आर्थिक शब्दावली – Economic glossary Part – II

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Editorial Team

29 Aug, 2017

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आर्थिक शब्दावली – Economic glossary Part – I

 

 

 

 

21 – सर्वव्यापी बैंकिंग

जब वाणिज्यिक बैंक सामान्य वाणिज्यिक बैंकों के कार्यों के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों के दीर्घकालीन वित्तीयन के भी कार्य को ले लें तो इसे सर्वव्यापी बैंकिंग कहते हैं। जर्मनी में विनियोग बैंकिंग या विकास बैंकिंग के अनेक कार्य वाणिज्यिक बैंकिंग के साथ जुड़े रहते हैं।

22- एटीएम

बैंक द्वारा अपने जमा धारकों को बैंक में व्यापक स्तर पर जमा निकासी की दी जाने वाली सुविधा है। इसके तहत बैंकअपने जमाकर्ता को एक एटीएम कार्ड निर्गत करता है जिस पर एक नम्बर पड़ा रहता है। कार्ड होल्डर, कम्प्यूटर नेटवर्क से जुडी संपूर्ण देश में जुडी हुई किसी भी बैंक की किसी शाखा से, एमटीएम मशीन में अपना नम्बर पंच करके, ऑटोमैटिक तरीके से, रुपए की निकासी कर सकता है। इस व्यवस्था के तहत एटीएम धारक अपने पास अपने व्यवहार या आकस्मिक स्थितियों को पूरा करने के लिए कम तरल मुद्रा रखेगा, किसी  दूसरे शहर में जाने पर जहां वह, बैंक ड्राफ्ट, ट्रेवेलर्स चेक या नकद मुद्रा को लेकर जाता था अब उसका काम एटीएम कार्ड से अधिकांशतया हो जाता है। यह केवल निकासी का माध्यम है, जमा माध्यम नहीं।

23- फ्री बैंकिंग

यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें नोट निर्गमन का एकाधिकार केंद्रीय बैंकों के पास नहीं होता बल्कि सभी बैंकों को प्राप्त होता है।

24- एम-बैंकिंग

मोबाइल बैंकिंग प्रणाली वह प्रणाली है जिसमें मोबाइल फोन या किसी अन्य मोबाइल युक्ति अन्य प्रयोग द्वारा किसी ग्राहक के खाते के साथ जोड़कर वित्तीय व्यवस्था को करते हैं। वित्तीय सेवाओं के संदर्भ में यह अद्यतन युक्तियों में से एक है जिसमें आरटी के माध्यम से वित्तीय सेवाएं सरल बनाई जाती हैं। यह विकास शीलता तथा अल्पविकसित देशों में मोबाइल फोन के व्यापक प्रोग्राम के कारण संभव हो सकता है। एम-बैंकिंग सेवाएं, जो एसएमएस चैनल प्रयोग में लगे हैं, अत्यंत ही अल्प लागत पर की जा सकती है। मोबाइल नेटवर्क एक तैयार टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है, जो प्राय: क्षमता से कम प्रयोग में रहता है, इसलिए इसके माध्यम से अन्य सेवाएं जैसे एम-बैंकिंग या, एम पेमेंट अत्यंत ही अल्प लागत पर उपलब्ध हो सकते हैं। इतना ही नहीं भारत जैसी अर्थव्यवस्था में जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली अधिकांश जनसंख्या बैंक के साथ नहीं जुड़ी है वहीं एम-बैंकिंग के किसी विशिष्ट या इसी उद्देश्य से विकसित मॉडल के द्वारा अल्प लोगों को वित्तीय सेवाओं के साथ जोड़ा जा सकता है।

– इस समय बहुत से बैंक एसएमएस बैंकिंग दे रहे हैं जिसके अंतर्गत ग्राहक मोबाइल या एसएमएस के जरिए अपने खाते का शेष अपने द्वारा किए गए पिछले व्यवहार या अन्य रिकार्ड के संबंध में सूचना प्राप्त कर सकता है। मोबाइल ने उक मोबाइल बैंकिंग प्लेटफार्म तैयार किया है जिसके प्रयोग के द्वारा ग्राहक आईसीआईसीआई बैंक तथा अन्य बैंकों में फंड ट्रांसफर कर सकता है, बीमा प्रीमियम का भुगतान कर सकता है। शीघ्र ही अन्य बैंक भी इस दिशा में प्रयास करेंगे।

25- शाखा रहित बैंकिंग

ऐसी बैंकिंग व्यवस्था जिसमें बैंक बिना अपनी शाखा खोले हुए, दूर स्थित पिछडे़ ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों से संबंध रखते हैं जहां उनकी कोई बैंकिंग शाखा नहीं है, लेकिन बैंकिंग सेवाएं प्रदान करता है तो इसे शाखा रहित बैकिंग कहते हैं। 2006 में कार्पोरेट बैंक ने इस बैंकिंग मॉडल का प्रयोग ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए किया। इसके अंतर्गत बैंक अपने नियुक्त एजेंटों को सरलतापूर्वक कार्य करने वाले टर्मिनल दे देता तथा ग्राहकों को स्मार्ट कार्ड निर्गत कर दिए जाते हैं। पूरा बैंकिंग व्यवहार ‘आवाज निर्देशित प्रणाली’ के माध्यम से होता है अर्थात इनके द्वारा किए गए प्रत्येक बैंकिंग व्यवहार की पुष्टि बोलकर मुख्य शाखा से हो जाती है।

26- कोलंबो प्लान

कोलंबो प्लान का उद्देश्य दक्षिण तथा पूर्वी एशिया में पारस्परिक सहयोग तथा सहायता के माध्यम से आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।

27- स्फीति सूचकांकित बॉण्ड

सामान्यता जो बॉण्ड निर्गत किया जाता है उस पर अंकित ब्याज दर स्थिर होती है तथा बॉण्ड पर मिलने वाली ब्याज की राशि स्थिर होती है तथा परिपक्वता पर जो बॉण्ड में मूलधन का भुगतान होता है, वह भी बॉण्ड के अंकित मूल्य के बराबर होता है। चूंकि स्फीती मुद्रा की क्रयशक्ति में कमी लाती है इस लिए बॉण्ड पर मिलने वाली ब्याज दर तथा परिपक्यता पर मिलने वाले मूल्य धन के मूल्य में स्फीति के कारण कमी होती है। इस लिए स्फीति की स्थिति में कोई विनियोजक बॉण्ड में अपनी बचत नहीं लगाएगा। इस कमी को दूर करने के लिए बॉण्ड पर मिलने वाले ब्याज तथा मूलधन को मूल्य निर्देशांक से जोड़ देते हैं अर्थात ‘भुगतान में स्फीतिक समायोजन’ हो जाए और मुद्रा स्फीति का कोई प्रभाव ब्याज आय या मूलधन की राशि पर नहीं होगा। इस प्रकार के बॉण्ड को हम स्फीति सूचकांकित बाण्ड कहते हैं। यूके में सबसे पहले 1981 में सरकारी प्रतिभूतियों के संबंध में तथा 1985 में ऑस्टे्रलिया में कैपिटल इनडेक्सड बॉण्ड के रूप में इसका प्रयोग किया गया।

28- जीरो कूपन बॉण्ड

ये वे बॉण्ड हैं जिन पर ब्याज दर शून्य होती है। कहने के लिए इन पर कोई ब्याज नहीं प्राप्त होता है। इन बॉण्ड को बट्टा पर निर्गत किया जाता है तथा सम मूल्य पर अदायगी होती है। निर्गमन तथा अदायगी मूल्य का अन्तर एक प्रकार से ब्याज है।

29- प्रबल मुद्रा

यह वह मुद्रा होती है जो जनता के पास करेंसी (नगदी) तथा कॉमर्शियल बैंकों के पास आरक्षितियों के रूप में जमा रहती है। इसे उच्चस्तरीय मुद्रा भी कहा जाता है। यहां प्रबल मुद्रा, कॉमर्शियल बैंकों के पास रिजर्व तथा जनता के पास नगद करेंसी को व्यक्त करता है।

30- सुलभ मुद्रा

सतत भुगतान शेष घाटे के कारण गिरते हुए विनिमय दर वाली मुद्रा को सुलभ मुद्रा कहा जाता है। इस प्रकार की मुद्रा को अन्य देशों द्वारा विदेशी विनिमय कोष के भाग के रूप में नहीं रखा जा सकता है।

31- कागजी मुद्रा मान

देश के मौद्रिक अधिकारियों द्वारा कागज की बनी मुद्रा के रूप में माना जाता है।

32- मुद्रा का चलन वेग

एक निश्चित अवधि में मुद्रा की एक इकाई का जितनी बार भुगतान करने के लिए प्रयोग किया जाता है उसे मुद्रा चलन वेग कहते हैं।

33- कठोर मुद्रा

किसी देश की वह मुद्रा जो स्वर्ण या अन्य किसी देश की मुद्रा में आसानी से परिवर्तनीय है, कठोर मुद्रा कहलाती है।

34 – मुद्रा की क्रय शक्ति

मुद्रा की एक इकाई के बदले में जितनी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं उसे मुद्रा का क्रय शक्ति कहा जाता है।

35 – मानक मुद्रा

वह विधिग्राह्य मुद्रा जिसमें देश की सरकार अपने ऋण चुकाती है।

36 – पूर्ण क्षमता मूर्त मुद्रा

वह मुद्रा जिसका वस्तुमान अंकित मान के समान हो।

37 – आदेश मुद्रा

सरकार के आदेश के आधार पर स्वीकृत मुद्रा।

38 – न्याय मुद्रा

निर्गमकर्ता पर विश्वास के आधार पर स्वीकृत मुद्रा।

39 – सस्ती मुद्रा

वह मुद्रा जिसे नीची ब्याज दर पर प्राप्त किया जा सकता है, सस्ती मुद्रा कहलाती है।

40 – मुद्रा संकुचन

जब बाजार में मुद्रा की कमी के कारण कीमते गिर जाती हैं, उत्पादन व व्यापार गिर जाता है और बेरोजगारी बढ़ती है, वह अवस्था ‘मुद्रा संकुचन’ कहलाती है।

The Swedish newspaper was recently asked it to delete the reference made by President Pranab Mukherjee to the Bofors scam in an interview to it, as a claim protested by the Indian Government on 27 May 2015. India has expressed disappointment over the disrespect shown to the President, the newspaper has defended its right to publish what was said during the interview.

Know, who is Vijay Kelkar and what is PPP !

Vijay Kelkar is a renowned economist and a former Finance Secretary. He was appointed head of newly constituted committee to give recommendations to recast the model of Public-Private-Partnership (PPP) model in India. India is one of the largest PPP market with over 900 projects. The Kelkar committee will review the PPP policy, suggest a better risk-sharing mechanism between private developers and the government after analysing such projects.

Know, who is Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar !

Yaduveer Krishnadatta Chamaraja Wadiyar was crowned as the new Maharaja of of Mysuru (Mysore) royal family. He is the 23-year old grandson of Princess Gayathri Devi, who was the eldest daughter of the last Maharaja of Mysore, Sri Jayachamarajendra Wadiyar. The coronation was held at Mysuru’s famous Amba Vilas Palace, which was decked up for the occasion.

Know about Sepp Blatter!

Swpp Blatter, was re-elected as FIFA president for a fifth term at the 65th Annual Congress of FIFA held at Zurich for four year term.

Prince Ali bin al-Hussein of Jordan stood against Blatter in this election. It is worth mentioning that FIFA is going through a major controversy regarding corruption in the organisation with two FIFA vice presidents and a recently elected FIFA executive committee member still in custody.

 


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