

पिछले साल हुए “ज्ञान संगम” के लगभग 7 माह पश्चात केन्द्र सरकार ने सार्वजनिक बैंकों को सुदृढ़ बनाने के लिए “इन्द्रधनुष” (‘Indradhanush’) नामक एक महात्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी।

उल्लेखनीय है कि “ज्ञान संगम” का यह संस्करण ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब सार्वजनिक क्षेत्र के देश के 12 बैंकों ने पिछली तिमाही में घाटे वाले परिणाम सामने रखे हैं तथा इन बैंकों का बुरा ऋण (bad debts) सिर्फ एक तिमाही में एक लाख करोड़ का स्तर पार कर गया है।

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Amit-Mitra-2016

3) केन्द्र सरकार ने 19 फरवरी 2016 को राज्य के वित्त मंत्रियों की उस अधिकार-प्राप्त समिति (Empowered Committee of state finance ministers) का नया अध्यक्ष (Chairman) किसे नियुक्त किया जो प्रस्तावित गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (Goods and Services Tax – GST) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी? – अमित मित्रा (प. बंगाल के वित्त मंत्री)

विस्तार: वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा द्वारा 19 फरवरी 2016 को की गई घोषणा के अनुसार पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा (Amit Mitra) को केन्द्र सरकार ने राज्य के वित्त मंत्रियों की उस अधिकार-प्राप्त समिति (Empowered Committee of state finance ministers) का नया अध्यक्ष चुना है।

मित्रा पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) से सम्बद्ध हैं तथा वे वर्ष 2011 से राज्य के वित्त मंत्री का पद संभाले हुए हैं। इस पद को संभालने से पूर्व वे भारतीय चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री परिसंघ (FICCI) के महासचिव (Secretary General) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

राज्य के वित्त मंत्रियों की यह अधिकार-प्राप्त समिति देश के अप्रत्यक्ष करों में सुधारों के नए युग का सूत्रपात करने वाले गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (GST) के ढांचे, इसके कार्यान्वयन तथा तमाम विवादों को लेकर राज्यों में सहमति बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

यह पद नवम्बर 2015 में तब रिक्त हो गया था जब इस पद को संभाल रहे केरल के वित्त मंत्री के.एम. मणि (K.M. Mani) ने घोटालों में नाम आने के बाद राज्य के वित्त मंत्री के पद को छोड़ दिया था।

उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार 1 अप्रैल 2016 से GST को लागू करने की पूर्व-निर्धारित तिथि को इस बार कार्यान्वित नहीं कर पायेगी तथा अब इसे अगले वित्त वर्ष (2017-18) से पहले लागू नहीं किया जा सकेगा।

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4) केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2016-17 का आम बजट 29 फरवरी 2016 को लोकसभा में पेश किया। इस बजट में मुख्य जोर कृषि तथा मूलभूत संरचना के विकास पर रहा। वहीं आयकर ढांचे में कोई बदलाव नहीं दिया गया, हालांकि छोटे करदाताओं को मामूली कर छूट प्रदान की गई। 0.5% के किस अधिभार (Cess) के लगाए जाने से सेवा कर (Service Tax) बढ़कर 15% हो गया है? – कृषि कल्याण अधिभार

विस्तार: वर्ष 2016-17 के बजट में कृषि कल्याण अधिभार (Krishi Kalyan Cess) नामक एक नया अधिभार सभी कर-सेवाओं पर लगाए जाने की घोषणा हुई। इसके चलते सेवा कर वर्तमान 14.5% से बढ़कर 15% हो गया है।

इस अधिभार से एकत्रित धनराशि का प्रयोग देश के कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ाने तथा किसानों के कल्याण के लिए किया जायेगा। यह अधिभार 1 जून 2016 से प्रभाव में आ जायेगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015-16 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने सेवा कर की दर को 12.36% से बढ़ाकर 14% कर दिया था। 14% की यह नई दर 1 जून 2015 से प्रभाव में आई थी। इसके बाद 15 नवम्बर 2015 से 0.5% का “स्वच्छ भारत अधिभार” (Swachh Bharat Cess) लगाया गया था। इसके चलते सेवा कर की दर 14.5% हो गई थी। अब कृषि कल्याण अधिभार लगाए जाने के बाद सेवा कर की नई दर 15% हो गई है।

उल्लेखनीय है कि सेवा कर को सरकार द्वारा सेवाओं की श्रेणी में आने वाले आर्थिक गतिविधियों पर लगाया जाता है लेकिन इसमें शुल्क ग्राहक को अदा करना होता है। यह अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) के तहत आता है तथा यह 1994 के वित्त विधेयक (Finance Act, 1994) के चलते प्रभाव में आया था।

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5) केन्द्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) ने सार्वजनिक सेवाओं के लिए डेबिट (debit) अथवा क्रेडिट (credit) कार्ड से अथवा इंटरनेट से भुगतान करने से सम्बन्धित कौन सा महत्वपूर्ण फैसला 24 फरवरी 2016 को लिया? – उसने ऐसे भुगतानों पर लगाए जाने वाले अधिभार (surcharge) को समाप्त करने का निर्णय लिया

विस्तार: सार्वजनिक सेवाओं (public services) के लिए तथा उनके उपयोग के लिए क्रेडिट/डेबिट कार्ड अथवा इंटरनेट से किए गए भुगतान पर अधिभार (surcharge) लगाने की वर्तमान प्रवृत्ति को समाप्त करने का निर्णय लेकर केन्द्रीय कैबिनेट ने देश में नकद-रहित भुगतानों (cashless transactions) की संख्या को बढ़ाने की दिशा में एक प्रमुख कदम किया है। इससे नकद भुगतान (cash payments) को कम करने में मदद मिलेगी।

कार्डों से तथा अन्य डिज़िटल तरीकों से भुगतान करने को बढ़ावा देकर सरकार काले धन की प्रवृत्ति पर भी नकेल कसने की मंशा रखती है। उल्लेखनीय है कि देश में पिछले कुछ समय से कार्ड आधारित तथा डिज़िटल भुगतानों में वृद्धि हुई है लेकिन फिर भी अधिकांश भुगतानों में नकद का ही बोलबाला है।

माना जा रहा है कि कार्ड व डिज़िटल भुगतान पर अधिभार (surcharge) होने से बहुत से लोग इन माध्यमों से भुगतान करने से बचते हैं।

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6) केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने वर्ष 2015-16 का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey for 2015-16) 26 फरवरी 2016 को संसद में पेश किया। इस सर्वे में राजकोषीय समझदारी अपनाने तथा मुद्रास्फिति को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया गया जबकि दूसरी ओर अर्थव्यवस्था के सम्मुख खड़ी चुनौतियों को भी स्वीकार किया गया। आर्थिक सर्वेक्षण, जिसे देश की अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने वाला सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, को किस अधिकारी द्वारा तैयार किया जाता है? – मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Adviser)

विस्तार: वर्ष 2015-16 के आर्थिक सर्वेक्षण, जिसे मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रह्मण्यम (Arvind Subramanian) द्वारा तैयार किया गया है, में उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में चल रही निराशा के बीच भारत को ‘स्थिरता का आश्रय-स्थल’ (“haven of stability”) तथा “अवसरों का पड़ाव” (“outpost of opportunity”) बताया है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16 के मुख्य बिन्दु:

सर्वे में बताया गया कि वर्ष 2015-16 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर (GDP growth) 7 से 7.75% के बीच रहने का अनुमान है

चालू वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3.9% रहने का अनुमान

सर्वे में वर्ष 2016-17 के दौरान राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सकल घरेलू उत्पाद का 3.5% रखने पर जोर दिया गया

वर्ष 2016-17 के दौरान खुदरा मुद्रास्फीति (retail inflation) 4.5 से 5% के बीच रहने का अनुमान जबकि अप्रैल 2015 से जनवरी 2016 के बीच यह 4.9% रही है

वर्ष 2016-17 के दौरान देश का चालू खाते का घाटा (current account deficit ) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1 से 1.5% रहने का अनुमान

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7) केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु (Suresh Prabhu) ने 25 फरवरी 2016 को वर्ष 2016-17 का रेल बजट (Railway Budget for 2016-17) पेश किया, जो उनके द्वारा पेश दूसरा बजट था। इसमें यात्री किराए तथा माल-भाड़े में कोई वृद्धि नहीं किया जाना सबसे महत्वपूर्ण खबर रही। हालांकि रेल मंत्री ने यह स्वीकार किया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू किए जाने का प्रतिकूल प्रभाव विभाग की स्थिति पर पड़ेगा। रेल बजट के अनुसार वर्ष 2016-17 के दौरान भारतीय रेल का परिचालन अनुपात (Operating Ratio) क्या रहेगा? – 92%

विस्तार: परिचालन अनुपात (Operating Ratio) किसी भी व्यावसायिक संगठन की कार्यकुशलता का आकलन करने वाले कुछ सबसे महत्वपूर्ण आगमों में से एक माना जाता है। 92% परिचालन अनुपात का अर्थ हुआ कि रेलवे अपने प्रति 100 रुपए की कमाई को अर्जित करने के लिए 92 रुपए का व्यय करेगी। यह अनुपात जितना कम होता है उतना अच्छा माना जाता है।

वर्ष 2015-16 के दौरान परिचालन अनुपात 90% तय किया गया था। इस बार इसमें दो अंकों की वृद्धि हुई है जिसका मुख्य कारण है – सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप भारतीय रेल पर पड़ने वाला लगभग 30 हजार करोड़ का अतिरिक्त व्यय।

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8) कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने 12 फरवरी 2016 को किन तो वित्तीय उपक्रमों का विलय (merger) करने का आदेश जारी कर दिया जो लोकहित में कम्पनी कानून (Company Act) के प्रावधानों के तहत केन्द्र सरकार द्वारा जबरन आदेशित किया गया दो निजी उपक्रमों के विलय का अपनी तरह का पहला आदेश है? – फाइनेंशियल टैक्नोलॉजी इण्डिया लिमिटेड (FTIL) और नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (NSEL)

विस्तार: कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने 12 फरवरी 2016 को अपने तरह का देश का पहला आदेश देते हुए नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड – National Spot Exchange Ltd (NSEL) नामक कमोडिटी एक्सचेंज में हुए घोटालों के लिए फाइनेंशियल टैक्नोलॉजी इण्डिया लिमिटेड (Financial Technologies India Ltd – FTIL) को दोषी मानते हुए इन दोनों उपक्रमों का परस्पर विलय करने का आदेश जारी कर दिया।

इस प्रकार कम्पनी कानून (Company Act) द्वारा लोकहित (public interest) में ऐसा विलय करने के लिए प्रदत्त अधिकार के सरकार द्वारा प्रयोग का यह पहला मामला हो गया।

लेकिन फाइनेंशियल टैक्नोलॉजी इण्डिया लिमिटेड में सर्वप्रमुख हिस्सेदारी रखने वाले उद्यमी जिग्नेश शाह (Jignesh Shah) ने सरकार के इस विलय आदेश को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा कर दी। उल्लेखनीय है कि नेशनल स्पॉट एक्सजेंज में फाइनेंशियल टैक्नोलॉजी इण्डिया लिमिटेड की 99.99% हिस्सेदारी है तथा जुलाई 2013 में इस एक्सचेंज में 5,574.35 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद इसके व्यवसाय करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था।

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9) केन्द्रीय कैबिनेट (मंत्रीमण्डल) ने 17 फरवरी 2016 को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के व्यापार सरलीकरण समझौते को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। यह समझौता वैश्विक व्यापार को बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में व्याप्त वर्तमान कस्टम प्रणाली को सरल करने के लिए तैयार किया गया है। भारत अब व्यापार सरलीकरण समझौते को स्वीकृति प्रदान करने वाला विश्व का ……….देश बन गया है – 71वाँ

विस्तार: विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization’s – WTO) के व्यापार सरलीकरण समझौते (Trade Facilitation Agreement – TFA) को अपनी स्वीकृति प्रदान कर भारत ऐसा करने वाला दुनिया का 71वाँ देश बन गया है। उल्लेखनीय है कि इस महात्वाकांक्षी समझौते को प्रभाव में लाने के लिए आवश्यक है कि विश्व व्यापार संगठन के कम से कम दो-तिहाई सदस्य देश (यानि 107 देश) इसे अपनी स्वीकृति प्रदान करें।

व्यापार सरलीकरण समझौते (TFA) के तहत वैश्विक बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सभी देशों के कस्टम विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने, तमाम व्यापार शुल्कों को कम करने तथा व्यापार की संपूर्ण प्रक्रिया को अधिकाधिक सरल बनाने पर जोर दिया गया है। इससे सामान की आवाजाही तथा उसकी कस्टम क्लीयरेंस सरल होने की आशा व्यक्त की जा रही है।

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10) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 17 फरवरी 2016 को पीएसीएल लिमिटेड (PACL Limited) में लाखों निवेशकों द्वारा भूमि खरीदने के किए गए करोड़ों रुपए के निवेश की रकम निवेशकों को वापस दिलाने के उद्देश्य इस कम्पनी द्वारा खरीदी गई जमीन को बेच कर लोगों को पैसा वापस करने के उद्देश्य से एक समिति का गठन किया। इस समिति का अध्यक्ष किसे बनाया गया है? – न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा (सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश)

विस्तार: पीएसीएल लिमिटेड (PACL Limited) में लोगों का फँसा धन वापस दिलाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India – SEBI) को इस दिशा में कदम उठाने का आदेश दिए जाने के बाद इस समिति का गठन किया गया है। न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा (Justice R.M. Lodha) जहाँ समिति के अध्यक्ष होंगे वहीं SEBI के पूर्णकालिक सदस्य एस. रमण (S. Raman) तथा सेबी के मुख्य जनरल मैनेजर और उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक अमित प्रधान (Amit Pradhan) इस समिति के दो सदस्य होंगे।

उल्लेखनीय है कि 2 फरवरी 2016 को SEBI ने उसकी अनुमति के बिना वर्ष 1996 से 2014 के बीच देश भर के निवेशकों से 49,100 करोड़ की राशि अवैध तरीके से एकत्र करने के मामले में उसके 9 निदेशकों पर 23.32 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा दिया था।

SEBI ने अपने आदेश में कहा था कि यह कम्पनी तथा उसके निदेशक बिना उसकी अनुमति के आम जनता से तमाम प्रकार की निवेश योजनाओं – collective investment schemes (CIS) के द्वारा 1996 से लगातार धन एकत्र कर रहे थे।

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