आर्थिक शब्दावली – Economic glossary Part – I

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Editorial Team

26 Aug, 2017

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आर्थिक शब्दावली – Economic glossary Part – I

 

 

 

 

 

 

 

  1. बिड प्राइस – Bid Price

वह कीमत जिस पर वित्तीय, प्रतिभूतिशेयर, विदेश मुद्रा या वस्तु को खरीदने के लिए बोली लगाई जाती है। एक तो नीची कीमत तथा दूसरी विक्रय कीमत जो ऊंची होती है जिस पर प्रतिभूति या वस्तु को बेचना है इन दोनों कीमतों का अंतर विक्रेता का मार्जिन होता है।

  1. बाजार पूंजीकरण – Market Capitalisation

एम कैप यानि मार्केट कैपिटलाइजेशन से आशय कंपनी के सभी शेयरों के सफल बाजार मूल्य से है। सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत रूप में यह किसी अर्थशास्त्र के वित्तीय परिपक्वता एवं देश में निगमीकरण की स्थिति को प्रदर्शित करता है। लगभग सभी विकसित देशों में कंपनियों का बाजार पूंजीकरण उसके सकल घरेलू उत्पाद के बराबर या उससे अधिक ही है। कम विकसित पूंजी वाले देश में यह अनुपात कम होता है।

  1. डेरिवेटिव ट्रेडिंग – Derivative Trading

डेरिवेटिव ट्रेडिंग पूंजी बाजार की एक सुरक्षात्मक विधा है। वस्तु एक प्रपत्र के रूप में डेरिवेटिव का अपना कोई अस्तित्व नहीं है। इसका महत्व शेयर जैसे प्रपत्रों से ही होता है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग लागू करने का मुख्य उद्देश्य किसी वाणिज्य या वित्तीय लेन-देन या स्टॉक होल्डिंग से एक प्रकार से सुरक्षा उपलब्ध कराता है जिससे कीमतों में होने वाले असामान्य उतार-चढ़ाव का कोई प्रतिकूल प्रभाव न पडे़। इस सुरक्षा को तकनीकी भाषा में हेजिंग की संज्ञा दी जाती है। इसके लिए डेरिवेटिव की तीन श्रेणियां प्रयोग में लाई जाती हैं। पहली श्रेणी का डेरिवेटिव फारवर्ड है, दूसरी श्रेणी का फ्यूचर है तथा तीसरी श्रेणी का ऑप्शन है।

  1. बॉटम फिशर – Bottom Fisher

यह शब्द एक ऐसे विनियोक्त के लिए प्रयुक्त किया जाता है जो शेयरों के मूल्य बहुत नीचे तक गिर जाने की प्रतीक्षा करता है। यह मूल्य सामान्यता अंकित मूल्य से कम हो जाता है। इससे विनियोक्त को यह आाशा रहती है कि निकट भविष्य में कंपनी की स्थिति में सुधार होगा। इस प्रकार के निवेश्कों को बारगेन इंडर भी कहा जाता है।

  1. म्यूचुअल बैंकिंग – Mutual Banking

आजकल म्यूचुअल फंड वितरण तथा रिटेल बैंकिंग सुविधा व्यापारिक बैंकों की सामान्य क्रियाओं का एक महत्वपूर्ण भाग बनाया गया है। वास्तविकता बैंकों द्वारा म्यूचुअल फंड का वितरण है। इसलिए बैंकों तथा म्यूचुअल फंड के बीच गठबंधन दिन प्रति दिन हो रहे हैं। ऐसा प्राय: देखा जा रहा है कि बैंक तथा म्यूचुअल फंड एक ही परिवार से संबंद्घ हैं। आजकल म्यूचुअल फंड की नई धारणा सामने आ रहीं हैं जिसे बैंक ग्राहकों के लिए नए उत्पाद तथा नई सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इसके अंर्तगत म्यूचअल फंड ग्राहकों को एक विशिष्ठ क्रेडिट कार्ड दे देते हैं जिसके द्वारा ग्राहक किसी स्कीम के तहत म्यूचुअल फंड की निर्धारित सीमा के भीतर बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकता है। ग्राहकों को बैंक तथा म्यूचुअल फंड की सुविधा को अधिकतम करना ही म्यूचुअल बैंकिंग की आधारभूत मान्यता है।

  1. रिटेल बैंकिंग या पर्सनल बैंकिंग – Retail Banking or Personal Banking

आज से कुछ समय पूर्व बैंक केवल उत्पादक क्रियाओं की पूर्ति के लिए ही ऋण देते थे, उपभोग की आवश्यकता की पूर्ति के लिए इनके द्वारा ऋण नहीं दिया जाता था पर उनके लाभ की सीमा में कमी, बढ़ती लागत, औद्योगिक मंद, नियमों को दिए गए ऋणों के साथ एनपीए में वृद्घि आदि के कारण आजकल बैंक अपने संसाधनों को फुटकर उधारी में लगा रहे हैं, बैंक अपने संसाधनों को फुटकर उधारी, व्यक्तिगत ऋणों जैसे पर्सनल ऋण, गृह ऋण, आटो ऋण, ह्वाइट गुड्स लोन, क्रेडिट कार्ड ऋण, ट्रेवेल ऋण आदि की ओर ले जा रहे हैं। इस प्रकार की बैंकिंग क्रियाओं को हम रिटेल बैंकिंग या पर्सनल बैंकिंग कहते हैं। सूचना प्रोद्योगिकी, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, ए.टी.एम., डी मैट एकाउंट्स आदि के कारण पिछले दो वर्षों में भारत में रिटेल बैंकिंग के क्षेत्र में बहुत तेजी से वृद्घि हुई है।

  1. एनीव्हेयर बैंकिंग – Anywhere Banking

एनीव्हेयर बैंकिंग से अशय है कि किसी भी स्थान से बैंकिंग सुविधा प्राप्त करना। यह सेवा ग्राहक की सुविधा के लिए टेक्नोलॉजी आधारित सेवा है। इसके अंतर्गत जिसका खाता बैंक के किसी भी शाखा में है, वह देश में किसी भी बैंक की किसी शाखा के साथ बैंकिंग व्यवहार कर सकता है। वह अपने खाते से रकम निकाल सकता है, उसमें जमा कर सकता है तथा अन्य बैंकिंग व्यवहार भी कर सकता है। इस प्रकार अब दूरी अर्थहीन है, टेक्नोलॉजिकल विकास ने बैंकिंग के दायरे को बहुत अधिक फैला दिया है।

  1. गैर निष्पादनकारी सम्पत्ति – Non Performing Assets (NPA)

गैर निष्पादनकारी परिसम्पत्ति से आशय ऐसे अग्रिमों या बैंकों द्वारा दिए गए पिछले ऋणों से है जिसका मूल धन तथा ब्याज का भुगतान ऋण के द्वारा 90 या उससे अधिक दिनों तक नहीं किया गया है और इस प्रकार बकाया राशियां एकात्रित हो गई हैं। भारत में सार्वजनिक बैंकों की लाभदेयता में वृद्घि के लिए नरसिंहम समिति (2) ने वर्ष 2002 तक सभी बैंकों के लिए केवल एन.पी.ए. के औसत स्तर को 3 प्रतिशत तक कम करने पर बल दिया।

  1. अनुग्रह विपत्र – Grace Bill

जब बिना किसी प्रतिफल के एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे पर तथा दूसरे व्यक्ति द्वारा पहले पर एक ही राशि का बिल लिखा जाए तथा दोनों बिल की कटौती कराके बैंक से रुपए प्राप्त कर लें, इस प्रकार दोनों ही बिना किसी वास्तविक व्यवहार के लाभान्वित हों तो इस प्रकार के बिल को अनुग्रह विपत्र कहते हैं।

  1. वाणिज्यिक प्रपत्र – Commerical Bill

सी.पी. मूलत यू.एस.ए. तथा यूरोप के वित्तीय बाजार का प्रपत्र था। वाघुल समिति की संस्तुति पर 27 मार्च, 1989 को भारत में जमा प्रमाण पत्र के साथ सी.पी. के निर्गमन की अनुमति प्रदान की गई। सी.पी. एक प्रतिज्ञापत्र युक्त अल्प अवधि का प्रपत्र है जिसकी 7 दिन से 90 दिन की परिपक्वता अवधि होती है। सी. पी. का निर्गमन बट्टा आधार पर होता है।

  1. जमा प्रमाणपत्र – Certificate of Deposit

सीडी एक विपणन योग्य प्रपत्र है जो एक निश्चित समयावधि के लिए सावधि जमा के स्वामित्व को प्रदर्शित करता है। यह प्रदर्शित करता है कि प्रमाणपत्र के उल्लेखित धनराशि की सावधि जमा बैंक के पास है। सीडी सावधि जमा प्रमाणपत्र से भिन्न है तथा उत्तम है क्योंकि यह विपणन योग होता है, जबकि एफडी प्रमाणपत्र विपणन योग्य नहीं होता है। सीडी को अंकित मूल्य से कम पर बट्टे पर निर्गमित किया जाता है। बट्टे की दर का निर्धारण मांग एवं पूर्ति की शक्तियों के द्वारा होता है। सामान्यता यह दर सावधि जमा की दर से उंची होती है। इसे जून,1980 में शुरू किया गया।

  1. अन्तरबैंक भागीदारी प्रमाणपत्र –

मुद्रा बाजार के तरलता की समस्या को समाप्त करने के लिए एक अतिरिक्त प्रपत्र आईबीपीएस की शुरुआत की गई। आईबीपीएस दो प्रकार की हो सकती है-जोखिम भागिता के साथ तथा जोखिम भागिता रहित। जोखिम भागितायुक्त आईबीपीएस 91 से 180 दिन के लिए उन अग्रिम के लिए निर्गत की जाती है जिनके अग्रिम की सुरक्षा के संबंध में कोई संदेह नहीं हो। जोखिम भागिताहीन आईबीपीएस अधिक से अधिक 90 दिन के लिए निर्गत होती है। ये सभी मुद्रा बाजार विलेख है क्योंकि ये सभी मुद्रा बाजार में तरलता प्रभावित करने के लिए किए जाते हैं। बैंक ड्रॉफ्ट केवल रुपए हास्तांतरण का माध्यम है, मुद्रा बाजार विलेख नहीं है।

  1. रेपो एवं रिवर्स रेपो दर – Repo and Reverse Repo Rate

यह मुद्रा के प्रकार में वृद्घि या कमी करने के लिए केंद्रीय बैंकद्वारा अपनाया जाने वाला अल्पकालिक महत्वपूर्ण तरीका है। रेपो दर में केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियों को खरीदता है जिससे वाणिज्यिक बैंकों के पास तरलता में वृद्घि होती है, परिणामस्वरूप वे निजी क्षेत्र को अधिक साख उपलब्ध कराते हैं जिससे बाजार में नकदी की मात्रा बढ़ जाती है। इसके विपरीत रिवर्स रेपो के द्वारा केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियों को वाणिज्यिक बैंकों को बेचना है जिससे उनके पास तरलता में कमी आती है।

  1. बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटिलमेंट्स – Bank for International Settlement

यह एक अंतरराष्ट्रीय बैंक है जो 1930 में स्थापित किया गया था तथा बेसेल में स्थित है। शुरू में यह जर्मनी, फ्रांस, इटली, बेल्जियम तथा यूके के भुगतान संतुलन के असंतुलन को समायोजित करने की ऐजेंसी के रूप में कार्य करता था। इस समय पश्चिम यूरोप, यूएसए, कनाडा तथा जापान के सभी केंद्रीय बैंक इसके सदस्य हैं। यद्यपि आईएमएफ को सभी अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व्यवहार के लिए उत्तरदायी माना जाता है पर अब भी यह प्रभावपूर्ण है। इसे केंद्रय बैंकों का बैंक माना जाता है।

  1. ग्रीन फील्ड प्राइवेट रूरल एग्रीकल्चरल बैंक्स – Green field private rural agricultural Banks

ये वे बैंक हैं जो पूर्ण या अद्र्घग्रामीण क्षेत्रों में खोले जाते हैं। इनका प्रमुख कार्य कृषि तथा कृषि से संबंद्घ क्षेत्रों, कृषि प्रसंस्करण तथा कृषि उद्योगों को ऋण देना है।

  1. अपतटीय बैंक जमा

जिस देश में जमा रखा जाता है उस देश की मुद्रा छोड़ कर किसी अन्य देश की मुद्रा में जमा रखने के व्यवहार को अपटतीय बैंक जमा कहते हैं तथा इस प्रकार की अपतटीय जमा में व्यवहार करने वाले बैंकिंग क्रिया को अपतटीय बैंकिंग कहते हैं।

  1. लोकल एरिया बैंक

केंद्रीय बजट 1996-97 में भारत में व्यापारिक बैंकिंग के विकास की दिशा में लोकल एरिया बैंक के विकसित करने की घोषणा एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण कदम है। ये बैंक निजी क्षेत्र के अंतर्गत होंगे। विकेन्द्रीयकृत बैंकिंग प्रणाली के विकास की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये बंैक यूनिट बैंक की तरह से होंगे तथा स्थानीय क्षेत्रों विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्घ होंगे।

  1. इस्लामिक विकास बैंक – Islamic development Bank

इस्लामिक सम्मेलन के संगठन द्वारा 1974 में सबसे पहले मिस्र में इस्लामिक विकास बैंक, जो एक प्रकार से क्षेत्रीय विकास बैंक था, जिसका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक देशों तथा समुदायों में ऐसे बैंक की स्थापना करना है जो कुरान के सिद्घांतों पर आधारित हो, जो सूदखोरों को अस्वीकार करता है तथा ब्याज पर ऋण देना मना करता है। यह जो ऋण देता है वह नगण्य कमीशन पर देता है। शरीयत के अनुसार लाभ कमाने के लिए किसी उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं इसलिए देर से भुगतान पर दंड की व्यवस्था नहीं है। भारत में पहला इस्लामिक बैंक कोच्चि में खुल रहा है जिसमें राज्य की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत होगी।

  1. शैडो बैंकिंग – Shadow Banking

ये ऐसे बैंक हैं जो सामान्य बैंकिंग प्रणाली में नहीं आते पर सामान्य बैंकों के निष्पादन तथा नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें हम निवेश बैंक, हेज फंड, प्राइवेट इक्विटी तथा संरचित निवेश वाहन को रखते हैं।

  1. अनुसूचित बैंक

अनुसूचित बैंक वे बैंक होते हैं जो रिजर्व बैंक की दूसरी अनुसूचित में सम्मिलित हों, इनकी प्रदत्त पूंजी तथा आरक्षित कोष का योग कम से कम 5 लाख रुपए के बराबर हो तथा रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार ये अपनी जमा का निर्धारित प्रतिशत आरक्षित कोष के रूप में रिजर्व बैंक के पास रखते हैं। इस प्रकार अनुसूचित बैंक वे बैंक होंगे जो दी गई शर्तों को न पूरा करने के कारण रिजर्व बैंक की दूसरी अनुसूचित में सम्मिलित नहीं हैं।

The Swedish newspaper was recently asked it to delete the reference made by President Pranab Mukherjee to the Bofors scam in an interview to it, as a claim protested by the Indian Government on 27 May 2015. India has expressed disappointment over the disrespect shown to the President, the newspaper has defended its right to publish what was said during the interview.

Know, who is Vijay Kelkar and what is PPP !

Vijay Kelkar is a renowned economist and a former Finance Secretary. He was appointed head of newly constituted committee to give recommendations to recast the model of Public-Private-Partnership (PPP) model in India. India is one of the largest PPP market with over 900 projects. The Kelkar committee will review the PPP policy, suggest a better risk-sharing mechanism between private developers and the government after analysing such projects.

Know, who is Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar !

Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar was crowned as the new Maharaja of of Mysuru (Mysore) royal family. He is the 23-year old grandson of Princess Gayathri Devi, who was the eldest daughter of the last Maharaja of Mysore, Sri Jayachamarajendra Wadiyar. The coronation was held at Mysuru’s famous Amba Vilas Palace, which was decked up for the occasion.

Know about Sepp Blatter!

Swpp Blatter, was re-elected as FIFA president for a fifth term at the 65th Annual Congress of FIFA held at Zurich for four year term.

Prince Ali bin al-Hussein of Jordan stood against Blatter in this election. It is worth mentioning that FIFA is going through a major controversy regarding corruption in the organisation with two FIFA vice presidents and a recently elected FIFA executive committee member still in custody.

 


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